ट्रंप के अमेरिका जैसी महाशक्ति का प्रेसिडेंट बनने से हमें क्या लाभ और हमें क्या हानि ! जो भी विदेशों में राष्ट्रपति इत्यादि बनेगा वो अपने देश का भला सोचेगा पर हाँ कुछ दोस्त देश और वहां के डेलिगेट दोस्ती निभाते है पर कुछ बेहद गद्दार भी होते है और इनमें कनाडा और नेपाल का नाम सबसे अग्रणी है । अमेरिका सुपर पॉवर है और ट्रम्प को लोग पीएम मोदी के दोस्त के रूप में देख रहें इसलिए भारत का विपक्ष जल भून रहा । देख लीजिए , ट्रंप के जीतते ही भारतीय शेयर बाजार भी बाकी दुनिया के मार्केट की तरह उछल पड़ा । यह तेजी लगातार जारी है । ट्रंप भारत के गहरे मित्र हैं अतएव हमारे सरोकार भी दूर तक हैं । इसमें कोई शक नहीं कि पीएम मोदी ने दुनियाभर के राष्ट्रध्यक्षों से गहरे संबंध बनाए हैं । लेकिन बराक ओबामा , डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन के साथ तो मोदी के रिश्ते गले मिलकर जफ्फी पाने वाले रहे पर बांग्लादेश श्रीलंका और कनाडा ने पीठ में खंजर भौकने का भी काम किया है। कोई किसी कोने में दुनिया के किसी देश में कोई राष्ट्रध्यक्ष बने हमें क्या , हमारी बला से। भारत तो युगों से वसुधैव कुटुंबकम् की बात करता आया है , आज की दुनिया सचमुच ग्लोबल हो गई है । तो अब यह कहने से काम नहीं चलेगा कि हमें क्या ? आज के जमाने में मकान चिन रहा मिस्त्री यदि ,100 ₹ प्रतिदिन की जगह 1500 ₹ प्रतिदिन ले रहा है और प्राइवेट लेबर की दिहाड़ी यदि 50 ₹ से बढ़कर 500 और 800 ₹ हो गई है तो इसके पीछे भी देश की तरक्की और वैश्विक कारण मजबूती से खड़े हुए हैं सबके हाथ में स्मार्ट फ़ोन है । सबसे बड़ी बात यह कि आज देश के भीतर और बाहर हिन्दुत्व से दुश्मनी का अद्भुत दौर चल पड़ा है जिसके पीछे देश के ही वो लोग है जो यह कहते और मानते आए है कि किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है। कुछ सिरफिरे नेता अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते हिन्दू धर्म के लोगों को जाति के आधार पर तोड़ने का ख़्वाब बुन चुके हैं । देश को कमजोर करने के लिए इन नादान नेताओं को अमेरिका से जार्ज सोरस और विदेश में बैठा ध्रुव राठी जैसो की मदद मिल रही है । इन हालात में भारत के सच्चे दोस्त साबित हुए ट्रंप की वापसी पर चर्चा करने का समय है । सुखद संयोग है कि देश में मोदी जैसा एक अच्छे सत्ताधीश है जो देश के लिए बढ़िया से बढ़िया बटोरने में माहिर है । ट्रंप और मोदी की यह दूसरी जुगलबंदी रंग लाए यही तमन्ना है ।
भारत का हाल फिलहाल यही संबंध और यही रिश्ता पुतिन के साथ हैं और फ्रांस , जापान , जर्मनी , ब्रिटेन सहित पूरी दुनिया के अच्छे डेलीगेट भारत के चाहने वाले है जिनमें ट्रम्प का भी नाम शामिल है । ट्रंप से भारत को अभी काफी कुछ लेना है । लगातार आतंकवाद और दुश्मनों से घिरे भारत को ट्रंप और मोदी दोनों की जरूरत है । बढ़िया बात है कि ट्रंप ही नहीं समूची रिपब्लिकन जमात इस्लामिक आतंकवाद की विरोधी है । भारत के गर्भ से निकला चीन और पाकिस्तान सदा दुश्मन बना रहा । जिस बांग्लादेश और श्रीलंका को हमने बनाया आज वही दामन जला रहा है । बेशक हाल ही में सीमा संबंध कुछ सुधरे हों , लेकिन चीन जैसा बलशाली विस्तारवादी दुश्मन नई दुश्मनी निभाने के लिए बराबर में खड़ा है । उधर पश्चिम में कनाडा के हिटलर बनने का ख्वाब सजाये जस्टिन ट्रुडो खड़े हो गए हैं । हालात से निपटने के लिए भारत को ट्रंप जैसे कद्दावर नेता की जरूरत है । अच्छा हुआ जो कमला हैरीस हारी और ट्रंप जीते । कमला हैरिस भारतीय मूल की जरूर हैं लेकिन क्रिप्टो वामपंथी अर्बन क्रिश्चियन बिरादरी से आती हैं , कश्मीर पर सवाल खड़े करती हैं । उनकी जगह ट्रंप जैसे दोस्त का लाभ कौन देश नहीं उठाना चाहेगा ? भारत सरीखी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जो 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के साथ दुनिया के तीसरे स्थान पर आना चाहती हो , ट्रंप इसके बड़े मुफीद साबित होंगे और अब भारत वैश्विक शक्ति के रूप में और मजबूती से आगे बढ़ेगा। कनाडा के हिटलर की निज़ाम जल्द ही खतरे में पड़ती नजर आ रही।

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर, यूपी
