आपके मोबाइल नंबर पर अब आपका हक नहीं रह जाएगा? इसका अलग से चार्ज लिया जाएगा?

अगर आपको पता चले कि जिस मोबाइल नंबर से आप फटाफट अपने रिश्तेदारों को फोन घुमाते हैं उस पर आपका मालिकाना हक नहीं है तो आप चौंक जाएंगे। अगर आपसे मैं ये कहूं कि आपके खाना खाने से लेकर ट्रेन-बस में सफर करने तक के दौरान का साथी आपके मोबाइल में जो नंबर आप इस्तेमाल कर रहे हैं उसके पैसे आपको सरकार को देने पड़ेंगे तो आप कहेंगे भाई ये भला क्या बात हुई। हर महीने रिचार्ज के रूप में तो हम पैसे का भुगतान करते ही हैं। लेकिन जरा ठहरिए। अब जल्द ही आपको मोबाइल और लैंडलाइन नंबर के लिए पैसे देने पड़ सकते हैं। दरअसल, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मोबाइल और लैंडलाइन नंबरों के लिए शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें कहा गया है कि आपका फोन ऑपरेटर यानी फोन चलाने वाली कंपनी आपके स्मार्टफोन और लैंडलाइन नंबर के लिए चार्ज ले सकती है।

ट्राइ की तरफ से क्या कहा गया

6 जून, 2024 को जारी एक परामर्श पत्र में विस्तृत इस प्रस्ताव से पता चलता है कि मोबाइल ऑपरेटरों को इन नंबरों के लिए शुल्क का सामना करना पड़ सकता है, जिसे बाद में उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता है। ट्राई ने कहा है कि 5जी नेटवर्क, मशीन-टू-मशीन संचार और इंटरनेट ऑफ थिंग्स उपकरणों को व्यापक रूप से अपनाने सहित संचार प्रौद्योगिकियों में प्रगति के कारण मौजूदा नंबरिंग प्रणाली की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता हो गई है। ट्राई के अनुसार, शुल्क की शुरूआत का उद्देश्य इन ‘सीमित संसाधनों’ का कुशल आवंटन और उपयोग सुनिश्चित करना है।

किस तरह से लिया जा सकता है पैसा 

पैसा कभी कभी टेलीकॉम कंपनियों पर तो कभी सीधे फोन इस्तेमाल करने वालों पर भी लग सकता है। ट्राई की तरफ से चार्ज लगाने के तरीकों के बारे में बताया गया। ट्राई के अनुसार, सरकार मोबाइल कंपनियों से तीन तरीकों से शुल्क ले सकती है। पहला की हर एक फोन नंबर के लिए एक ही बार चार्ज ले लिया जाए। दूसरा ये हो सकता है कि हर साल टेलीकॉम कंपनियों को दिए गए सभी नंबरों पर लगने वाली फीस। तीसरा तरीका ये है कि कुछ खास और याद रखने में आसान नंबर के लिए सरकार ऑक्शन प्रोसेस रख सकती है।

स्पेक्ट्रम की तरह फोन नंबर की मालिक सरकार

ट्राई का कहना है कि स्पेक्ट्रम की तरह फोन नंबर की मालिक सरकार है। सरकार ही टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस के दौरान सिर्फ इन नंबरों का यूज करने का हक देती है। पिछले साल दिसंबर में पास हुए नए टेलीकॉम कानून में भी ऐसा ही प्रावधान है। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों से नंबरों के लिए एक तय चार्ज शुल्क जा सकता है। ट्राई का दस्तावेज़ इन तकनीकी प्रगति से प्रेरित भारत के दूरसंचार परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन को रेखांकित करता है। मार्च 2024 तक 1.19 अरब से अधिक टेलीफोन ग्राहकों और 85.69 प्रतिशत की टेली-घनत्व के साथ, नंबरिंग संसाधनों की मांग बढ़ गई है।प्रस्तावित नंबरिंग योजना का लक्ष्य ‘दूरसंचार पहचानकर्ता’ संसाधनों को आवंटित करने के लिए एक संरचित दृष्टिकोण, सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला और कुशल विस्तार का समर्थन करना है।

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