रक्षा क्षेत्र में भारत प्राप्त कर रहा आत्मनिर्भरता

बाल गोविन्द साहू
पिछले दिनों भारत के रक्षा क्षेत्र से एक बहुत ही बड़ी खुशखबरी निकल करके सामने आई भारत ने अरिहंत श्रेणी की अपनी दूसरी परमाणु संचालित पनडुब्बी अरिघाट का सफलतापूर्वक समुद्र में लॉन्च किया अरिघाट अरिहंत श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी है जो की परमाणु ईंधन चालित होगी इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अधिक समय तक समुद्र में गहराइयों में रह सकती है क्योंकि परमाणु चालित पनडुब्बी के लिए जो ईंधन की आवश्यकता है वह परमाणु ईंधन से पूरी होती रहती है इसे सिर्फ अपने बेस पर सैनिकों के लिए जो राशन है उसको लेने के लिए ही आना पड़ता है इसके विपरीत जो पारंपरिक पनडुब्बियाँ हैं जो कि डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियाँ कहलाती हैं को संभवत दो दिनों के अंदर समुद्र के ऊपर आना पड़ता है जब यह दो दिनों के भीतर समुद्र के ऊपर आती हैं तो इनके जो ऑपरेशंस होते हैं उन ऑपरेशन में इनके पकड़े जाने की संभावना अधिक होती है जबकि यह जो परमाणु चालित पनडुब्बी है यह अधिक दिनों तक अधिक गहराई में रह सकती है और तेजी से आक्रमण करके फिर वापस छुप सकती है तो यह इन पनडुब्बियों की जो क्षमता है वह पारंपरिक पनडुब्बियों से ज्यादा है इसके अतिरिक्त जो परमाणु चालित पनडुब्बी हैं और जो डीजल इलेक्ट्रिकल पनडुब्बी हैं उनके कार्य भी अलग-अलग हैं डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की अपनी खासियत है l वर्तमान में देखा जाए तो जो चीन का भारत के सामने एक प्रकार से खतरा है उसको काउंटर करने के लिए भारत के पास परमाणु चालित पनडुब्बियों की संख्या लगभग 6 होनी चाहिये जो कि हमारे सामरिक विशेषज्ञ हैं उनके अनुसार होनी चाहिए हालांकि चीन के पास कुल मिलाकर के 66 पनडुब्बियों हैं लेकिन वर्तमान में भारत के पास कुल मिलाकर 14 पनडुब्बियों हैं जिसमें 12 पनडुब्बियाँ डीजल इलेक्ट्रिक है जबकि दो पनडुब्बियाँ परमाणु चालित हैं युद्ध के समय  पनडुब्बियों की जो आवश्यकता है वह अत्यधिक होती है क्योंकि जो हमारे बड़े-बड़े जहाज हैं डिस्ट्रेयर हैं वह समुद्र में दूर से दिखाई पड़ जाते हैं जबकि पनडुब्बियाँ चुपके  से वार करती हैं पनडुब्बियों के आविष्कार की बात की जाए तो जर्मनी ने इसका आविष्कार किया था हिटलर के समय में इसके बाद अन्य देश जिसमें ब्रिटेन और अमेरिका ने भी इस और अपने कदम बढ़ाए भारत चाहता है कि हिंद महासागर क्षेत्र और प्रशांत महासागर क्षेत्र में वह अपनी उपयोगिता बनाए रखें इसके लिए उसे निगरानी के लिए तथा अन्य कार्यों के लिए पनडुब्बियों की आवश्यकता है जबकि चीन पूरे विश्व को लक्ष्य में लेकर चलता है और इसके लिए वह अपने पास पनडुब्बियों की अधिक से अधिक संख्या एकत्रित कर रहा है भारत सरकार की अरिघाट नामक जो है पनडुब्बी है इसे भारतीय इंजीनियरों और भारतीय संस्थानों द्वारा बनाया गया है जिसमें की भारतीय टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है और यह भारतीय हितों को  पूरा करने में सक्षम है इसके द्वारा वर्तमान भारत सरकार ने दो तरह के लक्ष्य हासिल किए हैं पहले जो हम हथियारों को खरीदने के लिए अपना धन है इस्तेमाल करते हैं तो उसे भी बचाने का कार्य किया है और इसके अलावा जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की जो परिकल्पना पूर्व में सरकार ने देखी थी उसको भी एक प्रकार से साकार करने का कार्य किया गया है।

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