बिहार की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अगला चेहरा किसका होगा। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के बीच अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर नए नेतृत्व को लेकर मंथन तेज हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार ‘महिला मुख्यमंत्री’ का कार्ड खेलकर बीजेपी न केवल जातीय समीकरण साधने की कोशिश में है, बल्कि ‘आधी आबादी’ को भी अपने पाले में करने की रणनीति बना रही है।
दरअसल, दिल्ली में वैश्य समुदाय की रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाने के सफल प्रयोग के बाद अब बिहार में भी इसी तरह के ‘विमेन लीडरशिप’ मॉडल पर विचार किया जा रहा है। इससे पार्टी को जातीय तनाव कम करने और विकासवादी छवि बनाने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं, कौन-से हैं वो नाम जो बिहार का महिला चेहरा बनकर नेतृत्व संभाल सकती है…
मुख्यमंत्री की रेस में सबसे चमकदार नाम अंतरराष्ट्रीय शूटर और जमुई से विधायक श्रेयसी सिंह का है। श्रेयसी न केवल एक खिलाड़ी के रूप में युवाओं की आइकन हैं, बल्कि उनका राजनीतिक रसूख भी काफी पुराना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी होने के नाते उनका खानदानी कद काफी बड़ा है। श्रेयसी को CM बनाने से BJP राजपूत समाज की नाराजगी दूर करने के साथ-साथ एक साफ-सुथरी और आधुनिक छवि वाला नेतृत्व पेश कर सकती है।
महिला मुख्यमंत्री की दौड़ में दूसरा और सबसे प्रभावी नाम रमा निषाद का उभरकर सामने आया है। रमा निषाद अति पिछड़ा समाज से आती हैं और पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं। उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। BJP अगर उन्हें कमान सौंपती है, तो बिहार की करीब 35 प्रतिशत अति पिछड़ा आबादी को सीधा संदेश जाएगा। रमा निषाद की अपने समाज में अच्छी पकड़ है और वे एक सशक्त महिला नेता के रूप में जानी जाती हैं।
राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता भी इस रेस में मजबूती से डटी हुई हैं। BJP उनके जरिए वैश्य समाज और अति पिछड़ा वर्ग को एक साथ जोड़ना चाहती है। हालांकि वे 2022 में दरभंगा नगर निगम का चुनाव हार गई थीं, लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर पहले ही अपना भरोसा जताया है। दिल्ली की तर्ज पर बिहार में भी किसी वैश्य महिला चेहरे को आगे कर BJP एक बड़ा सियासी दांव चल सकती है।
अब तक डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था, लेकिन हालिया घटनाओं ने समीकरण बदल दिए हैं। पटना में उनके खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और पोस्टरों के फाड़े जाने की घटनाओं से पार्टी के भीतर मतभेद उजागर हुए हैं। ऐसे में प्रेम कुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं और महिला चेहरों की दावेदारी और मजबूत हो गई है। अब देखना यह है कि BJP आलाकमान 14 अप्रैल के आसपास होने वाली NDA की बैठक में किस नाम पर मुहर लगाता है।
