सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली वक्फ बोर्ड के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एक परिसर का इस्तेमाल गुरुद्वारे के तौर पर किया जा रहा है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने वक्फ बोर्ड की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उसने 2010 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उसकी याचिका खारिज करने के फैसले के खिलाफ अपील की थी। जस्टिस शर्मा ने कहा कि बोर्ड को खुद ही अपना दावा छोड़ देना चाहिए था। हालांकि, बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कहा कि निचली अदालतों ने माना था कि वहां मस्जिद थी लेकिन अब वहां किसी तरह का गुरुद्वारा है।
हाई कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी 1947-48 से इस संपत्ति पर काबिज था। यह भी सच है कि प्रतिवादी इस संपत्ति की खरीद के सबूत के तौर पर कोई भी मालिकाना हक का दस्तावेज पेश नहीं कर पाया, फिर भी यह किसी भी तरह से वादी को लाभ नहीं पहुंचाता, जिसे अपना मामला खुद ही स्थापित करना है और कब्जे का आदेश प्राप्त करने के लिए इसे साबित करना है।
