केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को वन नेशन वन इलेक्शन को मंजूरी दे दी है. सूत्रों के मुताबिक, संसद में जारी शीतकालीन सत्र में बिल पेश किया जा सकता है.अगर वन नेशन वन इलेक्शन बिल लोकसभा और राज्यसभा में पास हुआ तो लोकसभा और विधानसभा चुनावों के एक साथ कराए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा.
केंद्र सरकार का यह कदम उन रिपोर्टों के कुछ दिनों बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि एनडीए सरकार इस बिल को या तो मौजूदा शीतकालीन सत्र में या अगले साल के बजट सत्र में पेश कर सकती है. कांग्रेस पहले ही इस विधेयक का विरोध कर चुकी है और इंडिया ब्लॉक की पार्टियों के भी इस विधेयक का विरोध करने में एकजुट रहने की संभावना है.
एनडीए को यह बिल पास करवाने के लिए 2/3 बहुमत की जरूरत पड़ेगी. लेकिन एक समस्या यह है कि भाजपा इसे अपने पक्ष में मोड़ सकती है. 2/3 नियम का सीधा सा मतलब है – मतदान के दिन सदन में 2/3 सांसद मौजूद हों. उदाहरण के लिए, लोकसभा में, अगर मतदान के दौरान 543 में से केवल 400 सदस्य ही मौजूद हों, तो जरूरी बहुमत 268 होगा (400 का दो-तिहाई प्लस एक के रूप में कैलकुलेशन की जाती है).
यही बात राज्य सभा पर भी लागू होती है. अगर चर्चा और मतदान के दौरान कुछ विपक्षी दल वॉकआउट करते हैं, तो सदन की संख्या के हिसाब से 2/3 बहुमत का आंकड़ा नीचे आ जाएगा.
