व्यंग्य : कांग्रेसी युवाओं को माया मिली ना राम……

महान समाजशास्त्री सन्नाटा बाबा कहते हैं- नंगई और रजनीति का सम्बंध लम्बे समय से रहा है । आज कल के राजनीति में नेता रूपी मजनू को जैसे ही कोई थैला मिलता  है, वह लैला को छोड़ देता है। अब वोट चोरी पर रागा का थैला देखकर एनएसयूआई की नई वाली पोहा भी रोना धोना शुरू कर चुकि है । चुकी रोने वाले वीडियो पर भी मिलियन व्यू आ रहे हैं सो रोना रेगुलर है। लगे हाथ युवा कहलाने की नौटंकी भी शुरू है। पता चल रहा है कि यही रोना धोना जेएनयू के छात्र संघ चुनाव में भी एनएसयूआई द्वारा शुरू बात वही ट्रांसजेंडर के घर हुआ लड़का, उन्होंने चूम चूमकर ही मार दिया ।  नेपाल में जेन – जी अर्थात गँवार जनरेशन तथा ग्लोबल भाषा में जिन्हें सोशल मीडिया छपरी कहते हैं उनका सीधा मुकाबला  राहुल गांधी के जेन – जेड अर्थात जेनरशन झंडू से है । दोनों में यही समानता है कि दोनों बाहर से घोषणा करके कहते है कि अपने अपने गुट के नाम लेके आओ महागठबंधन बनाओ, जिसे तुम अंतरिम प्रधानमंत्री बनाना चाहते हो वो बस लोकतंत्र को आग लगाएगा । नेपाल में कुछ जेन – जी वाले कह रहे हैं के अंतरिम प्रधानमंत्री 1997 से 2012 तक पैदा हुआ व्यक्ति ही बनना चाहिए। भारत में भी जेन – जेड वाले यही कह रहें। अब राहुल गाँधी का हाल ठीक वैसा ही कि माया मिली ना राम ! बिहार में वोट अधिकार रैली में आये  बिजली विभाग का लाइनमैन भी अंतरिम प्रधानमंत्री की रेस में शामिल हो गया जैसे घोड़ों की दौड़ में गधे। कुछ सहज हिंदुत्ववादी योद्धा रागा के पक्ष में खड़े हैं।
  मुझे लगता है जेएनयू वाली चौधरानी जैसी लड़कियों का समर्थन करना आत्मघाती है। ये सब जानबूझ कर पैसे के लिए पॉलिटिक्ल गलीज में उतरती हैं और लगे हाथ अपना  प्रमोशन भी करती हैं। पोहा नामक गायिका की तरह अपने आप को सही ठहराती हुई समाज को गालियां भी देती हैं। और जब मामला बिगड़ता है तब इनको महिला आयोग  याद आता है। चार पाँच साल पहले जब फ्री नेट के कारण दुनिया सबकी मुट्ठी में आ रही थी, और खाली बैठा हर व्यक्ति स्वयं को डिजिटल क्रियेटर के पद पर शुशोभित करने लगा था, उसी समय भोजपुरिया इलाके की  एक फूहड़ सी  दिखने वाली छपरी टाईप की लड़की मुर्गी काटने का काम छोड़ कर फेसबुक के लिए देसी गायन  वीडियो बनाने लगी ।  डिजिटल दुनिया में नाम बनाई – सोशल मिडिया अर्निंग मनी की लालची बनी । उसकी बेसुरी गायकी में केवल टोंट था सामाजिकता कहीं नहीं , केवल और केवल गालियां थी । गन्दी गन्दी गालियां। कोई विशेष स्क्रिप्ट नहीं, कोई कंटेंट नहीं, बस दो  लोग आपस में बात करती और हर पंक्ति में मोदी योगी को हर गन्दी फूहड़ गाली.. भाषा इतनी गंदी की  क्या ही कहें। पर भाई साहब! सारी दुनिया हम यूपी बिहार वालों को विशेष दृष्टि से यूँ ही तो नहीं देखती न। हम जो हैं वे हमीं हैं। यहाँ के महान दर्शकों ने उन गालियों को खूब सुना। इतना सुना कि मनी मेराज जैसा नौसिखिया तब करोड़पति हो गया । मिलियन्स फॉलोवर, करोड़ों व्यू, लाखों