एक बस ड्राइवर, जिसने फर्जी सर्टिफिकेट दिखाकर अपना लाइसेंस बनवाया, एक बाइकर जिसने नशे में बाइक चलाई, और एक ट्रैवल कंपनी जिसने बस की मरम्मत के दौरान नियमों का उल्लंघन किया—आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुए अग्निकांड के लिए जिम्मेदार हैं। मामले में हो रहे खुलासे इसी ओर इशारा कर रहे हैं। इस भयंकर हादसे में 20 लोगों की जान चली गई है। जैसे-जैसे जानकारी सामने आ रही है, इससे पता चल रहा है कि हमारे देश में सड़क सुरक्षा में मौजूद कमियां कितने खतरनाक हादसे की वजह बन सकती हैं।
इस भयावह दुर्घटना का शिकार हुई डबल-डेकर बस के ड्राइवर मिरियाला लक्ष्मैया को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने पाया है कि केवल 5वीं कक्षा तक पढ़े लक्ष्मैया ने फर्जी सर्टिफिकेट दिखाकर भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हासिल किया था। लाइसेंसिंग नियमों के अनुसार, किसी भी ड्राइवर को कम से कम 8वीं क्लास तक पढ़ा होना चाहिए। हालांकि, इन नियमों का अक्सर उल्लंघन किया जाता है, और लोग ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए नकली दस्तावेजों का उपयोग करते हैं।
कुरनूल हादसा कैसे हुआ
शुक्रवार देर रात, कुरनूल के चिन्ना टेकुरु के पास एक बाइक पर सवार दो व्यक्तियों का एक्सीडेंट हो गया। दोपहिया वाहन सड़क से फिसल गया और डिवाइडर से जा टकराया। बाइक चला रहे शिवा शंकर की दुर्घटना में मौत हो गई, जबकि पीछे बैठा व्यक्ति एरी स्वामी घायल हो गया। दुर्घटना के बाद, एरी स्वामी ने शिवा शंकर के शव को सड़क से हटाकर देखा कि वह मर चुका है। इससे पहले कि वह बाइक को सड़क से हटा पाता, एक बस उसे रौंदती हुई निकल गई। दोपहिया वाहन बस के नीचे घिसटता चला गया। घर्षण के कारण, कुछ देर बाद बाइक के फ्यूल टैंक में विस्फोट हो गया, जिससे डबल-डेकर बस में आग लग गई। 19 यात्री जिंदा जल गए, जबकि बाकी आपातकालीन खिड़की से बच निकलने में कामयाब रहे।
बाइकर ने शराब पी रखी थी
कुरनूल रेंज के DIG कोया प्रवीण ने मीडिया को बताया कि उन्हें फोरेंसिक पुष्टि मिली है कि बाइक पर सवार दोनों व्यक्ति—शंकर और स्वामी—ने शराब पी रखी थी। उन्होंने बताया कि दोनों ने उस रात एक ढाबे पर खाना खाया था, और स्वामी ने शराब पीने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने कहा कि वे रात लगभग 2 बजे घर के लिए निकले और शिवा शंकर की योजना स्वामी को घर छोड़ने की थी। वे एक पेट्रोल पंप पर रुके, जहां एक सीसीटीवी कैमरे में वे कैद हो गए। शंकर को पेट्रोल पंप से बाहर निकलते समय तेज गति से बाइक चलाते हुए देखा गया था।
हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वीसी सज्जनार ने कहा है कि नशे में गाड़ी चलाने वाले “आतंकवादी” हैं और यह एक “सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का एक आपराधिक कृत्य” था। शीर्ष पुलिस अधिकारी ने X पर पोस्ट किया, “नशे में गाड़ी चलाने वाले आतंकवादी हैं और उनके कृत्य हमारी सड़कों पर आतंक के कृत्यों से कम नहीं हैं। भयानक कुरनूल बस दुर्घटना, जिसमें 20 निर्दोष लोगों की जान चली गई, सही मायनों में एक दुर्घटना नहीं थी। यह एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी थी, जो एक नशे में धुत बाइकर के लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण हुई।” उन्होंने कहा कि हैदराबाद पुलिस नशे में गाड़ी चलाने वाले किसी भी व्यक्ति पर “कोई दया” नहीं दिखाएगी।
बस चालक क्यों है दोषी
कुरनूल पुलिस ने बताया कि इस लग्जरी बस के बाइक को कुचलने से पहले दो बसें शिवा शंकर की मोटरसाइकिल से बचकर निकल गई थीं। पुलिस अधिकारी ने कहा कि बाइक दुर्घटना के मामले में नशे में धुत बाइकर दोषी है। लेकिन बस ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही का मामला अभी भी खुला है क्योंकि वह सड़क पर obstruction को नहीं देख सका।
जांच बस के मालिक ट्रैवल कंपनी की भी गहन जांच कर रही है। इतने लोगों के मारे जाने के लिए कई कमियां जिम्मेदार थीं: स्लीपर कोच को गलत तरीके से बदला गया, सुरक्षा जांच से बचने के लिए संदिग्ध रूप से फिर से रजिस्टर कराया गया, और बचे हुए यात्रियों के बयान से पता चला कि खिड़की तोड़ने वाले हथौड़े बस में नहीं थे।
नियमों का उल्लंघन, यात्री अपने जोखिम पर यात्रा करते हैं
कुरनूल त्रासदी एक और याद दिलाती है कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली प्रक्रियाओं का नियमित रूप से कैसे उल्लंघन किया जाता है, जिससे यात्रियों को जोखिम में डाला जाता है। बिना ड्राइविंग टेस्ट दिए लाइसेंस प्राप्त करना भारत में आम है। नशे में ड्राइविंग सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का एक प्रमुख कारण बनी हुई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में नशे में ड्राइविंग के कारण 2,690 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1,442 लोगों की जान चली गई। लेकिन नियमित जागरूकता अभियानों के बावजूद, अधिकारी इस खतरे को रोकने में विफल रहे हैं।
