मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और युद्धे के हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। देश की ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने के लिए PM मोदी कल शाम 6:30 बजे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक अहम बैठक करेंगे।
बताया जा रहा है कि इस चर्चा में ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बिठाने की बात की जा सकती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का असर आम जनता पर कम से कम पड़े।
इससे पहले PM मोदी ने 24 मार्च को राज्यसभा में कहा था कि ईरान जंग जारी रही तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। आने वाला समय कोरोनाकाल जैसी परीक्षा वाला होगा। केंद्र और राज्य को मिलकर काम करना होगा।
हालांकि, आदर्श आचार संहिता या मॉडल ऑफ कंडक्ट लागू होने के कारण जिन राज्यों में वर्तमान में चुनाव होने वाले हैं, वहां के मुख्यमंत्री इस बैठक का हिस्सा नहीं होंगे। लेकिन, बताया जा रहा है कि प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उन राज्यों के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) के साथ कैबिनेट सचिवालय एक अलग बैठक करेगा। ताकि, चुनावी राज्यों में भी सुरक्षा और आपूर्ति संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से हो।
इस उच्च स्तरीय बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा कच्चे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर मंडराता खतरा है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, इसलिए सरकार राज्यों के साथ मिलकर ईंधन की उपलब्धता और कीमतों को स्थिर रखने की रणनीति बनाएगी। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से जरूरी सामानों की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को रोकने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
इससे पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी इस मुद्दे पर व्यापक सहमति दिखी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार, विपक्षी दलों ने सरकार के अब तक के प्रयासों, विशेषकर होर्मुज स्ट्रेट से पेट्रोलियम जहाजों को सुरक्षित लाने की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है। सभी दलों ने एकजुट होकर माना है कि ऐसे वैश्विक संकट के समय देश को एक साथ खड़ा होना जरूरी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और राज्यों के साथ मिलकर भविष्य की योजनाएं बना रही है।
