पुस्तकों के नाम और संस्करण बदलने से सबंधित जिलाधिकारी कानपुर नगर को सौंपा ज्ञापन

  • हर साल बदलती किताबों से परेशान अभिभावक, 10 साल तक पाठ्यक्रम स्थिर रखने की मांग

कानपुर।  शैक्षिक सत्र दर सत्र स्कूलों द्वारा पुस्तकों के नाम और संस्करण बदलने से अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर एम. एल. फाउण्डेशन ट्रस्ट ने जिलाधिकारी कानपुर नगर को ज्ञापन सौंपा है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोहित वर्मा ने बताया कि स्कूल हर साल नई किताबें अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे पुरानी पूरी तरह उपयोगी किताबें बेकार हो जाती हैं और अभिभावकों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है।

ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि यह प्रक्रिया न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करती है। ट्रस्ट ने मांग की है कि कम से कम 10 वर्षों तक पाठ्य पुस्तकों के नाम एवं संस्करण एक समान रखे जाएं। साथ ही, स्कूलों द्वारा निर्धारित पुस्तक सूची और मूल्यों की जांच के लिए एक निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाए, ताकि अभिभावकों को महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। रोहित वर्मा ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी से त्वरित कार्रवाई और जनहित में आवश्यक आदेश जारी करने की अपील की है। ज्ञापन देने वालों में संस्था के पदाधिकारी शामिल रहे।

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