कविता
उफ यह गर्मी इसमें तो स्वभाव में भी नहीं है नर्मी
हमारे देश में हर वर्ष बहुत गर्मी पड़ती है
तभी तो प्रतिवर्ष सूख जाती है फसलें
ऐसे में तो भुखमरी भी पड़ सकती है।
वर्षा न होने पर धरातल पर ही हो गई है पानी की कमी खत्म हो गई है खेतों की उर्वरा शक्ति
सूखे से खत्म हो गई है खेतों की नमी।
गर्मी में नलों कुओ और तालाब का पानी भी सूख गया है इंसान प्रदूषण युक्त पानी को पीने को मजबूर हो गया है प्रदूषण युक्त पानी पीने से शरीर को नुकसान हो सकता है लेकिन करें भी तो क्या पानी पिए बिना इंसान जीवित नहीं रह सकता है।
गर्मी में फ्रिज एसी पंखे का है हम प्रयोग करते
तभी तो मरीज बनकर हम अस्पताल को हैं पलायन करते।
सूख गई हैं आलू ,मटर,सब्जी,फल और गेहूं की फसलें
मेहनत करते करते अन्नदाता(किसान) ने सुखा दिए है अपने मसले।
हिमाचल की वादियों में गर्मी के मौसम में फल फूल सजे होते हैं।
इन मीठे फलों का रसवादन करने के अलग मजे होते हैं।
लेकिन गर्मी ने यहाँ भी सारे रिकार्ड तोड दिए
बारिश न होने से बढ़ती गर्मी ने किसानों-बागबानो के सपने धुला दिए।
ये हैं बढ़ती गर्मी के मौसम की कुछ बातें
इसमें मक्खी मच्छर और कीड़े मकोड़े हैं सभी हैं खाते। हर वर्ग अपना ध्यान रखे हम खत्म खत्म करते हैं अपनी बाते।
अगर बढ़ती गर्मी से इस धरा और जन जीवन को बचाना है
तो हमें रचनात्मक काम कर हर हाल में पर्यावरण को बचाना है।
