सलाह के लिए आभार…. यहां तो छिड़ा है गैस युद्ध

यदि आपको लगता है कि गैस की किल्लत के कारण आपके भूखों मरने की नौबत आ गई है तो आप परम अज्ञानी है और इसके लिए केवल सरकार ही दोषी है तो आप कीर्ति आजाद हो गए है। ताज़ा गणित के अनुसार मान लीजिए कि आप उच्च कोटि के चमचे हैं क्योंकि आप गैस के भूखे है। सत्य इन दोनों के बीच में खड़ा है। मेरे एक बंधु की इस अति महत्त्वपूर्ण टिप्पणी को पढ़ लीजिये, जिनके अनुसार देश में पेट्रोल डीजल की ऐसी कोई कमी नहीं किन्तु रसोई गैस के लिए त्राहिमाम मची है। एबीपी के चिल्ल पो द्वारा प्रस्तुत विजुअल्स से बढ़कर विश्वस्नीय और प्रमाणिक कोई अन्य स्रोत है ही नहीं। और सुनिये मंत्री जी के संसद में दिये गये बयान मात्र झूँठ के अंश  है जिसकी विश्वनीयता केजरीवाल है। तो हो जाइये सतर्क खोल दीजिये सरकार के विरुद्ध मोर्चा ! वैसे वस्तु स्थिति यह कि जिन परिवारों के लोग रसोई गैस के सिलिंडरों के प्रयोग को नकारते हुए, चोरी की बिजली से इंडक्शन एवं ‘ग्रीन गैस’ की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं वे भी अपने आवास में रिक्त पड़े सिलिंडर्स को खाली दिखाने होड़ में जुट गये।
इसके अतिरिक्त अधिकांश कनेक्शन धारियों के पास अतिरिक्त सिलिंडर उपलब्ध हैं, वे भी उन सिलिंडर्स को लेकर आपूर्ति कर्ताओं के पास पहुँच गये। अभी हाल की रेड्स में कुछ परिवारों के पास दसियों भरे हुए सिलिंडर पकड़े गये। खेद कि हमारे बीच अनेक ऐसे तत्त्व मिलेंगे जो देश के विरुद्ध बोलने/लिखने का मसाला खोजते रहते हैं……. उनसे भगवान रक्षा करे।
पेट्रोल के बारे में तो नहीं, हां रसोई गैस की कमी के समाचार हैं, आज तक ने भी देश के कई भागों से दर्जनों विजुअल्स भी दिखाए,  लाइन तोडने के कारण मारपीट भी दिखाई। पर संसद में म॔त्री महोदय सफेझूठ बोलते दिखे कि गैस की कोई कमी नही है। मतलब यह कि जनता पागल है जो लाईनों में खड़ी है, रेस्टोरेंट चालक निठल्ले हैं जिन्होंने काम ब॔द कर दिया, राम रसोई भी ब॔द हो गई, और सरकार वो है जिसने एक दम 50-60 रू बढ़ा दिए फिर चस्मा लगाकर एस्मा लागू कर दिया, कोयले के नियमों ढील दी, देश के अंदर जो 40% गैस उत्पादन है उसका 28% बढ़ाने की व्यवस्था की गई। यह सब किस लिए…… जनता इतनी भी मूर्ख नहीं कि माननीय मंत्री महोदय द्वारा भरी संसद में बोले सफेद, हां सफेद झूठ पर विश्वास कर लेगी। दिक्कत है। एजेंसियों पर लंबी लंबी कतारें हैं। एजेंसी पर सिलेंडर का एक ट्रक उतरता है लेकिन उससे अधिक लोग खड़े रहते हैं और कुछ को वापस जाना पड़ता है।
यदि आपने 2013-14 में गैस उठाया है तो मान लीजिए कि लगभग वही स्थिति है। लेकिन फिर भी दो चार घंटे के परिश्रम के बाद गैस मिल जा रहा है। हम पिछले दस वर्ष से गैस की समय से होम डिलीवरी के आदी हैं, सो तनिक अधिक परेशानी हो रही है। घरेलू गैस बचाने के उपाय  :-  जितने दिन हो सके उपोषण करें. क्योंकि रोज ठूंसठूंस कर दिन में चार बार खाने से वैसे भी पेट हमेशा ये दूआ मांग रहा होता है कि ना जाने ये ‘पेटू’ कब थोडी राहत मुझे देंगा. इसलिए इस उपोषण से ना केवल गैस बचेगी अपितु पेट को भी थोडी राहत मिलेगी। उपोषण के बाद सिर्फ कच्चा ‘सलाद’ खाना शुरू करें. वैसे भी आजकल डाईटेशियन, न्यूट्रेशियन ना जाने कौन-कौन से नूस्खे देते है, तोंद कम करने, चर्बी घटाने के लिए. उनमें सलाद महत्वपूर्ण होता है. अब आप भले ही इसको जानवरों सी जुगाली वाली खूराक मानते हो लेकिन टमाटर, बंद गोभी, गाजर, ब्रोकली, मशरूम डालकर बना हुआ सलाद खा लेना चाहिए, भलें ही मन मसोसकर लेकिन गैस कि किल्लत और स्वास्थ्य की दृष्टि से यह मूफीद है।
