सर्पदंश से घबराएं नहीं, समय पर उपचार से बचाई जा सकती है जान : डीएम

  1. शासन ने दी चार लाख रुपये की सहायता राशि
कानपुर। मानसून के दौरान सर्पदंश यानी साँप के काटने की घटनाएं आम हो जाती हैं। कई बार समय पर उपचार न मिलने के कारण जान का जोखिम भी उत्पन्न हो जाता है। सर्पदंश को शासन ने दैवी आपदा की श्रेणी में रखा है और इससे निपटने के लिए जिले में समुचित तैयारियाँ की गई हैं।
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने जनपदवासियों से अपील की है कि ऐसी किसी भी स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल निकटतम सीएचसी, पीएचसी या जिला अस्पताल में पहुँचे। इन अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है और समय से उपचार मिलने पर जीवन बचाना संभव है।
यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में सर्पदंश से मृत्यु हो जाती है, तो शासन द्वारा मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके लिए संबंधित तहसील में आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के साथ चिकित्सकीय अभिलेख (जिसमें सर्पदंश स्पष्ट रूप से अंकित हो) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट लगाना अनिवार्य है। किसी अन्य जानकारी अथवा मार्गदर्शन के लिए कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है।
घाटमपुर में सर्पदंश की घटना में दी गई आर्थिक सहायता
ग्राम इच्छौली, तहसील घाटमपुर निवासी स्वर्गीय रविप्रकाश पुत्र बृजलाल, जो थाना रेवना में पी.आर.डी. होमगार्ड के रूप में कार्यरत थे, ड्यूटी समाप्त कर घर लौटे थे। उसी रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों द्वारा उन्हें उपचार हेतु हैलट अस्पताल लाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उनकी मृत्यु  सर्पदंश के कारण हुई है। इस प्रकरण को दैवीय आपदा के अंतर्गत मानते हुए शासनादेश के अनुसार चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता मृतक की पत्नी सुष्मिता सेन के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी गई है।

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