भारत के समक्ष चुनौतियां और उनका निराकरण

वर्तमान समय में भारत के पड़ोसी अपनी अपनी मादकता में बेहोश हैं या इनकी मति मारी गई है जो शांति पूर्ण सह अस्तित्व की भावना को नकारकर आक्रामक भारत विरोधी गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में घटित पहलगाम हमला इसी का परिणाम है।
वर्तमय समय में भारत के समक्ष चुनौती
वर्तमान समय में भारत के समक्ष गंभीर चुनौती है। भारत के पूर्व सीडीएस कहा करते थे कि भारत सदैव 2.5 मोर्चे पर युद्ध के लिए तैयार है जबकि वर्तमान परिस्थितियों में 3.5 मोर्चे की चुनौती भारत के समक्ष उपस्थित है।
क्या है साढे तीन मोर्चे की चुनौती ? अगर हम बात करें पहले मोर्चे की तो पहला मोर्चा पाकिस्तान दूसरा मोर्चा चीन तीसरा मोर्चा बना रहा है बांग्लादेश और आधे मोर्चे के रूप में भारत के आंतरिक स्लीपर सेल तथा देशद्रोही इसमें माओवादी और भारत विरोधी विचारों को बढ़ावा देने वाले लोग शामिल हैं भारत को इन सभी से निपटना होगा। जिसके लिए रक्षा क्षेत्र में अपने उत्पादन को बढ़ाना होगा रक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाना होगा। इसके साथ ही जो आंतरिक हमारी कमजोरी हैं उनसे निपटने के लिए अपने खुफिया ढांचे को मजबूत करना होगा तथा देश विरोधी तत्वों को शीघ्र सजा दिलाने के लिये कानून में संशोधन करना होगा।
भारत को अर्थव्यवस्था में तेज़ी से प्रगति करनी होगी कयोंकि हथियारों को खरीदने के लिए अनुसंधान करने के लिए अन्य देशों से हथियार खरीदने के लिए नए-नए हथियारों के उत्पादन के लिए धन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा भी जब आप आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं तो जो कमजोर राष्ट्र होते हैं वह आपके समक्ष आर्थिक लाभ लेकर के आपके पक्ष में खड़े हो जाते हैं इसलिए भारत सरकार का जो लक्ष्य है कि 2082 तक हमें 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की इकोनॉमी बनाना है तो इस सपने को भी हमें सरकार करना होगा आज देश के समक्ष ऐसी स्थिति आ खड़ी हुई है कि देश के जवान जो मोर्चे पर लड़ते हैं उन्हें अत्यधिक बहादुरी का परिचय देना होगा देश के व्यापारी जो कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं उन्हें देश के लिए एक प्रकार से व्यापार को बढ़ावा देना होगा तथा करों को पूरी ईमानदारी से समय पर सरकार को देना होगा। देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों को जिसमें टाटा है, महिंद्रा है, रिलायंस है इन सभी को मिलकर के रक्षा क्षेत्र में निवेश करना होगा और अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना होगा तभी भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा तब कोई भी देश भारत की ओर आंख उठाकर देखने का साहस भी नहीं जुटा पाएगा। वर्तमान समय में अमेरिका और रूस हथियारों के मामले में  और वैश्विक शक्ति के मामले में विश्व में पहले और दूसरे नंबर पर आते हैं। इसलिए उनसे कोई नहीं टकराता है और यही चीज हमें भी ध्यान रखनी होगी। हमें आर्थिक रूप से कूटनीतिक रूप से सैनिक रूप से शक्तिशाली होना होगा और जैसा कि देश के रक्षा मंत्री महोदय का ही कथन है कि शांति का वटवृक्ष शक्ति के जड़ों पर खड़ा होता है यह बिल्कुल सत्य है। इसलिए यह कर्तव्य है हम सब भारतवासियों का कि हम सब देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए एक साथ मिलकर प्रयास करें।
बाल गोविन्द साहू – कानपुर

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