यूपी के संभल की जामा मस्जिद से जुड़ी कंट्रोवर्सी पर जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने बड़ा बयान दिया है. मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि यूपी में गड़े मुर्दे उखाड़ने से देश की धर्मनिरपेक्ष बुनियादें हिल रही हैं. अब मदनी के बयान पर लोग इसलिए सवाल उठ रहे हैं क्योंकि सर्वे का काम कोर्ट के आदेश पर शुरू किया गया था, जो आगे भी जारी रहेगा. सर्वेक्षण के पहले दिन एडवोकेट कमीशन की टीम ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की. वहीं इस एक्शन से भड़के अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के मौजूद सांसद जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि ये मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी.
शाही जामा मस्जिद पर हिंदुओं ने दावा किया है. हिंदू पक्ष ने मस्जिद को प्राचीन श्रीहरिहर मंदिर बताया. दावा है कि मंदिर को बाबर ने मस्जिद बना दिया. मस्जिद के अंदर मंदिर के सबूत भी होने का दावा किया. इसके बाद हिंदू पक्ष की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. कोर्ट से आदेश दिया गया कि एक दिन में सर्वे पूरा हो और 7 दिन के अंदर कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट जमा की जाए. ये याचिका कैलादेवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी ने दायर की थी. हिंदू पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन मामले के वकील हैं. इस स्पीडी ट्रायल को लेकर ओवैसी के होश उड़ गए हैं.
संभल जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली का दावा है कि ये मस्जिद थी. जबकि हिंदू पक्ष का दावा है कि ये मंदिर है.
आपको बताते चलें कि शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे पर मौलाना और मुस्लिम समुदाय के लोग भड़के हुए है.
