तेल खाना कम करें पर तेल लगाना और तेल जलाना जारी रखें ! मोदीजी का जन्मदिन था पिछले दिनों तो उस दिन कई बार घर के बाहर झाँकने गया पर एक भी दिया गांव में न जलता देख घोर अनर्थ की आशंका से सहमकर रह गया। मेरे गाँव मे अस्सी घर पर मोदीजी वाले जागरूकता की भारी कमी तो मान ले जिलाध्यक्ष से लेकर बूथ अध्य्क्ष तक सवर्ण आक्रोश से कमरे में दुबक गए । हे प्रभु कहाँ जा रहा है हमारा समाज। दरअसल, सोशल मीडिया पर समर्थन का ट्रेंड महीनों से बंद है। तो दीप के सहारे ट्रेंड कराने की सोची गई होगी नितिन नबीन द्वारा पर जिस पार्टी को सीचा सवर्णों ने उस पार्टी ने अमीर पिछड़ो और अमीर दलितों का गुणगान शुरू कर दिया तो मामला खिसकना ही था, अच्छा है, हजारों सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के खाते में हरियाली आई। लेकिन पॉपुलर ओपिनियन में इस आशीर्वाद का दिया कार्यक्रम की भद्द पीट गई…आखिर जाति ने असली रंग दिखा ही दिया, भाजपा के दलित और पिछड़े सांसद विधायक, सवर्ण और आदिवासियों के वोटों से जीतेंगे और बात करेंगे दलित आरक्षण की, जनता सब देख रही है। पटकनी तो देगी। भाजपा के दलित पिछड़ा आदिवासी सांसदों को शर्म आनी चाहिए उन्हें चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए या फिर राजनीति से सन्यास ले ले नहीं तो इतना इनके घरों पर आकर सवर्ण समाज सवाल पूछेगी तो कही के नहीं रहेंगे। मैं फिर कह रहा साथियों, भाजपा और कांग्रेस सिर्फ धोखा है असल में जनहित की लड़ाई केवल योगी जी अकेले लड़ रहें है। योगी जी को हर बार बार मौका दो। केंद्र वाली भाजपा लुटेरी है, यूपीआई हो या यूजीसी, एससीएसटी एक्ट हो या जीएसटी आखिर पैसा तो सवर्ण के टैक्स और जनता से ही वसूले जाएंगे… बेचारी जनता ! दिस वे ऑर दैट वे, दे हैव टू पे ऑन यूपीआई देश जो धधक रहा है, युवाओं का गुस्सा जो चरम पर है, उसे शांत किया जा सकता था, बहुत छोटा काम था संबंधित मंत्री चिराग पासवान और रामदास अठावले का इस्तीफा ले लेते तो मोदी जी और सरकार के प्रति सवर्ण युवाओं का भरोसा और मजबूत होता, उन्हें लगता की सरकार उनकी सुन रही है लेकिन अब तो चिराग और अठावले के साथ साथ मोदी जी और अमित शाह भी विलन की कटेगरी मे आ गए है।
आखिर इतना छोटा सा काम मोदी जी क्यों नहीँ कर पा रहे है ? उसके कई कारण है, धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी और आरएसएस के लिए कोई साधारण नहीँ बहुत असाधारण नेता है जब उनका बलिदान हो सकता है तो चिराग और अठावले किस खेत की मूली है ! मोदी जी जो आरएसएस बैकग्राउंड से आते है, आरएसएस की दशकों पुराने सपने ” भारत को शैक्षिक और सांस्कृतिक रूप से गुजराती सुप्रीमसी के अधीन लाने ” के सपने को पूरा कर रहे है, धर्मेंद्र प्रधान वही व्यक्ति थे जो स्कूली किताबों मे राजपूत काल को समेटकर मराठा काल को पूरी तरह से थोपे है, धर्मेंद्र प्रधान ही वो व्यक्ति जिनके कार्यकाल मे राजपूताना ( राजस्थान ) को मराठा सम्राज्य के अन्तर्गत दिखाया गया था, आरएसएस का सबसे खास सपना धर्मेंद्र प्रधान ही पूरा कर रहे थे। सबसे बड़ी बात, मोदी सरकार मे एक से बढ़कर एक भ्रष्ट नाकाबिल लोग मंत्री बने हुए है, एक और के इस्तीफा देने का मतलब है ताश की पत्तों की तरह बिखर जाने का डर, क्यूंकि जनता फिर हर बार भ्रस्ट नेताओं के इस्तिफे के लिए धरने पर बैठ जाएगी और फिर इस सरकार की जो छवि बनाई गई है वो धडाम हो जाएगी।
खैर जो भी हो, इस बार बहुत बड़ा बलंडर हो गया है मोदी शाह से, इसका असर कुछ साल मे दिखेगा। ब्राह्मणों की मौत, ठाकुरों की पिटाई! ब्राह्मण और राजपूत के लिए अब ये देश और उत्तर प्रदेश सुरक्षित नहीं! यूपी में ब्राह्मणों की हत्याओं पर परशुराम सेना संघ भारत का सीएम योगी से सवाल, गोरखपुर में कार्तिकेय मिश्रा के क़त्ल पर बिफरी।कड़वा सत्य। भाजपा एक राष्ट्रवादी राजनैतिक पार्टी है ! मोदी जी एक राष्ट्रवादी राजनेता है ! देश के लिए कुछ अच्छा करना है तो सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ बने रहना आवश्यक है, तभी 370 जैसे ऐतिहासिक निर्णय हो सकते हैं! इसके लिए इन्हें देश के नफा नुकसान के साथ-साथ अपनी राजनैतिक पार्टी का नफा नुकसान भी देखना है ! अब देश में वोटरों के कई वर्ग है, लेकिन सबसे कृतघ्न वोटर वर्ग सवर्ण है! ये वो कालिदास हैं जो उसी डाल को काटना चाहते हैं जिसकी छांव में दिन रात सोशल मीडिया पर इन्हें भौंकने की आजादी मिली है! यह वर्ग हर दिन किसी न किसी मुद्दे को लेकर सरकार से क्रोधित रहता है ! सवर्णों की कृतघ्नता के कारण भाजपा ने इन्हें फ्लोटिंग वोट बैंक में डाल दिया है! क्योंकि नालबंद की सवर्ण कील युद्ध के मैदान में कब, किस बात पर धोखा दे देगी इसका अंदाजा है, क्योंकि ये वो वर्ग है जो आलू प्याज के दाम बढ़ने पर अटल जी को हटा देता है, यही वो वर्ग है जो भव्य राम मंदिर बनवाने के बाद अयोध्या हरा देता है, यही वो वर्ग है जो देश में इतना सब विकास करने के बाद 303 से 240 पर ले आता है! और इसीलिए सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा को अपना वोट प्रतिशत बढ़ाना होगा ! अब भाजपा अगर दलित शोषित पीड़ित वंचित वोट बैंक को साध रही है तो इन जातिवादी सवर्णों को बहुत चुभ रहा है!
