रैकेट बड़ा है, सामने सत्ता, पॉलिटिक्स और नेता खड़ा है…!

सिरपजीवी गिरोह से शुरू हुई कश्मकश नेहा सिंह राठौर पर एफआईआर और पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी पर जाकर सम्पन्न  हुई  । तो क्या मान लिया जाय की सत्तासीन नेता अपने पद का दुरूपयोग करते है या दूसरी भाषा में यह कहा जाय की आम लोगो के छोटे मोटे गुनाह उन्हे जेल भिजवा देते है जबकि बड़े नेता, उद्योगपति इत्यादि के बड़े गुनाह भी छिपा लिए जाते है या पैसे और सत्ता के दम पर दबा दिए जाते है। नशे के सिरप मामले में हो हल्ला बहुत हुआ पर कार्यवाही के नाम पर क्या हुआ आप सबको पता है। किसे बचाया जा रहा और कौन बलि का बकरा बन रहा। उधर गोरखपुर में फर्जी आईएएस  गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर पकड़ा गया। वो सिर्फ प्रोटोकॉल मेनटेन करके लिए हर महीने 5 लाख रुपए खर्च कर रहा था। सफेद इनोवा पर लाल बत्ती  लगाकर वह गांवों का दौरा करता ।
बिहार के भागलपुर गांव में दौरा करते हुए असली आईएएस  मिल गए। बैच और रैंक को लेकर उन्होंने सवाल पूछे, तो गौरव ने उन्हें थप्पड़ जड़े थे। हैरानी यह कि उन्होंने  इसकी कहीं शिकायत तक नहीं की। पुलिस को गौरव के पास से 2 मोबाइल मिले। अपने साले अभिषेक कुमार की मदद से गौरव खुद को सोशल मीडिया पर बतौर आईएएस  अफसर पेश करता था। जालसाजी का नेटवर्क यूपी में बढ़ाने के लिए उसने गोरखपुर के परमानंद गुप्ता को सेट किया, जो अभिषेक का दोस्त था। सिर्फ 3 साल में जालसाजी का ये नेटवर्क यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड तक पहुंचा दिया। वह इन राज्यों के बिल्डर और कारोबारियों को सरकारी ठेके दिलाने का ऑफर देता था। उन्हें एआई की मदद से जनरेट टेंडर के पेपर भी मुहैया करा देता था। बिहार के एक कारोबारी को 450 करोड़ का टेंडर दिलाने का झांसा देकर 5 करोड़ रुपए और 2 इनोवा कार की रिश्वत भी ले ली थी। अब ऐसे भी रैकेट चल रहें जबकि एक अन्य घटनाक्रम में पॉलिटिकल पॉवर के तहत  पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को पहले फ़िल्मी स्टाइल में गिरफ्तार करती है पुलिस फिर कोर्ट ले जाती है । आप लें जाने के तरीके को देखिए। लग रहा है जैसे पुलिस किसी अंतरराष्ट्रीय अपराधी को खींचकर ले जा रही हो।
यही पुलिस कभी उनके आगे सैल्यूट बजाती थी। अमिताभ ठाकुर इस बीच चीखकर कहते हैं- मेरी हत्या कराई जा सकती है। योगी आदित्यनाथ के द्वारा ये किया जा रहा है। दरअसर इस दौर में योगी आदित्यनाथ का नाम दुष्प्रचारित करना किसी देशद्रोह से कम नहीं और बाबा का आदेश  यूपी पुलिस के लिए किसी वैदिक क़ालीन धर्मग्रंथ से कम पवित्र नहीं है । आप ब्रजेश पाठक, पियरका चचा, केशव मौर्या को जितना चाहें अपशब्द कह दें कुछ नहीं होगा पर बाबा को बोलेंगे तो बचेंगे नहीं । नेता जी मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की तो बात ही छोड़ दीजिए यें तो मुख्यमंत्री रहते सत्ता का खूब दुरूपयोग करते रहें है। आप अमित शाह और मोदी को भी जी भर कर अपशब्दों से नवाजेंगे तो आपको पैसों वाला सूटकेस लेकर  कपिल सिब्बल से मिलना होगा। आपके खिलाफ चार थानों में छह एफआईआर होगी और लुकआउट नोटिस आपको सऊदी अरब से तलाश कर वापिस लाएगा।
हर दल में बड़ी-बड़ी  नेत्रीया होती है जिन्हें मंच पर चीयर  लीडर के तरह बिठाया जाता है, इनसे खूब मेहनत करवाया जाता है,  प्रचार करवाया जाता है फिर इनको टिकट के नाम पर बरग़लाया जाता है। मैं फिर से कह रहा हूं यह जातिवादी मानसिकता से बनी पार्टीयों  में ना देश प्रेम होता है ना हिंदू सनातन प्रेम होता है ना समाज प्रेम होता है। बस लोगों को जाति के नाम पर भड़काओ सत्ता हासिल करो और लोगों को दूध में पड़ी मक्खी की तरह उठाकर फेंक दो। और जितनी भी जातिवादी पार्टियां  हैं चाहे वह एनडीए में शामिल हो या वह यूपीए में शामिल हो उनकी यही मानसिकता है। इसीलिए मैं कई बार लिखता हूं की जातिवादी और जाति के नाम पर बनी पार्टियों के अगर आप समर्थक हैं तो आप स्वार्थी और मतलबी है। जातिवाद का सबसे बड़ा उदाहरण विपक्ष में  मुलायम परिवार है और पक्ष में भी उधर उपेंद्र कुशवाहा है अपनी पत्नी को विधायक बना दिए और जब मंत्री बनाने की बारी आई तब अपने बेटे को मंत्री बना दिए जो विधायक तक नहीं थे अब उपेंद्र कुशवाहा केंद्र में मंत्री हैं उनकी पत्नी विधायक हैं बेटा मंत्री है और बाकी कुशवाहा जी लोग देखकर खुश रहे होंगे कि हमारे समाज का व्यक्ति मंत्री है लेकिन आपको क्या मिला यह सोचिए !
यही हाल राजभर समाज के के नाम पर बनी पार्टी का है ओमप्रकाश राजभर ने अपने बेटे बेटी सबको राजनीति में सेट कर दिया मंत्री बना दिया विधायक बना दिया और आपको राजभर आर्मी में जाति के नाम पर  सेट कर आपका आर्थिक और मानसिक दोहन करेंगे। यही हाल जीतन राम मांझी का है समधन बेटी दामाद भाई भतीजा सबको सेट कर दिए। समाजवादी पार्टी से शुरू हुई परम्परा  है यह जातिवाद जिसमें अखिलेश यादव के खानदान में उनका कोई ऐसा रिश्तेदार शायद ही होगा जो किसी न किसी पद पर ना हो और बाकी यादव जी लोगो  का क्या हाल है आप खुद देख लीजिए । तो भाई यह जाति के नाम पर बनी पार्टियों से आप लोग दूर रहिए आप ऐसी पार्टी का समर्थन करिए जो एक राष्ट्रीय पार्टी हो जो अपनी एक विचारधारा लेकर चलती हो ना कि अपनी एक जाति को  लेकर चलती हो।
पंकज सीबी मिश्रा
राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार
केराकत, जौनपुर, यूपी 

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