प्रिय मोदी जी मुफ्त का राशन और फजूल का आरक्षण बांट कर आपने मेहनत और मजदूरी वाले हाथो को कमजोर कर दिया है । लोग अब काम नही करना चाहते और मुफ्त का खाने की आदत बना कर घर बैठ रहे क्युकी राशन मिलता ही है । अब इसका परिणाम यह हो रहा की किसान के यहां उपज कम हो रही और वो सरकार को गेंहू बेच ही नहीं रहे । मजदूर और कामगार ना मिलने से लोग किसानी छोड़ रहे जिसका सीधा असर अर्थव्यस्था और टैक्स पेयर पर पड़ रहा । लोगो को मुफ्त बांटना अच्छी बात नही । एक बार पुनः गैस का दाम बढ़ा कर आपने महंगाई को आसमान पर पहुंचा दिया । हर सरकारी उपक्रम प्राइवेट करने की पहली झलक देश को अंधेरे में डूबो गई ।सरकारी कोयला खदान का निजीकरण करने का पहला रिजल्ट आ गया बिजली कटौती के रूप में । बेहद दुखद है की कुछ कांग्रेसी देश के सबसे बड़े कोयला सप्लायर बन गए और देश के तमाम राज्यों को कोयला देना बंद कर दिया कृत्रिम अभाव पैदा कर मोटी कीमत वसूलने के लिए कमर कस ली है । अब इसमें फर्जी सेक्युलर भी कुछ नही कर सकते । एक तो फर्जी रोहिंग्याओं के ही गोद में सेक्युलर बैठे है । अडानी को बदनाम करके वो भाजपा को बदनाम कर रहे । दूसरा खुद के ही कर्म से निजीकरण हुआ था ,आगे और भी गहरा संकट आने वाला है । देश का 85% खाद्य तेल का सप्लायर भी यही कांग्रेसी है जो पाम ऑयल क्षेत्र में एक छत्र राज कर रहे है जब चाहे कृत्रिम अभाव पैदा कर मनमानी रेट वसूल लेते है । इसी तरह देश के हर कोने में वामपंथी के कार्यालय और सेक्युलर के कोल्ड स्टोरेज और दारू का ठेका मिल जाएगा । अब सेक्यूलरों का किसान गैंग देश में सम्पूर्ण अनाज खरीद रहा है ताकि रोटी भी राहुल गांधी से पूछ कर ही खाने को मिले । फोकट के 10 किलो अनाज खाने वालों आपको भी एक दिन फोकट में ही भूखे रह कर मरना होगा । बुरे कर्मो का नतीजा भी यहीं भुगत कर जाना होगा । इस वर्ष देश का 95% अनाज कांग्रेसी किसानों व अन्य प्राइवेट प्लेयर ने खरीदे है ।भारत सरकार मात्र 4% अनाज ही एमएसपी पर खरीद पाई है ।पिछले 2 साल में युगपुरुष ने अपने पूर्वज का जमा किया सारा अनाज फ्री की स्कीम में बांट दिया ।देश के सरकारी गोदामों में पिछले 10 साल से जो स्टॉक जमा था उसका 80% बांट दिया गया अब मात्र 3 माह का अनाज ही सरकारी गोदामों में बचा है और इस साल की खरीद को और जोड़ दे तो साल भर का ही स्टॉक शेष बचा है ।अर्थात 2024 के बाद देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था प्राइवेट हाथों में चली जाएगी और सरकार के पास एक दाना भी अपने खजाने में नही बचेगा ।देश का कोयला सीमेंट लोहा इस्पात खाद्य पदार्थ तेल चीनी मिलें चाय बागान दूध पानी रेल हवाई जहाज बंदरगाह एयरपोर्ट सड़क बैंक एलआईसी बिजली इंटरनेट पेट्रोलियम ,सब कुछ प्राइवेट हाथों में होंगे ।फिर बिजली फ्री तो क्या दाम चूका कर भी मिलना मुश्किल है हवाई चप्पल पहनने वाले हवाई सफर तो क्या रोड पर भी नही चल पाएंगे फोकट में राशन तो क्या हवा भी नही मिलेगी । फ्री राशन फ्री स्कूल फ्री मेडिकल सुविधा फ्री बिजली फ्री नरेगा फ्री यात्रा फ्री मोबाइल फ्री का चस्का फ्री मौत भी तो आयेगी ।बीयर बार में पहुंची राजनीति ! मन कहता है की कांग्रेस की राजनीति अब बियर बार में पहुंच रही । वैसे अब जो स्थिति बनी है उसमें अमर खुश है, अकबर खुश है और एंथनी भी खुश है। भाजपा प्रसन्न है, कांग्रेस प्रसन्न है और आम आदमी पार्टी भी प्रसन्न है दुखी तो केवल ऐसे वामपंथी सोशल मीडिया ग्रुप के चमन चू लोग हैं। कुल मिलाकर भाजपा चार राज्यों में चुनाव जीतकर खुश है तो कांग्रेस प्रदेश में चार उप-चुनाव जीतकर खुश है। ‘आप’ पंजाब में जीत का परचम लहरा कर प्रसन्न है। सब सोच रहे होंगे कि पहाड़ अब उनकी मुट्ठी में है। कम्बख़्त सब मुंगेरी लाल हो गए हैं और हसीन सपने देख रहे हैं। राहुल गांधी बीयर बार में जाकर खुश है । योगी आदित्यनाथ बुलडोजर चलाकर खुश है । मोदी जी पुतिन और बाइडेन को समझाकर खुश है । कांग्रेस अध्यक्ष ना चुनकर खुश है । राहुल तेवतिया गुजरात को मैच जितवाकर खुश है पर सेक्युलर ढोंगी और सोशल मीडिया के जन विचार संवाद व बेबाक आवाज के कुत्ते राजनीति की बोटियां नोचकर भी नाखुश है । जेएनयू में यही सेक्युलर वामपंथ के नाम पर धंधा कर रहे वो भी दुखी है तो भाई इनका इलाज आखिर है क्या ? बेशक चार राज्यों में भाजपा को शानदार विजय हासिल हुई है लेकिन इससे इनपर कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा बेशक हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं लेकिन इससे भी इन्हे कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला है। वे कहते है, नड्डा समूचे प्रदेश में इतने लोकप्रिय नहीं हैं कि चुनावों में कोई फ़र्क पड़ जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिमाचल के मंडी की सेपुबड़ी और बदाना खा लेने से भी कोई अंतर पड़ने वाला नहीं है। फ़र्क मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की साढ़े चार-पांच वर्ष की कारगुजारी से पड़ेगा। लेकिन उनकी कारगुजारी ज्यादा अच्छी नहीं कही जा सकती। शुरुआत में अनुभवहीनता ने मारा, कुछ कम्बख़्त कोरोना मार गया। बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई। उन्हें “एक्सीडेंटल मुख्यमंत्री” कहा जाता है। हैं भी। मुख्यमंत्री के चेहरा प्रेम कुमार धूमल यदि 2017 में चुनाव जीत गए होते तो जय राम ठाकुर की ‘बल्ले बल्ले’ न हो पाती। महेश्वर सिंह, रविन्द्र ठाकुर रवि, सतपाल सत्ती, गुलाब सिंह ठाकुर और रणधीर शर्मा जैसे भाजपा दिग्गज चुनाव न हारते, तब भी जय राम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनने के लिए लोहे के चने चबाने पड़ते। भाग्य के खेल बहुत निराले हैं। आख़िरकार वे भाग्य की कबड्डी जीतकर मुख्यमंत्री बन गए। बहरहाल, मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन साल भर यह विश्वास करने में निकल गया कि वे वास्तव में ही मुख्यमंत्री हो गए हैं। वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल में बंटी ‘ब्यूरोक्रेसी’ पहली साल उन्हें पचा नहीं पाई और इसी उधेड़बुन में एक वर्ष निकल लिया। 2019 में अभी “दण्ड” पेल ही रहे थे कि कोरोना वायरस पहुंच गया। करीब दो वर्ष कोरोना वायरस दुबले-पतले विकास के रास्ते का रोड़ा बना रहा। चौथे और पांचवें साल विकास और लोक लुभावने फैसलों की लंगड़ी गाड़ी पटरी पर चढ़ सकी। अकेले विकास के नाम पर वोट नहीं मिलता। विकास निरन्तर चलते रहने वाली प्रक्रिया है। लोग यह जानते हैं। पांचवीं साल में कुछ अच्छे कदम जय राम सरकार ने उठाये हैं। एक यह कि कर्मचारियों को काफी वित्तीय फायदे पहुंचाए। लेकिन कुछ देर बाद दूध देने के साथ-साथ यह कहकर “मिंगणा” भी डाल दी कि यदि कर्मचारियों को पेंशन चाहिए तो वे चुनाव लड़ें और जीतें। नतीजतन कर्मचारियों का एक वर्ग नाराज हो गया है। धर्मशाला में हजारों आंदोलनकारियों के सामने खड़े होकर मुख्यमंत्री ने ‘सवर्ण आयोग’ के गठन की मांग स्वीकार की लेकिन शिमला के आंदोलन के बाद सवर्ण नेताओं को जेल भेज दिया। इस कृत्य से सन्देश यह गया कि सरकार ने न केवल वादा खिलाफी की, बल्कि उसका रवैया सवर्ण विरोधी है। अंतिम समय में कुछ सरकारी नौकरियों भी निकाली गई हैं लेकिन अब तो इसे ऊंट के मुंह में जीरा ही कहा जायेगा। चार को नौकरियाँ लगेंगी, चार हजार दुश्मन हो जाएंगे। अंतिम समय में ऐसा ही होता है। विकास को लेकर पहले कह रहे थे कि बहुत हुआ, लेकिन अब कहने लगे हैं कि काम के लिए तो महज दो वर्ष ही सरकार को मिले हैं। बाकी समय तो कोरोना निगल गया। ऊपर से सत्ता विरोधी माहौल भी मुंह बाए खड़ा है।

पंकज कुमार मिश्रा एडिटोरियल कॉलमिस्ट शिक्षक एवं पत्रकार केराकत जौनपुर