राघव चड्ढा ने जिस तरह आम जनता के असली मुद्दों को बेबाकी से सदन में उठाया है उसे सुनकर बेईमान नेताओं का तमतमाना तो बनता है। अपने को जनहितैषी कहने वाले लोकप्रिय नेताओं के कानो में गर्म तेल उड़ेलने वाले सांसद राघव चड्डा ने ना सिर्फ बेबाकी से रिचार्ज, रोजगार, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर बेखौफ होकर आवाज उठाई है बल्कि सदन के नामी नेताओं को लज्जित कर जनता की आँखे खोल दी है और अब ज़ब लोग एक सुर में राघव चड्ढा को सीएम मटेरियल कहने लगे तो यह बात आम आदमी पार्टी सहित सत्ता और विपक्ष के नेताओं को नागवार गुजरी। ऐसे में यह तो होना ही था कि राघव को उपनेता पद से हटाया जाए और बोलने से रोका जाए।
राघव का मुद्दा काबिल-ए-तारीफ ही नहीं बल्कि बाकी नेताओं के लिए एक आईना है। आज देश को ऐसे पढ़े-लिखे, समझदार और जमीनी सच्चाई से जुड़े नेताओं की जरूरत है, जो सवाल पूछने की हिम्मत रखते हों, न कि सिर्फ सत्ता के आगे झुकने और जातिवादी राजनीति करने की आदत पर खुद की तिजोरी भरते हो। सच तो ये है कि अनपढ़ और मुद्दों से भटके हुए नेता कभी भी ऐसे तीखे और जनता से जुड़े सवाल नहीं उठा सकते। उन्हें न तो जनता की तकलीफ समझ आती है, और न ही सिस्टम से जवाब मांगने की हिम्मत होती है। अब वक्त आ गया है कि देश की जनता भी समझे हमें भाषण देने वाले मोदी – शाह, अखिलेश – ममता, मोहन – सिद्धरमईया जैसे बड़बोले नेता नहीं बल्कि राघव और प्रियंका चतुर्वेदी जैसी जवाब मांगने वाले नेता चाहिए।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि राघव चड्ढा बेवफ़ा हैं क्यूंकि उन्होंने असली मुद्दा उठा दिया जिसके बाद उनपर कार्यवाही होना लाजमी था पर आब इतना तो तय है कि पूरे देश में राघव कही से भी चुनाव लड़े सामने वाले नेता को कड़ी टक्कर दे लेंगे क्यूंकि उन्होंने जनता के नब्ज को पकड़ा है। अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है और राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखी है कि उनको संसद में बोलने न दिया जाए जिसपर जनता ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी है जिसका खामियाजा आगामी चुनाव में केजरीवाल को भुगतना पड़ सकता है। खबर यहां तक है कि पार्टी चाहती थी कि राघव एलपीजी क्राइसिस और भारत की विदेश नीति पर भी ना बोले ,पर राघव ने ऐसा करने से मना कर दिया उन्होंने कहा जनता ने उन्हें सवालों और विकास के लिए वोट दिया है और इसके लिए वो सदन में मुखर रहेंगे।
इसके बाद आप पार्टी ने कड़े कदम उठाए है। राघव और आम आदमी पार्टी की खींचतान देखने में आम लगता है पर यह अभी और दिलचस्प होगा, जो उस निचले स्तर तक जाएगी तो जिस स्तर तक स्वाति मालिवाल पहुंच गई थी, लेकिन कुछ तो वजह है कि यूंही कोई बेवफ़ा नहीं होता।केजरीवाल और भगवंत मान के चार्टर्ड प्लेन में यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर अवध ओझा ने कहा कि क्या वे बैलगाड़ी पर चलें? उन्होंने बताया कि आज के दौर में तेज परिवहन और बेहतर संचार इसलिए विकसित किए गए हैं, ताकि समय की बचत हो सके. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उन्हें यहां से गुवाहाटी क्लास लेने जाना हो और वे ट्रेन से जाएं, तो इसमें करीब 24 घंटे लग जाएंगे. ऐसे में विमान या बेहतर साधनों का उपयोग करना जरूरत है, न कि दिखावा। अवध ओझा ने कहा कि अगर एक आम आदमी मेहनत करके ऊंचाई तक पहुंच सकता है, तो उसकी लाइफस्टाइल भी बदलेगी. अगर मुझे कहीं जल्दी जाना हो, तो मैं भी समय बचाने के लिए तेज साधन चुनूंगा।