उसके बाद आईयें अब उबलें भोजन पर. चूंकी गैस बचानी है तो इंडक्शन को वापरियें. और इसमें भी स्टीम वाला भोजन बनाए. जिससे बिजली कि खपत ज्यादा ना हो. पालक, मेथी, बथूआ, घोल, आंबट चूका को एक बाऊल में डालिए और चढा दीजिये इंडक्शन पर. और उबलने पर मस्त नमक, मिर्च छिडकर चलने दीजिये. आखिर गैस कि बचत का सवाल है. और उबला भोजन वैसे भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा ही होता है. आप विराट से पूछ ले. वो कहता है मुझे आप रोज महिने उबला, बिना स्वाद वाला भोजन दे मैं खा लूंगा, मुंझे स्वाद से कोई लेनादेना ही नही है। अब बताईये जब देश का नंबर वन क्रिकेटर जिसके पास पैसो कि “टकसाल” है वो अपने स्वास्थ्य के लिए बारह महिनों उबला भोजन खा सकता है, तो आप हम किस खेत की मूली है. गैस कि किल्लत के लिए इतना तो कर ही सकते है। और इसके बाद समर वैकेशन तो चल ही रहा है तो थोडे बामन बाज बन कर चलें जाईये किसी हील स्टेशन पर सपरिवार और वहाँ जाकर जंगल में रूककर घरवालों को बोल दे कि सब -कुछ यहाँ महंगा है। और फिर वहां भी ‘सलाद’ कि प्लेट खाते रहे लेकिन याद रखें वहाँ भी यदि आपने परिवार वालों को मनपसंद खाना खाने नहीं दिया, तो वहीं घरवालें वहां से वापस आने के बाद, आपको उसी गैस कि टंकी से बांधकर, पंद्रह दिनों तक कमरें में बंद कर, दरवाजें को ताला लगाकर, चाबी कूडे में भी फेक दे तो मुझे कुछ मत कहना।
ऑनलाइन व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में फेल हो चुकी है। मैसेज और वाट्सअप से बुकिंग के दावों में अधिक सच्चाई नहीं है। होम डिलीवरी लगभग ठप्प है और सिलेंडर के लिए एजेंसी पर दो तीन बार भी जाना पड़ सकता है। गृहस्थ का काम किसी तरह चल भी जाए, पर जिनके यहां शादी विवाह है उन्हें दिक्कत हो रही है। हां, बिजली की आपूर्ति है तो गांवों के अधिकांश घरों में इंडक्शन से भी भरपूर काम चलाया जा रहा है। भाई, जिनके भी भाई 4 घंटे लाइन में खड़े होकर खाली हाथ लौट रहे हैं उसके लिए लातें उन अफवाह फैलाने वालों पर पड़नी चइये, जो “किल्लत आ रही है” चिल्ला-चिल्ला कर पैनिक क्रिएट कर रहे हैं। जबकि असलियत ये है कि पूरी  दुनिया में अफरा तफरी हो रखी है ईरान-अमेरिका-इज़राइल की जंग से जहाँ होर्मुज स्ट्रेट (जहाँ से हमारा 80-90% आयातित LPG आता है) पर IRGC ने रोक लगाई हुई है। टैंकर रुक गए, सप्लाई चोक हो गई है। लेकिन सरकार ने घरेलू कंज्यूमर को प्रायोरिटी दी है रिफाइनरी से LPG प्रोडक्शन 25% बढ़ा दिया, घरों को 2.5 दिन में डिलीवरी का नॉर्मल साइकल चालू है।
सिर्फ कमर्शियल (होटल-रेस्टोरेंट) वाले रो रहे हैं क्योंकि उनकी सप्लाई कट गई है। पेट्रोल-डीज़ल के दाम दोगुने हो गए दुनिया में, लेकिन यहाँ नहीं बढ़े। सब्सिडी वाली गैस अभी भी ₹900-950 में मिल रही है। अरे भाई लाइन लगानी पड़ रही है वो इसलिए क्योंकि कुछ लोग पैनिक बुकिंग कर रहे हैं, 2-3 एक्स्ट्रा सिलेंडर घर में स्टॉक कर रहे हैं, होर्डिंग कर रहे हैं और ब्लैक में ₹2000-4500 में बेच रहे हैं। एजेंसियों पर लगी भीड़ की जड़ में भी एक अजब तरह का भ्रष्टाचार है। होटल (चाय पकौड़ी मिष्ठान भंडार टाइप ) चलाने वाले अपने दस दस लड़कों को कार्ड लेकर लाइन में लगाए हुए हैं। उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए वे कार्ड जो लंबे समय से पेटी में रख दिए गए थे, वे भी एक्टिव हो गए हैं। इस देश में कालाबाजारी केवल बड़े स्तर पर ही नहीं होती। अपने कार्ड से गैस उतार कर पड़ोसी को बेचने वाले भी हर गांव में हैं।
देश रंगीला है बाबू…जिस व्यक्ति को थोड़ी सी भी समझ है वह जानता है कि रेगिस्तानी कबीलों में छिड़े युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ना ही है। जब दुनिया पेट्रोलियम के लिए उन पर एक हद तक निर्भर है तो दिक्कत होगी। दुनिया में पेट्रोलियम के दाम भी बढ़ेंगे, इस बात में भी किसी को संदेह नहीं होनी चाहिए। संभव है कि आने वाले दिनों में भारत सरकार भी दाम बढ़ाए, और एक जिम्मेवार नागरिक के रूप में हमें उस स्थिति के लिए भी तैयार रहना होगा। और यदि किसी को लगता है कि इस सरकार की जगह दूसरी सरकार होती तो स्थिति बेहतर होती, तो उसकी समझ को नमन जो कहते है ओय सुन !औकात पे मत जइयो। चार सिलेंडर घर पर भरे हुए रखता हूं,, मैं एक फोन पर जब चाहे दो तीन सिलेंडर मंगवा सकता हूं,,दो गैस एजेंसियों के मालिक दोस्त है मेरे।
पंकज सीबी मिश्रा
राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 

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