नून नदी संरक्षण से होगा ग्राम विकास और महिला सशक्तिकरण : सीडीओ

  • स्वयं सहायता समूह की 60 महिलाओं को दिलाया जाएगा कमल की खेती का प्रशिक्षण
कानपुर। मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने ग्राम पंचायत रामपुर नरूआ, विकास खंड शिवराजपुर में नून नदी के उद्गम स्थल चढ़ारी तालाब का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कमल की खेती हेतु प्रशिक्षित चार स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद किया।
महिलाओं ने बताया कि कमल की खेती के जरिए स्थानीय महिलाओं को स्वावलंबन की दिशा में एक नया अवसर मिला है। साथ ही, नून नदी के परिक्षेत्र में चिन्हित स्थलों को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किए जाने की संभावना पर भी विचार किया गया। संबंधित ग्राम प्रधानों को इस संबंध में आवश्यक सुझाव दिए गए, जिससे नून नदी का यह अंचल एक समृद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर सके।
सीडीओ को यह भी अवगत कराया गया कि नून नदी के किनारे ग्राम पंचायत की भूमि पर शान्त्योदय लोक कल्याण सेवा समिति द्वारा एक “स्वास्तिक पार्क” का निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही जिस स्थान से नदी के पुनर्जीवन का कार्य आरंभ हुआ था, वहां नून नदी के ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ा एक डैशबोर्ड भी स्थापित किया जाएगा।
यह उल्लेखनीय है कि नून नदी के जीर्णोद्धार कार्यक्रम से पूर्व रामपुर नरूआ तथा आस-पास के ग्रामों में कोई भी स्वयं सहायता समूह सक्रिय नहीं था। परंतु इस नदी के पुनर्जीवन के दौरान, एनजीओ के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें समूहों के रूप में जोड़ा गया और इन्हीं समूहों ने श्रमदान कर नदी के पुनर्जीवन में भागीदारी निभाई।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया तथा अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग को नून नदी का अंतिम ड्रोन सर्वे कराए जाने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने बताया कि कमल की खेती से बनने वाले उत्पादों के निर्माण हेतु विस्तृत कार्ययोजना नाबार्ड को प्रेषित की जा चुकी है।
शिवराजपुर विकास खंड की तीन ग्राम पंचायतों तथा नदीहा बुजुर्ग, नदीहा खुर्द एवं रामपुर नरूआ में संचालित पाँच स्वयं सहायता समूहों की लगभग 60 महिलाओं को कमल की खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अगले सप्ताह रामपुर नरूआ और नदीहा बुजुर्ग में स्थित तालाबों में कमल के बीजों की बुआई की जाएगी। प्रशिक्षित महिलाओं को उत्पाद निर्माण हेतु आवश्यक मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस अभिनव योजना में जय सिंह गौरी महिला समूह, शिव महिला समूह, जय ब्रजदेव और जय माता दी स्वयं सहायता समूह भागीदारी कर रहे हैं। साथ ही, नून नदी से निकाली गई जलकुंभी के उपयोग से जैविक खाद बनाने की दिशा में भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे कृषकों को टिकाऊ खेती में लाभ मिल सके।
सीडीओ ने कहा कि नून नदी के संरक्षण से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए स्त्रोत मिल रहे है। यह प्रयास न केवल जल स्रोतों की रक्षा कर रहा है, बल्कि ग्राम स्वावलंबन, जैविक कृषि और महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण भी बन रहा है।

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