जिलाधिकारी सुन लेंगे मेरी बात, इसी भरोसे 18 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंची महिला संपूर्ण समाधान दिवस

  • सुनवाई खत्म होने के बाद भी सुनी फरियाद, शाम तक महिला के घर पहुंचा प्रशासन
कानपुर। शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस की सुनवाई समाप्त हो चुकी थी। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह अपनी गाड़ी की ओर बढ़ रहे थे। तभी एक महिला घबराई हुई उनके पास पहुंची और अपनी समस्या बताने लगी। उसने बताया कि उसका राशन कार्ड नहीं है और सास के नाम बने अंत्योदय राशन कार्ड का हस्तांतरण भी नहीं हो पा रहा है। जिलाधिकारी ने आवेदन पत्र मांगा तो महिला ने बताया कि वह जल्दबाजी में प्रार्थना पत्र भी नहीं लिख पाई। रिंकी मिश्रा ने बताया कि उसकी समस्याओं को देखते हुए गांव के लोगों और शुभचिंतकों ने उसे सलाह दी थी कि वह जिलाधिकारी से मिले। उसकी एक ही बात थी, डीएम साहब मेरी बात सुन लेंगे। इसी भरोसे वह तहसील नरवल क्षेत्र के ग्राम बीर सिंहपुर से करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर घाटमपुर तहसील पहुंची थी।
महिला की बात सुनने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह को उसी दिन मौके पर पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। प्रशासन की टीम शाम तक महिला के घर पहुंच गई।
कच्ची दीवारों और जर्जर टीन की छत वाले घर में रह रहे परिवार के पास बिजली जाने पर रोशनी की समुचित व्यवस्था भी नहीं थी। जांच में सामने आया कि महिला का राशन कार्ड नहीं बना था, जबकि सास के नाम बने अंत्योदय राशन कार्ड का हस्तांतरण लंबे समय से लंबित था।
महिला रिंकी मिश्रा (41) की सबसे बड़ी चिंता उसकी दोनों बेटियां हैं। बड़ी बेटी 17 वर्ष की है, जो पूर्णतः दिव्यांग है और उसे निरंतर देखभाल की जरूरत है। वहीं 15 वर्षीय दीक्षा ने अभावों के बीच भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। रिंकी मिश्रा के पति राजीव मिश्रा की लगभग 10 वर्ष पूर्व आकस्मिक मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से पूरा परिवार कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहा है। दीक्षा ने कक्षा छह की परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। अधिकारियों के पहुंचने पर परिवार की स्थिति बताते बताते महिला भावुक हो उठी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी अबिचल प्रताप सिंह ने तत्काल राहत के रूप में राशन, रसोई का आवश्यक सामान, सब्जियां, फल, मिठाई, बिस्किट सहित अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई। इसके साथ ही परिवार को पांच हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।
मौके की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने महिला की विधवा पेंशन स्वीकृत कराने, सास के नाम बने अंत्योदय राशन कार्ड का नियमानुसार हस्तांतरण कराने तथा परिवार को अन्य पात्र सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से समयबद्ध रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही बीएसए को निर्देशित किया कि दीक्षा की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण प्रभावित न होने पाए। यदि नियमानुसार संभव हो तो उसके अध्ययनरत निजी विद्यालय से समन्वय कर फीस में आवश्यक राहत दिलाने अथवा अन्य उपयुक्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त परिवार की दिव्यांग बेटी का दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया भी शुरू करा दी गई है, जिससे उसे शासन की ओर से अनुमन्य सभी दिव्यांगजन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा सके।

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