आबकारी निति मामले में अरविंद केजरीवाल समेत बाकी आरोपियों के पक्ष में दिए गए डिस्चार्ज आदेश के खिलाफ CBI की संशोधन याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केजरीवाल खुद पहुंचे और इस मामले में न्यायमूर्ति से खुद को अलग (recuse) करने की मांग को लेकर अदालत में व्यक्तिगत रूप से दलील पेश करने की मांग की।
केजरीवाल ने अदालत में कहा कि याचिकाकर्ता के तौर पर व्यक्तिगत रूप से ई-फाइलिंग की अनुमति नहीं है। मुझे इसके लिए अदालत की अनुमति लेनी होगी। मेरे पास इसकी हार्ड कॉपी मौजूद है। मैं आज या किसी भी दूसरी तारीख पर बहस करने के लिए तैयार हूं। मैं इस याचिका पर खुद ही बहस करूंगा। मैं अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करूंगा।
वहीं, सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि, ‘कुछ लोगों का करियर संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर चल रहा है।’ तुषार मेहता ने आगे कहा कि अगर केजरीवाल खुद दलील देना चाहते हैं तो अपने वकीलों को हटा दें और बिना किसी कानूनी मदद के हर सुनवाई में खुद बहस करें। उन्होंने साफ तंज कसते हुए कहा कि ‘ये कोर्ट है, नाटक का मंच नहीं।’
मेहता ने इस मामले को देश की राजधानी का बड़ा शराब घोटाला बताते हुए जल्द सुनवाई की मांग भी की। कोर्ट ने केजरीवाल की मांग पर सीबीआई को कल तक लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। जज ने कहा कि अगर कोई और पक्षकार भी रिक्यूजल की अर्जी देना चाहे तो वह भी दाखिल कर सकता है। जिन आरोपियों ने अभी तक अपना जवाब नहीं दिया, उन्हें जवाब दाखिल करना होगा, वरना उनकी दलीलें नहीं मानी जाएंगी।
फिलहाल इस दिल्ली आबकारी नीति मामले में अगली सुनवाई सोमवार (13 अप्रैल) को दोपहर 2:30 बजे होगी। रिक्यूजल एप्लिकेशन तब दाखिल किया जाता है जब किसी पक्ष को लगे कि जज निष्पक्ष सुनवाई नहीं कर पाएंगे। इसमें जज से केस की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की जाती है। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था।
