भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव – कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं

लेखक – लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
ऑफिस में गाली गलौज का आरोप लगाता हूं
जांच रिपोर्ट अपने पक्ष में करवाता हूं
शासन द्वारा अलॉटमेंट वस्तुओं पर नज़र रखता हूं
योजनाओं से हड़पकर बाजार में भेजता हूं
मिलीभगत से माल बाहर निकलवाता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
अनाज सीमेंट सभी पर नज़र रखता हूं
नीचे से ऊपर तक बात कर लेता हूं
चुपके से बाजार में पहुंचा देता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
निजी कंस्ट्रक्शन में ठप्पे वाला सीमेंट देता हूं
पांच किलो योजना को भी नहीं छोड़ता हूं
घपले को अनदेखा करनें छुट्टी पर चला जाता हूं
 कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
मिलीभगत चैन को पूरा खुश रखता हूं
हरे गुलाबी की बारिश करता हूं
हर साल फ्लैट प्लॉट की रजिस्ट्री करता हूं
कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Breaking News
Cockroach Janta Party के संस्थापक अभिजीत दिपके पर जयपुर में हमला, समर्थकों के कंधे पर बैठे थे, तभी दनादन मारे थप्पड़ | ममता बनर्जी के घर से निकल रहे थे कुणाल घोष, अचानक सामने आए युवक ने अंडा फेंककर किया हमला | राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच तेज, अयोध्या पहुंची 3 सदस्यीय टीम, सुप्रीम कोर्ट में भी दायर हुई याचिका | फैजल खान मेरी हत्या करवा सकता है, उसने गोली चलवाई और आरोप मुझ पर, उसे किस नेता का संरक्षण, जेल से बाहर निकलते ही रौशन आनंद का फूटा गुस्सा
Advertisement ×