विश्व के अनेकों देश 20 जनवरी 2025 तारीख से सहमें क्यों?

  • भारत सहित अनेकों देशों को 20 जनवरी 2025 के निमंत्रण का इंतजार-अमेरिका के सबसे बड़े संभाव्य मास डेपुटेशन प्लान की कार्यवाही तीव्र व भयावह होगी?
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दुनियाँ की नजरे जहां एक ओर 5 फरवरी 2025 को भारत की राजधानी दिल्ली विधानसभा चुनाव व 8 फरवरी को वोटो की गिनती पर लगी हुई है तो दूसरी ओर उसके पूर्व 20 जनवरी 2025 को अमेरिका के 47 वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप शपथ ग्रहण कर व्हाइट हाउस में प्रवेश करेंगे जिससे पूरी दुनियाँ अनेकों प्रश्नों से ठिठिरी हुई है कि, क्या ट्रंप दुनियाँ को बदल देंगे?, क्या जिओ पॉलिटिक्स को चलने के नियम बदल देंगे?, क्या ट्रंप का दूसरा कार्यकाल पहले से बहुत अलग होगा? क्या दुनियाँ में चल रहे दो दो युद्धों को रुकवा देंगे? क्या आतंकवाद का मुकाबला करने कोई बड़ा कदम उठाएंगे? क्योंकि जिस तरह वर्ष 2025 के प्रथम दिन ही अमेरिका पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था आम नागरिकों पर पिकअप ट्रक चढ़ाया गया जिसमें 15 लोगों को कुचल दिया गया, व बाकी लोगों पर फायरिंग भी की गई इस ट्रक पर आईएसआईएस का झंडा लगा हुआ था, व तथाकथित आतंकी टैक्सास का रहने वाला था। 2013 से 2020 तक अमेरिकी सेना में भी रहा था। इसके अलावा अवैध घुसपैठ सहित आर्थिक व्यापारिक मामलों मैं क्या नियम बदल जाएंगे, इसके साथ ही दुनियाँ क़े अनेकों देशों के नेताओं का काउंटडाउन भी शुरू हो सकने की संभावना है। चीन कनाडा रूस ईरान पनामा विश्व स्वास्थ्य संगठन के हेड, बांग्लादेश पाकिस्तान सहित अनेकों देश ट्रंप को राष्ट्रपति बनते हुए नहीं देखना चाहते थे, परंतु बहुत से देश ऐसे हैं जो वाइट हाउस में ट्रंप को देखना चाहते थे जिसमें भारत इजराइल यूक्रेन सऊदी अरब जर्मनी इटली सहित अनेकों देश थे।चूँकि विश्व के अनेक अनेकों देश 20 जनवरी 2025 से सहमे हुए हैं, इसका उत्तर जानने के लिए हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, दुनियाँ के आर्थिक व्यापारिक अवैध प्रवासियों पर कड़े फैसले लेने की संभावना! भारत सहित अनेको देशों को 20 जनवरी 2025 को व्हाइट हाउस शपथ ग्रहण समारोह क़े आमंत्रण का इंतजार, अमेरिका के सबसे बड़े संभावित मांस डिपोर्टेशन प्लान की कार्रवाई तीव्र व भयावह होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता ?
