हरनी गांव में मकान गिरने से हुई दुखद घटना के दृष्टिगत डीएम ने घटनास्थल का किया भ्रमण

  • शोकाकुल परिजनों से भेंट कर उन्हें दी सांत्वना
कानपुर। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने घाटमपुर तहसील क्षेत्र के हरनी गांव में मकान गिरने से हुई अत्यंत दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दृष्टिगत घटनास्थल का भ्रमण किया। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी।
जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करते हुए शोक-संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। इस हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों—मुकेश कुमार पुत्र दारा सिंह (45 वर्ष) तथा उनकी तीन पुत्रियों माया (17 वर्ष), नीतू (सात वर्ष) और पल्लवी (पांच वर्ष) की असामयिक मृत्यु हुई है। वहीं, उनकी पुत्री काजल (लगभग 20 वर्ष) घायल हैं और कानपुर नगर स्थित एक निजी हॉस्पिटल में चिकित्सारत हैं।
जिलाधिकारी ने हॉस्पिटल पहुंचकर काजल के स्वास्थ्य की जानकारी ली। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति स्थिर है। जिलाधिकारी ने परिजनों को उनके समुचित उपचार एवं हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि मृतकों के परिजन को कुल 16 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त आवास निर्माण के लिए भी नियमानुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी। परिजनों एवं ग्रामीणों से प्राप्त फीडबैक का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पतारा के समस्त स्टाफ को बदलने के निर्देश दिए हैं।
परिजनों एवं ग्रामीणों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध न होने तथा घायलों के उपचार में विलंब होने संबंधी शिकायत जिलाधिकारी के संज्ञान में लाई गई। जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी घाटमपुर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें डिप्टी सीएमओ एवं एसीपी घाटमपुर को सदस्य बनाया गया है।
जांच समिति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घायलों के उपचार के लिए उपलब्ध चिकित्सकीय व्यवस्थाओं, घटना के समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों एवं अन्य कार्मिकों की उपस्थिति तथा उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही बरते जाने के आरोपों की जांच करेगी। जांच में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
साथ ही जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि वर्षा के बाद धूप निकलने का समय जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। ऐसे भवनों में निवास न करें और पूरी सतर्कता बरतें। किसी भवन के असुरक्षित होने की आशंका पर तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचित करें तथा मौसम सामान्य होने तक सुरक्षित स्थान पर रहें।

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