आज अगर भाजपा की राजनीति में जातिवाद दिखाई दे रहा है तो इसका कारण भी सवर्णों की अहंकारी प्रवत्ती और मूर्खता ही है ! आज इन सवर्णों को दलित नेता रंगा सियार अपना शुभचिंतक लग रहा है ! एक दलित नेता कहता है हम 30% है अपनी अलग पार्टी बनाएंगे, अपनी सरकार बनाएंगे ? अबे 30% में 10% तो वोट देने नहीं जाते, 10% कॉंग्रेस, समाजवादी विपक्ष के साथ है अब बचे 10% जो भाजपा के साथ थे, और मान लेते हैं कि तुम्हारी रंगी सियार छवि से आकर्षित होकर 9% बसपा से नाराज हो गए क्योंकि उदित राज जैसे 1% तो किसी भी परिस्थिति में भाजपा के साथ नही रहेंगे. अब 9% में तुम सरकार तो छोड़ो अपना एक विधायक नहीं बना सकते, सिवाय भावुक सवर्णों को उल्लू बनाकर, दलितों के चंदा इकट्ठा करके उसको डकारने के। लेकिन इस वर्ग में भी दो प्रकार के सवर्ण हैं- एक वो जो सत्ता (भाजपा) के साथ हैं या होने का दिखावा करते हैं और दूसरे वो जो विपक्षी दलो की गुलामी करते हैं ! जो विपक्षी सवर्ण हैं उन्हें न तो आरक्षण से समस्या है, न यूजीसी से और न ही राजीव गांधी ऐक्ट से बल्कि इन्होंने तो 60 साल तक कॉंग्रेस के साथ मिलकर देश की लगभग सभी समस्याओं की डिलेवरी करवायी है! चाहे वो आरक्षण हो, राजीव गांधी ऐक्ट हो, इतिहास से छेड़छाड़ हो या जेएन्यु में लगने वाले आपत्तिजनक नारे हो, इन सबके केंद्र में आप एक सवर्ण ही पाएंगे! मैं सवर्ण जरूर हूं लेकिन उल्लू नहीं हूं इसलिए वोट तो हर हाल में योगी को ही दूंगा , क्योंकि भाजपा मुझे व्यक्तिगत कुछ दे या न दे लेकिन मेरे प्रदेश को विकास, आर्थिक प्रगति, नई ऊंचाई अवश्य दे रही है ! एक राष्ट्रवादी होने के नाते इतना ही मेरे लिए पर्याप्त है!
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिविल लाइंस क्षेत्र में क्षत्रिय युवा करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव की भीड़ द्वारा बेरहमी से पिटाई करने का मामला सामने आया
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के अमांपुर क्षेत्र के आनंदपुर गांव में एक ही मामले में 37 नामजद और 1 अज्ञात समेत 38 लोगों पर एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है जो सवर्णों पर अन्याय का एकमात्र उदाहरण नहीं और भी है। मोदी सरकार के खिलाफ सवर्णों का शंखनाद, एस्ट्रोसिटी एक्ट पर होगा गृह युद्ध अगर यह एक्ट वापिस नहीं होता है तो, केवल व केवल गृहयुद्ध ही सवर्णों के पास विकल्प है। सवर्ण समाज ,मोदी सरकार के खिलाफ एस्ट्रोसिटी एक्ट का इतना विरोध करेगा की भाजपा को एक्ट खत्म करना ही पड़ेगा, नही तो सवर्ण समाज बीजेपी सरकार को खत्म कर देगा, ये तय मानो। यही सही समय है सभी सवर्ण एकजुट होकर अपने अधिकार और न्याय की बात मजबूती से रखें। आखिरी बात दवेन्द्र फड़नवीस, योगी आदित्यनाथ, हेमंत विश्वशर्मा, इन तीनो को चिराग पासवान और अठावल्ले का शुक्रिया करना चाहिए क्यूंकि सिंगल हैंडेड एक व्यक्ति ने अपने साथ साथ मोदी जी और अमित शाह की भविष्य की राजनीति का बैंड बजा दिया।

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी
