पश्चिम बंगाल में संतों के अपमान पर घमासान छिड़ा हुआ है। इसके खिलाफ विरोध जताने के लिए साधु संत सड़कों पर उतर चुके हैं। साधु संत सीएम ममता बनर्जी की टिप्पणी का विरोध कर रहे हैं। बंगाल की सड़कों पर संतों का हुजूम उतरा। संत स्वाभिमान यात्रा को विश्व हिंदू परिषद का समर्थन हासिल है। दरअसल, 28 मई को जलपाईगुड़ी में रामकृष्ण मिशन के आश्रम पर हमला हुआ था। आरोप है कि बंदूक की नोक पर संतों और कर्मचारियों से मारपीट हुई थी। रामकृष्ण मिशन ने इसके पीछे स्थानीय भू-माफियाओं का हाथ बताया और पुलिस से इसकी शिकायत की थी। इसे लेकर बीजेपी ने ममता सरकार को घेरा तो ममता ने आरोप लगा दिया कि प्रभावशाली मठों के कुछ संत बीजेपी के असर में हैं। उन्होंने ये भी आरोप मढ़ा कि रामकृष्ण मिशन और भारत सेवा आश्रम के कुछ सदस्य दिल्ली के निर्देश पर काम करते हैं। इस पर रामकृष्ण मिशन ने बयान जारी करते हुए ममता के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि हम हमेशा राजनीति से दूर रहे हैं।
सेवाश्रम को लेकर मोदी-ममता में जुबानी जंग
धार्मिक नेता श्री रामकृष्ण की पत्नी सारदा देवी का जन्मस्थान जयरामबाती शहर में एक रैली में बोलते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारत सेवाश्रम संघ और रामकृष्ण मिशन के कुछ सदस्य बीजेपी नेतृत्व के इशारे पर काम कर रहे हैं। बरहामपुर में एक महाराज हैं। मैं उनके बारे में काफी समय से सुन रही हूं। कार्तिक महाराज का कहना है कि वह पोल बूथ में किसी भी टीएमसी एजेंट को अनुमति नहीं देंगे। मैं उन्हें संत नहीं मानती क्योंकि वह सीधे तौर पर राजनीति में शामिल हैं और देश को बर्बाद कर रहे हैं। मैं भारत सेवाश्रम संघ का बहुत आदर करती थी। यह लंबे समय से मेरी सम्मानित संगठनों की सूची में है। रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ के कुछ भिक्षु दिल्ली में भाजपा नेताओं के प्रभाव में काम कर रहे हैं। जो लोग मंदिरों की देखभाल कर रहे हैं वे महान आध्यात्मिक कार्य कर रहे हैं, लेकिन हर कोई नहीं। हम भिक्षुओं का सम्मान करते हैं। बनर्जी के बयान के एक दिन बाद पीएम ने पुरुलिया में एक सार्वजनिक बैठक में जवाब दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की ममता सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री रामकृष्ण मिशन, भारत सेवा आश्रम और इस्कॉन के लोगों को खुलेआम धमकी दे रही है। वो सिर्फ अपने मदताताओं को खुश करने के लिए ऐसा कर रही है। जिस सरकार के मन में ऐसे धार्मिक संगठनों के प्रति कोई सम्मान नहीं है, उसे आपके वोटों के माध्यम से एक बड़ा सबक सिखाना है ताकि वह भविष्य में ऐसे संगठनों का अपमान करने की हिम्मत न कर सके।
मोदी के अटैक पर डिफेंसिव मोड में आई टीएमसी
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और उसकी सुप्रीमो ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई है। बनर्जी ने बयान देकर सफाई दी कि वह किसी संस्था के खिलाफ नहीं बोल रही हैं। मैंने बस कुछ व्यक्तियों के बारे में बात की। ऐसे ही एक व्यक्ति थे कार्तिक महाराज। मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मुझे जानकारी मिली है कि वह तृणमूल कांग्रेस के चुनाव एजेंटों को अनुमति नहीं देते है। वह धर्म की आड़ में भाजपा की ओर से काम करते हैं। उन्हें राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का पूरा अधिकार है। लेकिन उस स्थिति में, उन्हें भगवा वस्त्र के पीछे शरण लेने के बजाय सार्वजनिक रूप से कमल के प्रतीक को गले लगाना चाहिए।लेकिन ममता की सफाई से साधु संत संतृष्ट नहीं हुए और उन्होंने बंगाल सीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
