अमेरिका की सत्ता में दोबारा वापसी करने वाले डोनाल्ड ट्रम्प ने 104 भारतीयों को अवैध प्रवासी कहकर एक सैन्य जहाज में भरकर भारत लौटा दिया है । लौटाने के तरीके पर कांग्रेस आक्रामक है जबकि उन अवैध अप्रवासी भारतीयों को अपराधियों की तरह हाथ-पांवों में हथकड़ी-बेड़ियां डालकर तथा उनकी कमर को जंजीरों से जकड़ कर लाया गया जिसपर विश्व मानवाधिकार और तमाम संगठन चुप्पी साधे रहे तो अब भारत के पास भी मौका है कि वह अपने यहां से गैर हिंदुओ को जो अवैध रूप से नकली कागज बनवाकर कई वर्षो से यही खा रहे, धरना दे रहे, पत्थरबाजी कर रहे और राशन उठा रहे उन्हे देश से खदेड़ बाहर करे। आपको बता दूं कि 17 ग्लोबमास्टर नामक सैन्य हवाई जहाज बुधवार को अमृतसर एयरपोर्ट पर 104 अवैध अप्रवासी भारतीयों को लेकर अमीरिकी विमान उतरा, उसमें से उतरने वालों के मन में गहरा दर्द साफ़ दिख रहा था, पूरा देश इसे लेकर आग बबूला है हालंकि उनका निर्वासन सही है किंतु मानवीय संवेदनाओं से परे कुछ भी नही होना चाहिए। अमेरिका ने यह घृणित कार्य किया है । इसका कूटनीतिक परिणाम कुछ भी नही किंतु राजनीतिक परिणाम बहुत गहरा होगा । प्रवासियों के निर्वसन का जो वीडियो सामने आया है वह अमेरिकी राजनीति के मजबूती का खुलासा करती है। हम यहां एससी एसटी एक्ट और अवैध आरक्षण तक नहीं हटा पा रहे वो वहा से मानव और मानवीय संवेदना तक हटा दे रहे और कोई कुछ बोल नहीं पा रहा । यहां विपक्ष भाजपा को कोस रहा जबकि उसे अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहिए। मानवीय संवेदनाओं का कत्ल करने वाले अमेरिका के करतूत से वे तमाम अवैध प्रवासी बेड़ियां पहने हुए हैं मुंह पर मास्क है और पैर बंधे हुए हैं।
एक दृष्टि से ये व्यवहार उचित प्रतीत होता है क्योंकि आखिरकार वे अपराधी तो हैं ही। भारत सरकार को भी नियमानुसार भारत से अवैध तौर पर भागने पर ऐसी ही कार्रवाई करनी चाहिए पर यहां भारत में रोहिंग्या और गैर हिंदुओं के साथ ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि संविधान की दुहाई और राजनीति के आड़ में घर के ही भेदी लंका ढहा देंगे । यहां अफजाल मुख्तार ओवैसी जैसे कट्टर नेता और उनका साथ देने वाले अखिलेश, राहुल, केजरीवाल ममता जैसे हिन्दू नेता भी है जो अपराधी का सम्मान करते रहे है । समस्या ये है कि अभी सिर्फ 104 आए हैं जबकि पूरे देश भर में 18000 भेजें जाने की प्रतीक्षा सूची में हैं उसमें से कुछ और अभी शीघ्र भारत भेजे जाएंगे। प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में अमेरिका में करीब 7,25,000 भारतीय अवैध प्रवासियों के रूप में रह रहे थे, जो अमेरिका में तीसरी सबसे बड़ी ‘अनधिकृत प्रवासी’ आबादी का हिस्सा थे। कल्पना कीजिए कि यदि ये सब एक दो वर्षों में भारत भेज दिए जाते हैं तो इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना और कैसा असर पड़ेगा। तिब्बत, बांग्लादेश और रोहिंग्या शरणार्थियों से ये कई गुनी संख्या है ऐसे में अब रोहिंग्या और गैर हिन्दू जो अवैध है अब भारत को खाली करे या सरकार उन्हें इसी तरह डिपोर्ट कर दें । भारत के लिये यह पूरा वाकया इसलिये दुखद है क्योंकि सरकार ने अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर ऐसा कोई उपाय ढूंढने की कोशिश ही नहीं की कि अवैध प्रवासी ही सही, लेकिन उनकी सम्मानजनक वापसी हो। भारत सरकार के पास पर्याप्त समय था। भारत ने इसके पहले युद्ध या अन्य परिस्थितियों में अलग-अलग देशों में फंसे भारतीयों को निकाला है। यह माना जा सकता है कि यह विशिष्ट स्थिति है, लेकिन अब कम से कम बचे लोगों की सम्मानपूर्वक वापसी कराई जायेभारत में अभी इन पर गर्मागर्म बहस चल रही है। क्या भारत भी ऐसी कोई नीति बनाएगा ? यह सवाल चर्चा बनने वाला है। इतना तो तय है अमेरिका से वापस आए लोग देश के लिए नई मुसीबत बनेंगे । एक बात सच है देश में मोदी सरकार आने के बाद से पिछले कुछ वर्षों में नागरिकता छोड़ने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।