इसका मतलब यह नहीं कि वह व्यक्ति आम आदमी से दूर हो गया है. अवध ओझा ने आगे कहा कि देश में आम आदमी ही असली राजा है और नेताओं की भी अपनी जिम्मेदारियां होती हैं. अगर कोई नेता चार्टर्ड प्लेन में यात्रा करता है, तो वह उसकी जरूरत के हिसाब से होता है. उन्होंने कहा कि निजी जीवन में नेता, आम आदमी की तरह ही रहते हैं. राघव भी आम आदमी पार्टी से राज्यसभा के सांसद हैं और स्वाति मालीवाल भी उसी कैडर से आती है पर स्वाति एक मौका परस्त नेता है जबकि राघव शुरू से ही संयमित रहें है। इनका राज्यसभा कार्यकाल 2028 मध्य तक है तो स्वाति का 2030 शुरू तक। केजरीवाल अगर राघव और स्वाति को पार्टी से निकालते हैं तो भी उनकी राज्यसभा सदस्यता बनी रहेगी। हां अगर राघव और स्वाति ख़ुद आम आदमी पार्टी छोड़ते हैं और किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं तो वो राज्यसभा चेयरमैन की ओर से राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य क़रार दिए जा सकते हैं क्योंकि यहां दल बदल विरोधी क़ानून लागू होगा। पर राघव ने अपने लिए जमीन तैयार कर ली है।
जबकि स्वाति मालीवाल अब राजनीति में गर्त की ओर बढ़ चली है।इसलिए ये ‘लव एंड हेट’ स्टोरी अभी ऐसे ही चलती रहेगा। राघव चड्ढा ने पिछले कुछ समय से अपने राजनीतिक जमीन को खुद के दम पर मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर जो मुद्दे उठाने की मुहिम छेड़ रखी है वह किसी भी पार्टी और उसके नेताओं का जनता से कोई लेना-देना नहीं। राघव की अपनी पीआर टीम है जिसके ज़रिए केवल अपना प्रचार करते हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह शराब घोटाले में कोर्ट से बरी हुए तो राघव का कोई बयान सामने नहीं आया। सीबीआई इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ दिल्ली हाईकोर्ट गई, वहां सीबीआई की दलील को सही माना, राघव फिर भी चुप रहे। आश्चर्यजनक ढंग से राघव जो भी मुद्दा उठाते हैं, सरकार उन्हें पूरा समर्थन भी देती है।
राघव ने एयरपोर्ट्स पर सस्ते समोसे, ई-कॉमर्स कंपनियों के गिग वर्कर्स की परेशानियों, टेलीकॉम कंपनियों की ओर से बिल के लिए महीना 28 दिन माने जाना जैसे मुद्दे उठाए तो सरकार ने सभी पर राघव का साथ दिया। दरअसल बीजेपी के पास शशि थरूर या राघव चड्ढा जैसे चार्मिंग चेहरों की कमी है, इसीलिए दोनों पर डोरे डाले जा रहे हैं। राघव चड्ढा पर एक्शन के बीच अरविंद केजरीवाल से जुड़े एक विवाद में शिक्षाविद् और आम आदमी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ चुके अवध ओझा ने बयान दिया है।
अवध ओझा ने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के चार्टर्ड प्लेन में सफर को लेकर प्रतिक्रिया दी है। वहीं, शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल को राहत मिलने के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या वे उन्हें भगवान मानते हैं, तो उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को भगवान मानना गलत है और यह चापलूसी होगी. उन्होंने केजरीवाल की तारीफ करते हुए उन्हें एक बहुत अच्छा नेता बताया, जिनके पास शानदार विजन है. अवध ओझा ने कहा कि उन्होंने केजरीवाल के साथ कई बार लंबी बैठकों में समय बिताया है, जहां शिक्षा, औद्योगिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होती थी. केजरीवाल देश के भविष्य के नेता बन सकते हैं, क्योंकि लोग धीरे-धीरे बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य की जरूरत को समझ रहे हैं।

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर, यूपी
