चाय नहीं ‘जहर’ पी रहे हैं आप! तुरंत फेंक दें प्लाटिक की छन्नी? इन बीमारियों का है घर

अगर आप चाय के शौकीन हैं तो ये खबर आप ही के लिए है, जरा गौर करें कि कहीं आप चाय के साथ ‘ज़हर’ तो नहीं पी रहे हैं. हम बात कर रहे हैं प्लास्टिक की चायछन्नी की, जिसका इस्तेमाल हमारे घरों और सड़क किनारे चाय की टपरी में धड़ल्ले से किया जाता है. हम में से काफी लोग इस बात का ख्याल नहीं रखते और बेफ्रिक होकर चाय का लुत्फ उठाते हैं. बता दें कि प्लास्टिक की चायछन्नी बीमारियों का घर है जो आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है.

डॉ. भूमेश त्यागी के मुताबिक कोई भी गर्म भोजन या पेय पदार्थ जब प्लास्टिक के संपर्क में आता है तो ये हमारी सेहत के लिए खतरनाक हो जाता है. सिर्फ चाय छन्नी ही नहीं, प्लास्टिक के कप, प्लेट और चम्मच भी भोजन को खतरनाक बना देते हैं. कई बार चाय छन्नी को रिसाइकल्ड प्लास्टिक से तैयार किया जाता है. जैसे ही आप इससे चाय छानते हैं, वैसे ही इसमें मौजूद टॉक्सिक केमिकल्स आपके कप या केतली में चले जाते हैं जो गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं.

प्लास्टिक की छन्नी को लगातार इस्तेमाल करने से कप में हजारों माइक्रोप्लास्टिक का निर्माण होने लगता है. हम में से काफी लोग बाजार से चाय खरीदने जाते हैं तो इसे प्लास्टिक की थैली में पैक करके घर या ऑफिस लाते हैं. ये तरीका आपकी सेहत को बुरी तरह बिगाड़ सकता है.

1. प्लास्टिक में मेट्रोसेमिन और बिस्फीनॉल जैसे हार्मफुल कैमिकल्स पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर में कैंसर फैलाने का काम करते हैं, ये एक खतरनाक बीमारी है जो कई बार इंसान की जान ले लेती है.

2. प्रेगनेंट महिलाओं को गलती से भी प्लाटिक की छन्नी वाली चाय नहीं पीनी चाहिए क्योंकि ये उनके पेट में पल रहे बच्चे तक भी माइक्रोप्लास्टिक पहुंचा सकता है, जो उसकी सेहत के लिए खतरनाक है

4. अगर पुरुषों को प्लास्टिक की चाय छन्नी का इस्तेमाल करने की आदत है, तो इसे तुरंत बदलें, क्योंकि इससे नपुंसकता आ सकती है.

5. चाय छ्न्नी से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक हमारी आंतों की सेहत बिगाड़ देते हैं, जिससे हमारा पाचन तंत्र बिगड़ सकता है.

6. प्लास्टिक में मौजूद खतरनाक कैमिकल्स हमारे दिमाग पर बुरा असर डालते हैं, इससे मेमोरी पॉवर और कंस्ट्रेशन प्रभावित होता है.

हमें अपने घरों या दुकान से प्लास्टिक की चाय छन्नी को तुरंत फेंक देना चाहिए, इसकी जगह स्टील की छन्नी का इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ लोग सूती कपड़े से तैयार की गई छन्नी का भी इस्तेमाल करते हैं जो एक सुरक्षित तरीका है.

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