अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का खुलासा किसने किया .! अखिलेश यादव इसका श्रेय लेना तो चाहते है पर कई लोग यह भी कह रहे की इसकी प्लानिंग बहुत पहले से कुछ लोगो द्वारा बहुत दिनों से कराई जा रही थी ताकि सरकार को घेरा जा सके। विपक्ष का कोई नेता जो कभी राम मंदिर नहीं गया वो ऐसे मुद्दों पर खुलकर बैटिंग कर रहा मतलब दाल में कुछ काला है। फिलहाल चम्पत राय और अनिल मिश्रा के इस्तिफे ने विपक्ष को नो बॉल का फ्री हिट नहीं लेने दिया है। हालांकि अब लोग विपक्ष से पूछ रहे कि कौन से विश्वनीय सूत्र थे जिससे उन्हें पता लगा कि चोरी हुई है क्यूंकि अवधेश प्रसाद वहां से सपा चेहरा है जिनका एजेंडा ही सरकार को फ़साना रहा है।
सूत्रों के अनुसार सोने चांदी के आभूषण ईंट, काकभासुंडी सब चीजे बरामद हो गई हैं। रुपया गया है, उसमें 2 यादव और 6 ब्राह्मण कर्मचारी दोषी पाए गए हैं। चंपत राय पर आरोप सिद्ध हुए नहीं हुए पर नैतिकता के तहत उन्होंने इस्तीफा सौप दिया है ताकि आगे की जाँच में सहयोग हो सकें । आखिर ये सब हुआ क्यों ! चुनाव के साल में ही चोरी का खुलासा क्यों हुआ ! यह क़ाम तो सालों से हो रही होगी जब इतना धन इकट्ठा कर लिया चोरों ने हवेलियां बनवा ली तो पहले नजर क्यों नही गई अखिलेश यादव की ! ये सब राजनीतिक कारणों से हो रहा है यह कहना अतिश्योक्ति नहीं पर चोरी गुनाह है और यह भक्तों के साथ कपट है। इस सब में एक दिक्कत ये है कि ऊपरी दबाव के चलते शायद योगी जी सख्त कार्यवाही नहीं करवा पा रहे हैं। लगता है लंका और लंका के वाशिंदे अयोध्या में आ चुके है। सबके एक साथ राम क्रोध में भस्म होने का समय आ गया है।
राम मंदिर से जुड़े कथित डकैती चोरी मामले में 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में एसआईटी की सिफारिश के बाद रामजन्मभूमि कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई है। अब तक मामले की जांच एसआईटी कर रही थी, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। राम मंदिर चंदा चोरी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने आठ लोगों को हिरासत में लिया है। इनके नाम रमाशंकर यादव टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमा शंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव, मनीष यादव हैं। जिन आरोपियों के पास से चंदे की रकम बरामद हुई, उनके नाम एफआईआर में दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने कुल 8 लोगों को हिरासत में लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिसके चलते आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ सकता है।
चोरी और भ्रस्टाचार में इस्तिफे नए नही है। पवन बंसल रेल मंत्री थे। उनके भतीजे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। कांग्रेस लीडरशिप ने इस्तीफा लेने में देर नहीं की पवन बंसल भी इसके बाद हाशिये पर चले गए।कोयला घोटाले का मुद्दा गरम था। अश्विनी कुमार कानून मंत्री थे। उन पर सीबीआई की जांच को प्रभावित करने का आरोप लगा। कांग्रेस जबकि सत्ता में थी लेकिन कोई रियायत नहीं दी गई। अश्वनी कुमार को इस्तीफा देना पड़ा । सवाल यह है कि क्या जांच सिर्फ़ छोटी मछलियों तक सीमित रहेगी, या फिर बड़ी मछलियों तक भी पहुंचेगी ? एमपी में मोहन यादव पर जमीन घोटाले का आरोप लगा है जिसका अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। क्या मोहन यादव इस्तीफा देंगे ! या भाजपा इस बार एमपी का चुनाव गवा देगी मोहन यादव को बचाने में। देश ने हमेशा देखा है कि जब कोई बड़ा मामला सामने आता है तो जाल में अक्सर छोटी मछलियाँ फंस जाती हैं, जबकि असली शार्क और व्हेल गहरे समुद्र में आराम से तैरती रहती हैं।
