मामला फर्जी किन्तु वायरल पत्र असलियत के बेहद करीब  

पंकज सीबी मिश्रा, मिडिया विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 
जनपद जौनपुर  नें जब से घूस और भ्रष्टाचार के मामलों में लंबी छलांग लगाई है तब से जनपद में घूस और भ्रष्टाचार  के कई मामले वायरल हो रहें।  यूपी के सरकारी कार्यालयों, न्यायिक दफ़्तरों  और तहसीलों में घूस लेने का हल्ला मचता रहा है वही आरटीओ कार्यालयों के बाहर खुलेआम चलने वाले लूट  की कलई तो कई बार खुली है पर इस बार जिलाधिकारी के संज्ञान में किसी नें मज़ाक मज़ाक में एक मुद्दा जरूर दें दिया है । भ्रष्टाचार और घूस के लिए  कई जगहों पर एंटीकरप्शन टीम से शिकायत भी हुई, छापे पड़े, लेखपाल से लेकर स्टेनो तक गिरफ्तार हुए पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ताजा मामला जनपद के शाहगंज तहसील का है जहाँ एक तहसील चपरासी का पत्र सोशल मिडिया पर वायरल हो गया हालांकि मामला फर्जी निकला किन्तु ऐसे आरोप कोई केवल मजे लेने के लिए तो नहीं लगाएगा। वायरल पत्र में बात तहसील में घूस के पैसों में हिस्सेदारी की मांग की थी । हैरान कर देने वाला पूरा मामला बेहद गंभीर और डरावना है। डीएम जौनपुर के संज्ञान में एक  प्रार्थना पत्र आया जिसमें जो बात लिखी हुई और वायरल है वह चर्चा का विषय बना गया हालांकि अख़बार और पत्रकार इसके सत्यता की पुष्टि नहीं करते किन्तु गुरुवार की देर शाम को एक पत्र सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो गई । इस चिट्ठी नें जिले के प्रशासनिक महकमे में हलचल सी मचा दी। पत्र में नायब तहसीलदार से मिलने वाले घूस के रुपयों में हिस्सेदारी बढ़ाए जाने की मांग की गई थी।  मामला दरअसल पांच सितंबर गुरुवार की देर शाम का बताया गया जहाँ जिलाधिकारी जौनपुर के नाम से शाहगंज तहसील से जुड़ा कहे जाने वाला एक प्रार्थना पत्र सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ । उस प्रार्थना पत्र को देख कर जिला प्रशासन में हलचल है , क्योकि उस पत्र में सीधे घूस से मिलने वाले पैसों को बढ़ाए जाने की मांग थी । एसडीएम को पत्र भेजने वाले का नाम राजा राम यादव बताया गया है जबकि इसी  नाम की प्रार्थना पत्र में उसने लिखा  कि प्रार्थी शाहगंज तहसील के नायाब तहसीलदार लपरी शैलेन्द्र सरोज का चपरासी है । सारा घूस का पैसा सीधे जनता और अधिवक्ताओं से वसूलता है। उसने लिखा कि हमारे नीचे दो और लोग कार्य करते है जिनका नाम अविनाश व अजीत यादव है। हम लोग लगातार मारपीट कर के घूस का पैसा वसूलते है। प्राईवेट कर्मचारियों को 1000 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाता है और हमको सिर्फ 500 रुपया मिलता है लिहाजा 500 और बढ़ाया जाय। डीएम से उसने मांग किया है कि प्राइवेट चपरासी को 1000 (एक हजार रुपया) प्रतिदिन मिलता है किन्तु मुझे 500 रुपया ही नायाब तहसीलदार देते है ,जो मेरे साथ ज़्यादती है अतः मेरा पैसा बढ़ाया जाय। इस मामले की जानकारी जब जिलाधिकारी को हुई तो उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया जो पत्र वायरल हो रहा है वह संदिग्ध लगा और उसकी सत्यता जांची गई । अब तक उस नाम का कोई व्यक्ति वर्णित तहसील में नही मिला । उस पत्र में उसका न तो मोबाइल नंबर है ,और न ही उसका पता। इस पूरे मामले को स्थानीय एसडीएम द्वारा जांच के लिए भेजा गया  । यदि इस प्रकार का मामला सही पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाती पर मामला छुप गया लेकिन एक सत्य चर्चा छोड़ गया कि हमारे सरकारी तंत्र क्या वास्तव में भ्रष्टाचार मुक्त है ! क्या गरीब आदमी से थानो और अन्य कार्यालयों में बिना किसी आर्थिक चढ़ावे के सुनवाई होती होंगी ! क्या समाज में लेखपाल, पुलिस और बाबुओं कि अच्छी छवि है ! ऐसे कई मुद्दों पर सार्थक बहस होती रहेगी।

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