जिम्मेदारों की आंखे बंद, बेखौफ होकर किया जा रहा सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग


#   प्रतिबंध के 8 माह बाद भी नही दिखाई दे रहा कोई असर
#   नगर निगम  व प्रदूषण नियंत्रण विभाग के दावंे हवा-हवाई

कानपुर नगर, मंचों से, बातें करने से किसी समस्या का हल नही निकल सकता, उसके लिए मैदान में कमर कस के उतरना पडता है और शायद कानपुर नगर के विभागीय जिम्मेदार यह करना नही चाहते है। बात तब और भी गंभीर हो जाती है जब विषय पर्यावरण और मानव स्वास्थ से जुडा हो, लेकिन यहां किसी न तो विभागीय अधिकारियों को और न ही उनके अधिनस्थों को कोई फर्क पडता है। सिंगल यूज प्लास्टिक लगातार पर्यावरण के लिए खतरा बनती जा रही है। 2022 में 1 जुलाई को सिंगल यूज प्लास्टिंक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन आज 8 माह बीतने के बाद भी पूरे शहर में कई टन प्रतिबंधित पाॅलीथीन खपाई जा रही है।
पाॅलीथीन को लगतार पर्यावरण के लिए खतरा माना जा रहा है। इसके लिए सरकार भी जागरूक है और सिंगल यूज पाॅलीथीन को रोकने के लिए 1 जुलाई 2022 को सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन भी कर दिया था, लेकिन कानपुर के नगर निगम के साथ ही पर्यावरण अधिकारी इस ओर आंखे मूंदे बैठे है और नीचले स्तर से एक ठेला व्यापारी से लेकर बडे-बडे प्रतिष्ठानों तक में यह प्रतिबन्धित पाॅलीथीन धडल्ले से उपयोग में लाई जा रही है। बतातें चले कि सिंगल यूज पाॅलीथीन की ही तरह थर्माकोल से बने 19 उत्पादों को भी पूरी तरह प्रतिबन्धित किया जा चुका है। सिंगल यूज प्लास्टिक वह होती है जिसका उपयोग केवल एक बार ही किया जा सकता है और यह आसानी से नष्ट नही होती है। यह भले ही कहा जा सकता है कि नगर निगम बीच-बीच मंे अभियान चलाकर ठेलेवालों और छोटे दुकानदारों पर जुर्माना लगाकर वसूलता रहा है लेकिन कभी बडे व्यापारियों या उत्पदनकर्ताओं पर कोई कार्यवाई नही की, जबकि नियम में सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल का सामान बनाने वालो, बेचने वालो तथा इसके आयात व निर्यात पर जुर्माने के साथ ही जेल तक काटना पड सकता है लेकिन विभागीय सख्ती न होने के कारण किसी के अंदर भय नही है और इन प्रतिबन्धित वस्ताओं को बडे पैमारे पर शहर और आसपास उपयोग किया जा रहा है। शहर में केवल 200 मीट्रिक टन कचरा केवल सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल की बनी चीजो का ही होता है जो नष्ट नही होता चाहे उसमें आग ही क्यों न लगा दी जाये। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि शहर में पाॅलीथीन का बिलकुल भी उत्पादन नही होता तो फिर बाजार में खास तौर पर थोक मण्डियों में प्लास्टिक बैग बडे पैमाने में कहां से आ रहे है। जानकारी के अनुसार बडी मात्रा में दूसरे शहरो और राज्यों से कानपुर में पाॅलीथीन चोरी-छिपे लाई जाती है, जिसकी यहां बिक्री की जाती है। आज शहर की हर सडकों और गलियांे में हाईवे के किनारे प्लास्टिक पाॅलीथीन का ठेर लगा हुआ है। यदि इसी प्रकार चलता रहा तो पर्यावरण के लिए यह कितना हानिकारण हो सकता है वह तो है ही साथ ही मानव शरीर के लिए यह सिंगल यूज पाॅलोथीन किसी अभिषाप से कम नही है।

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