अगर वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है तो जनता यह जानना चाहती है कि: जिम्मेदारी की आख़िरी कड़ी तक जांच होगी या नहीं ? फैसले लेने वाले लोगों से भी सवाल पूछे जाएंगे या नहीं ? क्या सिर्फ़ कुछ नामों पर कार्रवाई करके पूरा मामला बंद कर दिया जाएगा ? न्याय का मतलब सिर्फ़ किसी को पकड़ लेना नहीं होता। न्याय का मतलब है कि सबसे छोटे कर्मचारी से लेकर सबसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति तक, सभी की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। क्योंकि अगर जाल में केवल छोटी मछलियाँ फंसें और बड़ी मछलियाँ बच निकलें, तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए देश की मांग सिर्फ़ कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे सच का खुलासा है। छोटी मछलियों को पकड़कर तस्वीर खिंचवाना आसान है, असली परीक्षा तब है जब जाल शार्क और व्हेल तक पहुंचे। आपको याद दिला दूँ कारगिल युद्द में शहीद हुए सैनिकों और उनके परिवारों के लिये मुंबई में आदर्श सोसाइटी बनाई गई। अशोक चाह्वाण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे।
आरोप लगे कि फ्लैट आवंटन में घोटाला, कांग्रेस ने सिर्फ चाह्वाण का इस्तीफा नहीं लिया बल्कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच भी करवाई। अशोक चाह्वाण कोई छोटे-मोटे नेता नहीं थे. महाराष्ट्र जैसे बडे़ और अहम राज्य के मुख्यमंत्री थे। अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के खिलाफ सीबीआई जांच कराने का दुस्साहस मनमोहन सिंह जैसा प्रधानमंत्री और कांग्रेस जैसा राजनीतिक दल ही कर सकता है। राम मंदिर डकैती अभियान में छोटे-छोटे डकैत और बड़े- बड़े चोर तो पकड़ में आ जाएंगे।चंपत राय भतीजा चंदन राय, ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का भतीजा सोमेश आनंद और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्र के दो रिश्तेदारों की चढ़ावे की चोरी तो अंततः आंशिक रूप से पकड़ में आ जाएगी।
कुछ माल बरामद भी हुआ बताते हैं मगर जो बड़े पेट वाले चोर-डकैत सोने-चांदी, हीरे- माणिक्य की 1250 शिलाएं उड़ा ले गए,सिंधी समाज द्वारा भेंट 200 किलो की चांदी की 200 की ईंटें जीम गए ,जो चांदी के कागभुशुण्डि की प्रतिमा का भोग लगा गए ,वे कौन हैं और कहां हैं?उनके नाम कब उजागर होंगे ? चंपत राय ही बता सकते हैं कि उनकी मदद से किसने क्या-क्या चंपत किया है और वह कहां- कहां पहुंचा है मगर चंपत जी ‘निष्ठावान’ संघी हैं। वे अपनी ‘निष्ठा’ के साथ ‘धोखा ‘ नहीं कर सकते । निश्चय ही ऐसे बड़े पेट के चोर- डाकू अयोध्या में तो बैठे नहीं होंगे। कहीं और होंगे। कहां हैं दिल्ली में या लखनऊ में या अहमदाबाद में या कहीं और ? जब तक इन चोरों पर चोट नहीं होती और होगी भी नहीं, तब तक सब लीपापोती है। जांच उत्तर प्रदेश की एसआईटी करे या सीबीआई, उन चोरों- डकैतों पर कोई ऊंगली नहीं रख सकता ।
मामला हिंदू राष्ट्र से जुड़ा है। यह राशि हिंदू राष्ट्र के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए सुरक्षित रखी जानी थी । उसमें जो चढ़ावा आएगा, फिर उसकी चोरी होगी और वह राममंदिर मामले से कई-कई गुना बड़ी होगी । हिंदू राष्ट्र नहीं बन पा रहा क्यूकि पक्ष चोर तो विपक्ष गद्दार है। कुछ समय के बाद चोरी- डकैती शब्द हिंदी शब्दकोश से गायब हो जाएंगे। आश्चर्य नहीं कि जयश्री राम शब्द का भी उसी के साथ जयश्री राम हो जाए! चोरी नेताओं के डीएनए में है। यहां उन मंत्रियों के नाम नहीं लिख रहा हूं जिनको यूपीए के दौर में किसी घोटाले में नाम आने की वजह से इस्तीफा देना पड़ा था। सिर्फ उनका जिक्र कर रहा हूं जिनको विवाद की वजह से मंत्री पद गंवाना पड़ा पर मोहन यादव और धर्मेंद्र प्रधान अब भी डटे हुए है।

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी
