भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव – इति श्री आत्मकथा जलनखोर एडमिन की 

मेरा ख़ुद का कोई ग्रुप नहीं जलनखोर हूं 
दोस्तों व समाज की खैरात पर एडमिन हूं 
किसी की सफ़लता सहन नहीं कर पाता हूं 
जलनखोरी की बीमारी का मारा हूं 
ग्रुप में सफ़ल व्यक्ति को रिमूव करता हूं 
डेली सफ़लता के अध्याय सहन नहीं करता हूं 
दूसरे एडमनों को भी खिलाफ़ भड़काता हूं 
जलनखोरी की बीमारी का मारा हूं 
समाज सेवा में खैरात में अध्यक्ष हूं 
अन्य संस्थाओं में भी जबरदस्ती एंट्री पाया हूं 
एंकरिंग में असफ़लता के झंडे गाड़ा हूं 
जलनखोरी की बीमारी का मारा हूं 
अन्य ग्रुप में भी सफ़लों पर जलनखोरी  हूं 
रिमूव कर दूं पर मजबूर हूं उसमें एडमिन नहीं हूं 
हर पोस्ट पर एतराज उठता हूं 
जलनखोरी की बीमारी का मारा हूं 
जलनखोरी बीमारी से सबके निशाने पर हूं 
जितनी जलन करता हूं उतना पीछे हो जाता हूं 
समाज में अग्रणी बनना चाहता हूं 
जलनखोरी की बीमारी का मारा हूं 
कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय  लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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