भगवान शिव का मज़ाक उड़ाने वाले व्यक्ति की याचिका खारिज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर भगवान शिव का मज़ाक उड़ाने वाले ओवैस खान नामक व्यक्ति की याचिका शुक्रवार को खारिज करते हुए कहा कि यह कृत्य न केवल भावनात्मक ठेस पहुंचाता है, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक समाज के मूलभूत मूल्यों को भी कमजोर करता है।

अदालत ने कहा कि इस बात का स्पष्ट संदेश भेजना न्यायपालिका के लिए आवश्यक है कि इस तरह के कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खान ने अपने खिलाफ दाखिल आरोप पत्र को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी, जिसे खारिज करते हुए न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने कहा, “एक लोकतांत्रिक देश में जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बहुत सम्मान दिया जाता है, यह समझना आवश्यक हो जाता है कि यह स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है, बल्कि इसके साथ जिम्मेदारियां भी हैं जहां दूसरों की भावनाओं और आस्था का सम्मान करना सबसे जरूरी है।”

अदालत ने कहा, “हमारे संविधान में प्रतिस्थापित धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत, विविध आस्था और पहचान रखने वाले लोगों के बीच पारस्परिक समझ और स्वीकार्यता के वातावरण का महत्व रेखांकित करता है। हमारे देश का धर्मनिरपेक्ष ताना बाना लोगों से मांग करता है कि वे ऐसे कार्य से बचें जिनसे किसी धार्मिक समुदाय को नुकसान हो।”

भारत के संविधान के अनुच्छेद 51ए पर जोर देते हुए अदालत ने कहा, “यह हर नागरिक का मौलिक दायित्व है कि वह देश के सभी लोगों के बीच सौहार्द और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दे।

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