लाइक… स्टार हो गया तब लड़का और यह लोकगायिका भी । फिर क्या था, खेल जगत के ‘बिग बॉस’ और आईपीएल में उन्हें भोजपुरी कमेंटेटर के रूप में बुलाया जाने लगा। दुनिया जान गयी कि जो मनी मेराज बोलते हैं वही असली भोजपुरी है, और भोजपुरिया इलाके के लोग वैसे ही होते हैं जैसे मनी मेराज हैं। उधर दूसरी छपरी सोशल मीडिया से हिट हुई तो ढोलक पीट पीट कई रील बनाने लगी । हिट हुई  तो उसके पीछे कांग्रेस  भी मंडराने लगीं। आलिया भट्ट, कियारा आडवाणी, सन्नी लियोनी बनने का सपना देखने वाली लड़कियां अब रील बनाने पर उतारू । रागा के  साथ काम करने का मौका मिल जाय तो लाइफ बन जाएगी टाइप की बातें… एक रोल के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रीलबाज लड़कियां।इन्हीं लड़कियों में एक हैं अपनी पोहा ! नाम से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये औरत क्या हैं। मतलब वही जो आप समझ रहे हैं… इतना ही नहीं यह  दुनिया को ज्ञान भी देने लगीं। हिन्नु मुस्लिम एकता की बातें… “न हिन्नु खतरे में है न मुलमान खतरे में है, गौर से देखो हिंदुस्तान खतरे में है” टाइप डेढ़ कौड़ी की शायरी… और उदाहरण दिया गया कि आखिर नेपाल सरकार को आधी रात सोशल मीडिया पुनः शुरू करना पड़ा । भारी हिंसा के बाद सरकार ने जनता से हार मान ली । आज दुनिया के करोड़ों युवाओं की जरूरत बन चुके हैं फेसबुक , एक्स , यू ट्यूब  , व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम आदि माध्यम । युवाओं की ही क्या तमाम विभागों और दुनिया की तमाम सरकारों की योजनाएं सोशल मीडिया के आधार पर बनती हैं या सोशल मीडिया से प्रभावित होती हैं । विभागीय कार्यों एवं मीडिया कामकाज के लिए सोशल मीडिया के अनेक प्लेटफॉर्म्स जरूरी है । ऐसे समय में जब दुनिया के 750 करोड़ से अधिक लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हों किसी से देश के लिए भी सोशल मीडिया बंद करना आत्मघाती कदम हो सकता है । नेपाल में यही हुआ और आज सारा नेपाल सड़कों पर है , सैकड़ों लोग घायल हैं , दर्जनों मर चुके हैं , सेना सड़कों पर है , चीन समर्थक ओली सरकार कभी भी धराशाई हो सकती है । सोशल मीडिया की ताकत के सामने अंततः आधी रात ओली सरकार को झुकना पड़ा । नेपाल की समस्या बस इतनी ही नहीं कि सोशल मीडिया बंद कर दिया गया । हालांकि समस्या यह भी कोई कम नहीं । दरअसल  नेपाल में जब से राजशाही का खात्मा हुआ , नेपाल बर्बादी की ओर चल पड़ा । चीन समर्थक मार्क्सवादी लॉबी हावी हो गई । फिर विश्व के एक मात्र हिन्दू राष्ट्र नेपाल से हिन्दू राष्ट्र का दर्जा चीन समर्थक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने छीन लिया । तब से नेपाल में घोर राजनैतिक अस्थिरता आ गई है और तेजू भैया उसी का उदाहरण देकर बिहार को धमका रहें है।
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक व्यंग्यकार एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

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