साथियों बात अगर हम विश्व के अनेकों देश के 20 जनवरी 2025 तारीख से सहमें होने की संभावना की करें तो, अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंप ने देश में मास डिपोर्टेशन प्रोग्राम को लागू करने का वादा किया है। इसका मतलब है कि अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कार्रवाई होगी। उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। इस मामले पर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को देखते हुए अटकलों का बाजार गर्म है। सबको 20 जनवरी का इंतजार है, जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 47 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे और औपचारिक रूप से कोई कार्यकारी आदेश जारी करेंगे। मीडिया के अनुसार ट्रंप के आगे के कदम हमेशा के लिए अमेरिकी होने के अर्थ को बदल सकते हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में इमिग्रेशन एक सदी से भी जयादा समय में अभूतपूर्व स्तरपर पहुंच गया है,जो अनुमानित 8 मिलियन (80 लाख) प्रवासियों की संख्या में कुल बढ़ोतरी हुई है, जिनमें से अधिकांश अवैध रूप से सीमा पार करके पहुंचे हैं। बाइडेन ने कभी भी औसत अमेरिकियों के लिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने नहीं रखा।मीडिया के अनुसार, अब अमेरिका अपने इतिहास में सबसे ज्यादा विदेशी मूल की आबादी वाला देश है, जिनकी संख्या 15 फीसद से ज्यादा है, यानी एक ऐसा बॉर्डर, जो सुरक्षित होने के बजाय छेद वाला कहा जा सकता है। इसमें बताया गया है कि मतदाता ट्रंप के बयानबाजी के प्रति संवेदनशीलहमेशा से साबित हुए हैं।
साथियों बात अगर हम 20 जनवरी 2025 को व्हाइट समारोह में शामिल होने की करें तो, इस समारोह में शामिल होने के लिए कौन से विदेशी नेता आमंत्रित होंगे, यह एक बड़ा सवाल बन चुका है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई विदेशी नेताओं को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जा चुका है।हालांकि, अभी तक किसी भी आधिकारिक स्रोत से इस बारे में पुष्टि नहीं हुई है।भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी 7 जनवरी को एक बयान जारी करते हुए कहा कि, यदि कुछ नया होता है तो वह मीडिया को किसी भी नई जानकारी से अवगत कराएगा। मेहमानों की अंतिम सूची का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है और संभव है कि भारत के पीएम को भी इस समारोह में आमंत्रित किया जाए, लेकिन अमेरिका के दो प्रमुख अखबार में इस मुद्दे को लेकर जो विश्लेषणात्मक टिप्पणियां आई हैं। उनके आलोक में  भारतीय पीएम को निमंत्रण कीसंभावनाएं कम लग रही है। दोनों अखबारों ने यह सवाल उठाया कि क्या इस संबंध की गति में कोई रुकावट आ रही है या अमेरिकी नेतृत्व ने भारतीय पीएम को आमंत्रित करने का निर्णय राजनीतिक कारणों से लिया है। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच भविष्य में किस तरह के संबंध बनेंगे, इसे लेकर कई सवाल छोड़ जाता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाकात की थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है। लेकिन फिर भी,पीएम का इस समारोह में भाग लेने के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।दूसरा कारण है आमंत्रित किए जाने वाले नेताओं की संख्या। अमेरिकी शपथ ग्रहण समारोह में आमतौर पर बहुत अधिक विदेशी नेता नहीं बुलाए जाते हैं। यह आयोजन खासतौर पर अमेरिकी राजनीति और देश की आंतरिक प्रक्रियाओं पर केंद्रित होता है। इसमें विदेश नीति के बड़े चेहरे आमतौर पर शामिल नहीं होते, और इसका उद्देश्य अमेरिका के आंतरिक राजनीति और लोकतंत्र के उत्सव को मनाना होता है। तीसरा कारण समय और प्राथमिकताएं हो सकते हैं।यदि हम भारतीय नेताओं के पिछले अनुभवों पर नजर डालें, तो कुछ अवसरों पर उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था, जबकि कुछ अवसरों पर यह आमंत्रण नहीं दिया गया।
