जिस हुमायूं कबीर को ममता बनर्जी ने बाहर निकाला, क्या सच में भाजपा ने उसे मस्जिद की नींव रखने में मदद की और सौ करोड़ ऑफर किए ! यह प्रश्न और एक स्टिंग तेजी से वायरल हो रहा जिसकी पुष्टि कोई नहीं कर रहा। हालांकि भाजपा कच्ची गोटियाँ नहीं खेलती और बिना सुरक्षा कवच के मैदान में नहीं उतरती ! अब ज़ब भाजपा का ‘हिंदू रक्षक’ होने का मुखौटा उतर रहा है तो लोगो को हुमायु कबीर मामले में विश्वास हो रहा ! भाजपा का और तृणमूल का मामला खुल गया तो हुमायूं कबीर से अलग हो गए ओवैसी, क्या यह समझदारी भरा फैसला है या राजनीतिक पैतरेबाजी यह वक्त बताएगा।
मामला नहीं यहां एजेंडा इक्सपोज़ हुआ है या कहे एआई युग में राजनीति की दुर्दशा हुई है। यह भी एक रणनीति है, साथ रहते तो नुकसान नहीं पहुंचा पाते, लोग सवाल पूछते, अब अलग होकर खुद को साफ़ बताएंगे। कल तक इनके मुरीद हुमायूं कबीर के वीडियो को राजनीति प्रेरित बता रहे थे। इनका मामला भी खुलेगा, हुमायूं कबीर तो शुद्ध रूप से इंडिविजुअल अवसरवादी मैन है, ओवैसी थोड़ा ओर्गैनाईज्ड और फुलप्रूफ हैं, मगर हैं मझे खिलाड़ी। सरकार से तमाम मामलों में छूट लेना, कहीं कालेज में फंडिंग कराना, कहीं मुफ्त में ज़मीन अपने कालेज के नाम कराना, कहीं किसी विभाग से एनओसी लेना, कहीं कोई प्लान पास कराना, कहीं कोई सोसायटी का नक्शा पास करवाना, बैंक की सूद वाली स्कीम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से अप्रूव्ड कराना।
यह पढ़ें लिखे हैं इसलिए सतर्क हैं, हुमायूं कबीर अधीर है जो फंस गया क्या, इक्सपोज़ हो गया… ऐसे कौन बोलता है ? ये सब मामला सेट प्लान है। देखिए कि राजनीति में कैसा खेल होता है ? कैसे कैसे टूल इस्तेमाल किए जाते हैं ? इसे समझने के लिए सिर्फ एक पिन प्वाइंट सूत्र है, जो आपके वोट को बिखेरने और काट कर निष्क्रिय करने की कोशिश करे वह “हुमायूं कबीर” है। दरअसल मुसलमानों के खिलाफ मुसलमानों के ज़रिए ही काम करवाया जा रहा है क्योंकि यह तो खुलेआम घोषणा करके विरोधी हो चुके हैं। इन पर मुसलमान यकीं नहीं करेगा। इसीलिए कहीं राजनीति का गटर, कहीं हुमायूं कबीर, कहीं एक्स मुस्लिम, कहीं सिद्दीकी, कहीं यौन मुर्तद मोहतरमा, कहीं कोई पसमांदा, कहीं कोई शिया, कहीं कोई शेख, कहीं कोई इस्लाम, कहीं कोई नकवी कहीं कोई हुसैन, कहीं कोई इल्मी सब सेट किए हुए है कि मुसलमानों का वोट बिखेरो उनके खिलाफ हो रहे ज़ुल्म को पिछली सरकारों के इतिहास बताकर कुंद करो।
शोर मचवाया गया कि एसआईआर में वोट काटे जा रहे हैं, केवल पश्चिम बंगाल के कुछ सीटों का उदाहरण देखिए जहां हिंदू अधिक है उन्हें वोट तक नही देने दिया जाता। मालदा ज़िला का मानिकचक :- हिंदू वोटर: 50.2% मुस्लिम वोटर: 49.4%.। जिन वोटरों पर अटैक हुआ अधिकतर हिंदू है। मलदा का अन्य क्षेत्र 97.4% मुस्लिम और 2.3% हिंदू हैं। मालदा जिले का मोथाबारी :- हिंदू वोटर: 30%, मुस्लिम वोटर: 69.5%. मुर्शिदाबाद ज़िला का समसरगंज :- मुस्लिम वोटर 82%, हिंदू वोटर: 18% । उधर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कह चुके हैं कि प बंगाल में में जिन जिन लोगों का वोटर लिस्ट में नाम नहीं है उनको मुफ्त अनाज देना बंद कर दिया गया है। अब ड्राईविंग लाईसेंस और अन्य दस्तावेज कैंसल कराए जाएंगे। आसाम में 33 मुस्लिम बहुल सीटों का परिसिमन करके 12 सीटें कम कर दी गई है, अब 21 सीटों पर ही मुस्लिम निर्णायक स्थिति में है।