सोशल साइट्स के अनुसार साल 2021 में 1.63 लाख का यह आंकड़ा 2022 में 2.25 लाख तक पहुंच गया। गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा को बताया कि मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपनी भारतीय नागरिकता त्यागने वाले भारतीयों की संख्या 2015 में 1,31,489; 2016 में 1,41,603; 2017 में 1,33,049; 2018 में 1,34,561; 2019 में 1,44,017; 2020 में 85,256; 2021 में 1,63,370 और 2022 में 2,25,620 रही । इसके अलावा यह आंकड़ा 2011 में 1,22,819; 2012 में 1,20,923; 2013 में 1,31,405; 2014 में 1,29,328 था। यानि भारत से बड़ी तादाद में प्रतिभा पलायन भी हुआ है जिसमें सर्वाधिक प्रवाह अमेरिका के लिए,दूसरा कनाडा और तीसरा आस्ट्रेलिया के लिए हुआ है। ट्रम्प मोदी की दोस्ती ने युवाओं को अवैध प्रवास हेतु निश्चित तौर पर प्रोत्साहित किया है।अब यह अवैध प्रवास और प्रतिभा पलायन भारत की दुर्दशा को अभिव्यक्त करता है।अमरीका से आती खेपों का देखना है भारत सरकार कैसा स्वागत करती है उन्हें भारत में रोज़गार मिल जाए तो बात बन जाए। क्योंकि इनमें बहुतायत ऐसे युवाओं की है जिन्होंने अमेरिका में हाऊडी मोदी इवेंट को खूबसूरती दी थी और डोनाल्ड ट्रम्प को पहली दफा राष्ट्रपति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। ट्रम्प भले उनका अवदान विस्मृत कर दें । यह पहली खेप है। अमेरिका ने लगभग 18 हज़ार अवैध प्रवासियों की शिनाख्त कर ली है। भारत सरकार की सहमति से उन्हें भेजा गया है, जो और भी चर्चित है। यानी अभी इसी तरीके से और भी कई जहाज देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर उतरेंगे। इस जहाज को अमृतसर इस कारण से उतारा गया था क्योंकि इस खेप में ज्यादातर वे लोग हैं जो पंजाब और गुजरात से हैं। हालांकि जिन ऐसे अवैध प्रवासियों को निकाला जाना है उनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली आदि के ज़्यादा बताये जाते हैं।
ट्रेवल एजेंटों को भारी-भरकम राशि देकर बगैर वैध दस्तावेजों के ये लोग अमेरिका में रह रहे थे। कई लोग कनाडा होकर अमेरिकी सीमा को पार करते हुए बेहतर जीवन-यापन की तलाश में उस विकसित देश में पहुंचे थे। 2024 में जब अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव हुआ था तो ट्रम्प ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत ट्रम्प ने ऐलान किया था कि वे अगर जीते तो सभी अवैध प्रवासी खदेड़ दिये जायेंगे। उन्होंने इसके लिये अपने देश को यह कहकर तैयार किया कि अवैध प्रवासियों के कारण अमेरिकियों के लिये अवसर और संसाधन पूरे नहीं पड़ते हैं। इस मुद्दे पर उन्हें समर्थन भी मिला था। इसके तहत उन्होंने अपना वायदा पूरा किया। भारत के अलावा ग्वाटेमाला, होंडुरास, पेरू तथा इक्वाडोर के प्रवासियों को अमेरिका डिपोर्ट कर चुका है। ये बहुत छोटे देश हैं लेकिन कोलंबिया और मैक्सिको ने न सिर्फ रीढ़ की हड्डी दिखलाई बल्कि अपने नागरिकों के सम्मान की रक्षा भी की। उन्होंने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई अड्डों पर उतरने की अनुमति नहीं दी। बाद में मैक्सिको ने अमेरिका की सीमा से अपने नागरिकों को वापस लिया तथा कोलंबिया ने अपने जहाज भेजकर उनकी सम्मानजनक स्वदेश वापसी कराई। यह कहकर उन्हें लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता कि ‘वे अवैध रूप से गये थे’ या ‘क्या वे सरकार को बता कर गये थे ? भारत को अमेरिकी सरकार से इस बाबत कड़ाई से बात करनी चाहिये क्योंकि बेड़ी-हथकड़ियों में नागरिकों का लाया जाना किसी भी देश के ही लिये नहीं वरन समस्त मानवता के लिये एक कलंक है।

पंकज सीबी मिश्रा/राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार, जौनपुर यूपी
