वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो नागरिकता खत्म नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फिर दोहराया है कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है। आयोग का अधिकार केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक सीमित है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून की स्थिति में इसे लेकर रत्ती भर भी भ्रम नहीं होना चाहिए।

पश्चिम बंगाल के Special Intensive Revision ( SIR) के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बाते कही। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग (Election Commission) का अधिकार केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक ही सीमित है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, अगर कोई ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति का नाम SIR सूची में शामिल न करने का फैसला देता है, तो चुनाव आयोग को नागरिकता निर्धारण के लिए मामला संबंधित मंत्रालय को भेजना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने या वोटर आईडी न होने का यह मतलब नहीं है कि उस व्यक्ति की भारतीय नागरिकता खत्म हो गई है। मतदाता सूची से नाम काटे जाने से नागरिकता अपने आप समाप्त नहीं होती है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के SIR के तहत विधानसभा क्षेत्र-वार जानकारी मांगने वाली एक PIL पर सुनवाई करते हुए यह बाते कहीं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाए गए कई लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), अन्नपूर्णा योजना और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जा रहा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने आज याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक इस प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई है और इसे जारी रखने दिया है। यह फैसला उन हजारों लोगों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जिन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए जाने का डर सताता था।

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