पैटर्न वही है। यह सब करके सरकार बनाई जाएगी, कहीं सर कलम किया जाएगा, कहीं माबलिंचिंग होगी, कहीं मुख्यमंत्री तक हिजाब खींचेंगे तो कहीं दंगे के नाम पर मारे जाएंगे। और नेता चुप रहेंगे, हज़ारों करोड़ का मज़ा लेंगे। सोकाल्ड सेकुलर लोग कहेंगे आप जाति पर बहुत लिखते हैं। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले और आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो वायरल हो रहा है। इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन तोड़ लिया है। अब इस पर हुमायूं कबीर की प्रतिक्रिया सामने आई है।
वायरल वीडियो को लेकर अजुप प्रमुख हुमायूं कबीर ने कहा कि मैं बॉबी हकीम (फिरहाद हकीम) को चुनौती देता हूं कि वीडियो में दिख रहे उस व्यक्ति को सामने लाएं, जिसके साथ मैं बैठकर पैसे के बारे में बात कर रहा हूं। मेरा किसी से कोई लेन-देन नहीं है। उन्होंने कहा कि एआई के जरिए वो वीडियो बनाया गया है। हुमायूं कबीर की एक कथित वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें वे बीजेपी नेताओं के साथ 1000 करोड़ की डील पर चर्चा कर रहे हैं। इसके बाद वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया। टीएमसी ने वीडियो शेयर कर इसकी जांच की मांग की है। हुगली से तृणमूल उम्मीदवार अरिंदम गुइन ने कहा कि इन लोगों को पहले से पता था कि पैसा कहां से आ रहा है और कौन दे रहा है? हुमायूं कबीर का इरादा सबको पता था। उनका काम भाजपा से साठगांठ करके मुस्लिम वोटों को बांटना है। हुमायूं कबीर से बड़ा कोई गद्दार नहीं है।
बता दें कि बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद ओवैसी ने गठबंधन तोड़ लिया। अब बंगाल में ओवैसी की पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। ओवैसी के पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि हम किसी भी ऐसे बयान के साथ नहीं जुड़ सकते जिसमें मुसलमानों की अखंडता पर सवाल उठे। यह कोई छिपा हुआ सच नहीं है कि जब टीएमसी ने हुमायूं कबीर को उसकी साम्प्रदायिक हरकतों के कारण पार्टी से बेदखल किया, तो भाजपा ने उसे अपनी गोदी में बिठा लिया। आरोप है कि उसे ₹200 करोड़ देकर खरीदा गया। बंगाल में मस्जिद की नींव रखी जा रही थी, तब भाजपा के राज्यपाल और प्रशासन ने उसे रोकने के बजाय भारी पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई। और बेशर्मी की हद देखिए, आज उसी शख्स को ‘वाय प्लस ‘ की सुरक्षा देकर सनातनी टैक्सपेयर्स के पैसों पर पाला जा रहा है।
क्या यही है भाजपा की हिंदू नीति? आतंक का पोषण और हिंदुओं में डर का माहौल से लोग अचंभित है। भाजपा आज देश के लिए एक ऐसा कैंसर बन गई है जो सत्ता में लंबे समय तक बने रहने के लिए आतंकवादियों को पाल रही है, उन्हें पोषण दे रही है और आर्थिक रूप से मजबूत कर रही है। सूत्रों के अनुसार टीएमसी ने बंगलादेशी मुसलमानों का सिर्फ वोट लिया, उन्हें कभी आरक्षण देकर आगे नहीं बढ़ने दिया। लेकिन भाजपा उन्हें वहां हुमायू जैसों कि सहायता से इतना मजबूत कर रही है कि वे सनातनी समाज के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा बन जायेंगे।

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी
