पश्चिम बंगाल को पश्चिम बांग्लादेश बनाने की साजिश…!

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्रियों की संलिप्तता की आशंका और  हवाला के जरिए कोलकाता से आईपीएसी के गोवा ऑफिस पहुंचे थे 20 करोड़, जहां ममता बनर्जी के करीबी कहे जाने वाले प्रतीक जैन नें घुमाया है काला धन, ईडी द्वारा जब इसका सनसनीखेज दावा किया गया तो  कूद पड़ी बेईमानी वो तो कट्टर वाली रानी थी, जी हाँ इकहत्तर वर्ष की आयु में ममता बनर्जी काला धन  ईमानदारी से बचाने के लिए ईडी से भीड़ गई। ममता का इंटेंशन एक दम प्राकृतिक रूप से काले हैं ! जिस व्यक्ति में, विचारों की अशुद्धता हो, वह अपने देश के देशप्रेम और हिन्दुराष्ट्र की परिकल्पना से ओतप्रोत हो यह जरुरी नहीं। तो कहना यह कि बेईमान को मानसिक और भौतिक सौंदर्य की आवश्कता नहीं, ऐसे ही उभर कर सामने आता है।ममता जी के 15 वर्ष का राज्य पश्चिम बंगाल को पश्चिम बांग्लादेश बनाने में महत्वपूर्ण रहा।
वहां व्यंग्यात्मक भाषा में कहें तो सनातनी हिंदुओं की प्रतिष्ठा और संख्या में असीम वृद्धि हुई है, पूरे प.बंगाल में मंन्दिरों का जाल सा बिछ गया है, हिन्दू स्त्रियों की इज़्ज़त औऱ उनकी सुरक्षा का बेहद ध्यान रखा जाता है, प.बंगाल में  अराजकता अब नामो निशान का नहीं। प.बंगाल की खूबसूरती यह भी है,देश भर घुसपैठियों की बहार हो,मगर प.बंगाल में कोई बंगलादेशी या रोहिंग्या शायद ढूढने पर ही मिले ! ममता बनर्जी सरकार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि केंद्र सरकार के साथ उनके रिश्ते सदैव उच्च स्तर के रहे हैं। कुल मिलाकर प. बंगाल एक आदर्श और सुखी राज्य है बस प्रवर्तन निदेशालय बनाम ममता बनर्जी का मैच अक्सर देखने को मिलता है जो गजब होता है। कभी सीबीआई से टक्कर तो कभी ईडी से सीधे फाइनल।
कलकत्ता हाई कोर्ट में बुधवार, 14 जनवरी को कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई -पीएसी  से जुड़े  ईडी के छापे मामले की सुनवाई हो रही है। इस मामले में केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी। पिछली तारीख यानी 9 जनवरी को अदालत में अफरा-तफरी और भीड़भाड़ के कारण सुनवाई नहीं हो पाई थी। उसके बाद जस्टिस शुभ्रा घोष ने आज की तारीख मुकर्रर की थी। सुनवाई के दौरान ईडी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आई पीएसी  के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर हो रही छापेमारी के दरम्यान नाटकीय तौर पर एंट्री की थी और सरकारी काम में बाधा डाला। ईडी  ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रेड वाली जगहों पर गईं और अहम सबूत ले गईं। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी की तरफ से दावा किया गया कि ईडी के छापे अवैध थे और जांच एजेंसी ने सारी सीमएं लांघ दी थी।
इस दौरान तृणमूल कांग्रेस ने ईडी द्वारा जब्त किये गये चुनाव संबंधी उसके डाटा की सुरक्षा के लिए अदालत से अनुरोध किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल  एस वी राजू ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की हैं। इसलिए हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई न करे। उन्होंने दलील दी, “यह मामला सुप्रीम कोर्ट में आ सकता है। लिहाजा, इस मामले की सुनवाई को टाल दिया जाय। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रतिक जैन  की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म को कोर्ट में पेश होना चाहिए था। उन्होंने कहा, “पूरी याचिका चुनाव से जुड़े तर्कों पर आधारित है, न कि किसी अधिकार के उल्लंघन पर। किसी के घर से किसी का डेटा ज़ब्त किया गया है, उन्हें तो कोर्ट आना चाहिए था।
जानिए क्या है मामला ?
बता दें कि 8 जनवरी को कोलकाता में आईपीएसी के निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान, तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ईडी के तलाशी अभियान स्थलों पर पहुंच गई थीं और आरोप लगाया कि निदेशालय के जांचकर्ता कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के संवेदनशील डेटा को जब्त करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बनर्जी पर मौके से दस्तावेज हटाने का भी आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस और ईडी दोनों ने छापेमारी को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। तृणमूल कांग्रेस ने एजेंसी को तलाशी अभियान के दौरान जब्त किए गए आंकड़ों के “पूर्वाग्रह, दुरुपयोग और प्रसार” से रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की, जबकि ईडी ने अपनी जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए आठ जनवरी की घटनाओं की जांच सीबीआई को सौंपने की प्रार्थना की थी।

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