कभी सपा सरकार के समय आजम खां की भैस ढूढ़ कर लाई जाती थी और अब भैस गिरफ्तार की जाती है तब वालों का शासन , और अब वालों कर शासन, वक्त अब जरूर बदल गया है। पर क्या सचमुच उत्तर प्रदेश का नगर निगम प्रशासन और शासन, प्रदेश स्तरीय इंटेलीजेंस सिस्टम विकसित कर सकी है ? तो क्या अब भैसो को राष्ट्रीय स्लीपर सेल और स्थानीय अपराधियों की श्रेणी में रखा माना जाए और उनका गठजोड़ आईएसआई और मुजाहिद के तबेले के भैसो से मान कर उनकी गिरफ़्तारी हो ! क्या नगर निगम का इंटेलीजेंस, बाबा की बुलडोजर सरकार को मुंह नहीं चिढ़ा रहा ? योगी सरकार में नगर निगम का यह प्रशासनिक कारनामा साधारण नहीं है, यह बतलाता है कि इंटरनेशनल ब्रदरहुड वाले मासूमों को भी हरे पत्ते खाने पर जेल हो सकती है और भैंसिया मजहब की अपराधिक जड़ें काफी गहरी और विस्तृत प्रतीत होती हैं। क्या आपने मथुरा नगर निगम का नया कारनामा सुना ! नहीं सुना तो हम सुनाते है मथुरा नगर निगम प्रशासन का शौर्य चक्र प्राप्त करने लायक़ वह करनामा जिसे पढ़कर आप भी सोचेंगे की आखिर यूपी प्रशासन का जवाब क्यों नहीं ! मामला कुछ यूँ है कि यूपी के मथुरा में वृन्दावन कुम्भ क्षेत्र में लाखन नामक ग्रामीण की भैस गिरफ्तार हो गई वो भी हरे पत्ते खाने के संगीन मामलें में अब जब भैस की गिरफ्तारी का मामला मिडिया में वायरल हुई तो लोग पूछने लगे कि अतीक की फरार बीवी शाइस्ता और भदोही सपा विधायक जाहिद बेग की बीबी सीमा बेग को ढूढ़ने में नाकाम लोग भैस को गिरफ्तार करके शौर्य चक्र पाने लायक़ कार्य कर रहे। उत्तरप्रदेश की पुलिस का नाम आजकल अपराधियों के हौसले पस्त करने, इनकाउंटर करने, धमक पैदा करने इत्यादि कई हवाबाजी/कलाबाजी भरे कारणों की वजह से इंटरटेनमेंट चैनलों की सुर्खियों में है। योगी जी का प्रशासन, योगी जी का सुशासन और बुलडोजर सरकार निश्चित रूप से जनमानस में सुरक्षा का भरोसा बहाल कर रहा है।
भैस गिरफ्तारी का घटना यह सामान्य नहीं है, न ही सामान्य विफलता। उत्तर प्रदेश सरकार में एक समिति अवधारणा है जिसका काम सिर्फ ऐसे नये नये उपाय सुझाना है जिससे सरकार की जमकर खींच हो अर्थात खिचाई हो और कर्मचारियों की आमदनी बढ़ती रहे उधर लाखन जैसे आम आदमी की पौ फटती रहे ! पुलिस की वसूली के किस्से तो आम रहें पर अब गई भैंसिया जेल में जैसे स्लोगन नें तो नगर निगम मथुरा के कांधे पर वाहवाही का जो स्टार लगाया है वह भारत रत्न लायक है। भले आपने क्या आपकी सात पुश्तों ने कभी कोई अपराध न किया हो लेकिन अगर आपकी भैंसिया हरे पत्ते खा लें तो आप पर बदनुमा दाग़। अगर भैस के रखवाले हत्थे चढ़ गए फिर तो मजा ही मजा। आप पर थोपे जा सकने वाले अपराधों का एक पूरा मेंन्यु होगा। हरे पत्तों का लूट पाट, अवैध हथियार, चोरी की बाइक, चरस इत्यादि रखने जैसा अपराध मान लिया जा सकता है। साहिब का मूड हुआ तो मुठभेड़ भी दिखा के भैंसिया को दो चार लठ्ठ बजा भी देंगे। रेवेन्यू भी चाहिए क्योंकि वसूली का टारगेट फिक्स होता है, अब बेचारे नगर निगम वाले वसूली के लिए करें तो करें क्या और तब ज़ब कुछ नहीं सुझा तो भैस को ही शिकार बना डाला। इनका तो पूछिए मत हाल। ये बदतर स्थिति है कि नगर निगम वालों को रिकवरी नोटिस तक लें जाने वालों के लिए रिश्वत देनी पड़ रही है। कानून के रखवाले और क़ानून से ऊपर अर्थात एडिशनल ब्रह्मा । आम सामान्य आदमी की जिंदगी को अंधेरे में कैसे धकेला जाये इस पर भी नगर निगम प्रशासन रिसर्च कर रहा है। निगम का लाइनमैन बिना कुछ लिए खम्बे पर नहीं चढ़ता, निगम में घुसा चोर आनंदित रहता है। ईमानदार का जहन फाड़ के दोबर कर दो। उस पर वर्तमान समय में बजट की कटौती ने इतिहास रच डाला। जब फ़ोन करो एक ही जवाब, फॉल्ट है। नया कांड करने पर आपकी खाल उतार दिया जा रहा है, तो इन बड़े शहरों में भैंसिया कैसे सुरक्षित निकल पाती ! जहाँ ट्रैफिक विभाग का ये हाल है के कार वालों बिना दिए नहीं निकल सकते, बाईक वाले हेलमेट के साथ सुरक्षित नहीं, चालान तक सीधे एसएमएस से बन आ जाते हैं। भैस की क्या बात करें जब मुझे पता चला कि एक मित्र बेचारे जौनपुर में रहते हैं, कभी बाइक से जिले के बाहर न गए। बाइक घर में थी और चालान दूसरे जिले से कट कर मैसेज आ गया। और ये सब तो बस ट्रेलर है गुरु। राम राज्यम कथा की पूरी कहानी तो ऐसी अनंत लिखी है कि आप भी कहेँगे निगम अनंत निज कथा अनंता, सरकारी कर्मियों के लिए क्या लिखूं अब तो भैस की गिरफ्तारी सुन कर मन खट्टा हो रहा और समंदर स्याही और धरती कागज़ कर भी मथुरा नगर निगम की प्रशंसा लिखी ना जाये !

पंकज सीबी मिश्रा, रजनीतिक व्यंग्यकार / जौनपुर यूपी