साथियों बात अगर हम 20 जनवरी 2025 को ट्रंप के पद भार संभालने पर विश्व में पढ़ने वाले प्रभाव को पांच प्वाइंटों में समझने की करें तो, (1) 1798 का एलियन एनिमीज एक्ट, ट्रंप और उनके समर्थकों की ओर से चुनाव प्रचार अभियान के दौरान बार-बार प्रवासियों को आक्रमणकारी बताया गया, जिसके पीछ वजह है। उन्होंने कहा है कि वह अमेरिका से सभी ज्ञात या संदिग्ध गिरोह के सदस्यों, ड्रग डीलरों या कार्टेल सदस्यों को हटाने के लिए ‘एलियन एनिमीज एक्ट का इस्तेमाल’ करेंगे। इस कानून का इस्तेमाल अब तक केवल युद्ध के समय ही किया गया है, इसमें बताया गया है कि ट्रंप की ओर से इस कानून के इस्तेमाल पर कानूनी चुनौती मिल सकती है, लेकिन ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस के कहा है कि कानून की भाषा इतनी व्यापक है कि राष्ट्रपति शांति काल में आपराधिक और आव्रजन कानून की आवश्यकताओं को दरकिनार करते हुए इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेख के अनुसार, ट्रंप ने जरूरत पड़ने पर सेना और स्थानीय कानून प्रवर्तन का इस्तेमाल करने का भी वादा किया है। इसके खिलाफ भी प्रावधान हैं, लेकिन किसी का अनुमान नहीं है कि कंजर्वेटिव कोर्ट उन्हें बरकरार रखेगी या नहीं (2) कार्यस्थल पर छापे, ट्रंप की ओर से ‘बॉर्डर जार’ (अमेरिकी सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रभारी) के रूप में नामित और इमिग्रेशन और कस्टम्स इंफोर्समेंट के पूर्व कार्यकारी प्रमुख टॉम होमन ने कार्यस्थल पर मारे जाने वाले छापे फिर से शुरू करने का संकल्प लिया है। पहले की सरकारों में प्रवर्तन का एक मुख्य हिस्सा रहे कार्यस्थलों पर छापे बाइडेन के शासन में बंद कर दिए गए थे। (3) जन्मजात नागरिकता,  ट्रंप ने कहा है कि वह अमेरिका के बारे में सबसे बुनियादी विचारों में से एक को खत्म करना चाहते हैं, वो यह कि आपके माता-पिता दुनिया के किसी भी कोने से आए हों, अगर आप यहां पैदा हुए हैं तो आप अमेरिकी हैं।’ यह एक ऐसा सिद्धांत है जो विशेष रूप से 14वें संशोधन के तहत आता है। उन्होंने कहा है कि वह सरकार को उन माता-पिता की संतानों को सोशल सिक्योरिटी नंबर और पासपोर्ट जारी करने से रोकने का आदेश देंगे जो अपनी कानूनी स्थिति साबित नहीं कर सकते। (4) शरणार्थी कार्यक्रम, जो बाइडेन ने मानवीय पैरोल की नीति समेत कानूनी लोगों को अनुमति देने वाले कार्यक्रमों का विस्तार किया और ऐसा करके अवैध रूप से सीमा पार किए जाने को कम किया। हालांकि, उन्होंने कहा है कि वह अपने कार्यकाल के दौरान वेनेजुएला, हैती, क्यूबा और निकारागुआ से आए पांच लाख से ज्यादा आप्रवासियों के लिए उस ऑथराइजेशन को रीन्यू नहीं करेंगे। वहीं, ट्रंप ने बाइडेन के वर्जन को ‘पैरोल का अपमानजनक दुरुपयोग’ कहा है और इसे खत्म करने की मांग की है। (5) ड्रीमर्स ट्रंप ने डेमोक्रेट्स को एकमात्र प्रलोभन ‘ड्रीमर्स’ की सुरक्षा के लिए संभावित कार्रवाई के रूप में दिया है। ड्रीमर्स वे लोग हैं जो बच्चों के रूप में अवैध रूप से इस देश में लाए गए थे। लेख में कहा गया है कि हालांकि यह ट्रंप पर ही निर्भर करता है कि उनका यह प्रस्ताव कितना वास्तविक है क्योंकि उनका रिकॉर्ड मुलाजुला रहा है। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में भी इसी तरह का वादा किया था, लेकिन बाद में वह उससे मुकर गए थे। 
साथियों बातें कर हम राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा अपने कार्यकाल समाप्त होने के पहलेअप्रवासियों के लिए दिलेरी की करें तो, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का कार्यकाल 20 जनवरी को खत्म हो जाएगा। ऐसे में अप्रावसियों के लिए नरम दिली दिखाने वाले बाइडन ने जाते-जाते भी अप्रवासियों को तोहफा दिया है। बाइडन प्रशासन ने वेनेजुएला, अल सल्वाडोर, यूक्रेन और सूडान के 9 लाख से ज्यादा अप्रवासियों का टीपीएस 18 महीनों के लिए बढ़ा दिया है। यह कदम ट्रंप के आने के कुछ ही समय पहले उठाया गया है ऐसे में ट्रंप को आते साथ ही इस फैसले को बदलना आसान नहीं होगा।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व के अनेकों देश 20 जनवरी 2025 तारीख से सहमें क्यों?दुनियाँ के आर्थिक, व्यापारिक, अवैध प्रवासीयों पर कड़े फसलों की संभावना?भारत सहित अनेकों देशों को 20 जनवरी 2025 के निमंत्रण का इंतजार- अमेरिका के सबसे बड़े संभाव्य मास डेपुटेशन प्लान की कार्यवाही तीव्र व भयावह होगी?
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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