बीपीएस न्यूज़, ब्यूरो
कानपुर। शहर में हाल ही में उजागर हुए मानवता को शर्मसार करने वाले ‘किडनी कांड’ ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुद्दे पर अब राजनीति और जन-अधिकार की लड़ाई तेज हो गई है। आदर्श संग्राम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम भारती एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता व मीडिया प्रभारी जे. ए. खान ने संयुक्त रूप से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कानपुर से सीधी जवाबदेही मांगते हुए आरटीआई (RTI) दाखिल की है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम भारती – राष्ट्रीय प्रवक्ता जे. ए. खान
भ्रष्टाचार और अवैध सिंडिकेट पर तीखे सवाल
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम भारती ने कहा कि कानपुर के अस्पतालों में गरीबों के अंगों का सौदा चंद रुपयों की खातिर हो रहा है और प्रशासन मौन है। आरटीआई के माध्यम से पार्टी ने पूछा है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग के पास उन अवैध अस्पतालों और ट्रांसप्लांट केंद्रों की कोई ठोस निगरानी रिपोर्ट क्यों नहीं है, जहाँ नियमों को ताक पर रखकर मौत का खेल खेला जा रहा है?
सुरक्षा मानकों (एनबीसी व फायर) की अनदेखी पर प्रहार
राष्ट्रीय प्रवक्ता जे. ए. खान ने कड़े लहजे में प्रशासन से सवाल किया कि कानपुर के कितने अस्पताल नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) और फायर सेफ्टी के मानकों को पूरा करते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के अधिकांश अस्पताल ‘मौत के तहखाने’ बन चुके हैं, जहाँ न तो आग से बचने के पुख्ता इंतज़ाम हैं और न ही आपातकालीन निकास। उन्होंने आरटीआई के जरिए उन सभी अस्पतालों की सूची मांगी है जिनके पास वैध ‘फायर एनओसी’ नहीं है।
जवाबदेही और सुधार की मांग
आदर्श संग्राम पार्टी ने सीएमओ से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है:
निगरानी तंत्र: अस्पताल पंजीकरण के बाद विभाग ने कितनी बार औचक निरीक्षण किया?
गुणवत्तापरक इलाज: आम जनता को निजी अस्पतालों के आर्थिक शोषण से बचाने के लिए विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
कानूनी कार्रवाई: किडनी कांड में लिप्त अस्पतालों का पंजीकरण अब तक रद्द क्यों नहीं किया गया?
जनहित में आंदोलन की चेतावनी
पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 30 दिनों के भीतर तथ्यों के साथ जवाब नहीं मिलता और धरातल पर सुधार नहीं दिखता, तो आदर्श संग्राम पार्टी कानपुर की सड़कों पर उतरकर उग्र जन-आंदोलन के लिए बाध्य होगी। पार्टी का लक्ष्य केवल सवाल पूछना नहीं, बल्कि कानपुर की जनता को सुरक्षित और पारदर्शी स्वास्थ्य व्यवस्था मुहैया कराना है।
