महाराष्ट्र में टीसीएस कांड तो सभी को ही याद होगा। किस तरीके से भारी संख्या में लोगों का धर्मांतरण का खेल टीसीएस के अंदर चल रहा था। उसके बाद लगातार कारवाई की गई और कई लोगों की इस मामले में गिरफ्तारियां हुई। इस पूरे मामले में जो सबसे ज्यादा नाम जिसका उछला है वो है एचआर निदा खान का। आपको बता दें कि निदा खान के साथ पूछताछ हुई उसे गिरफ्तार किया गया लेकिन उसे बेल दे दिया गया है। निदा खान को बेल मिलने के बाद लोगों में गुस्सा है। लोगों में यह कहा जा रहा है कि इस तरीके के अपराध को अंजाम दिया जा रहा था और इतने आसानी से निदा खान को बेल नहीं मिलना चाहिए था। लेकिन जब जज ने निदा खान को बेल दिया तो उसके पीछे उन्होंने एक बहुत बड़ा तर्क दिया है। आपको बता दें कि निदा खान 5 महीने के गर्भवती है और इसी कारण उसे जेल से रिहा किया गया। उन्हें बेल मिल गया। लेकिन आपको पता है कि बेल देने के पीछे जज ने श्री कृष्ण के जन्म का उदाहरण दिया। उन्होंने एक बड़ी बात कही थी। जिसके बाद लोग ही सोचने के लिए मजबूर हैं कि निदा खान को बेल मिलना सही या गलत।
जज ने यह कहा कि जब श्री कृष्ण का जन्म हुआ था जैसे जेल में जन्म हुआ था उसे कलंक के तौर पर देखा जाता है और यह किसी भी बच्चे के लिए किसी ट्रॉमा से कम नहीं होगा। उसके फ्यूचर को बचाने के लिए और अजन्मे बच्चे को बदनामी से बचाने के लिए क्योंकि इसमें उस अजन्मे बच्चे की कोई भी किसी भी तरीके की गलती नहीं थी और इसी से उस बच्चे को प्रोटेक्ट करने के लिए जज ने इतना बड़ा फैसला सुनाया है जिसके बाद सोशल मीडिया में जज का यह फैसला काफी ज्यादा वायरल हो रहा है और इसके साथ ही लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या जज का यह फैसला सही था?
महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के BPO में हिंदू महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न और धार्मिक उत्पीड़न के आरोप में सात लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होने के लगभग डेढ़ महीने बाद, 7 मई को निदा खान को गिरफ़्तार किया गया। इससे पहले कोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी खारिज कर दी थी। खान के साथ आरोपी बनाए गए तौसीफ़ अत्तार को भी ज़मानत मिल गई, जबकि एक अन्य आरोपी दानिश शेख़ की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई। निदा खान के ख़िलाफ़ दर्ज शिकायत के अनुसार, उन्होंने एक बुर्का दिया, धार्मिक सामग्री साझा की, शिकायतकर्ता के फ़ोन पर इस्लामिक ऐप्स इंस्टॉल किए और धार्मिक रीति-रिवाज़ सिखाने के लिए उनके घर गईं। यह मामला मार्च 2026 में सामने आया, जब नासिक में TCS BPO यूनिट की एक दलित महिला कर्मचारी ने दानिश शेख के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई। उसने दानिश पर शादी का झांसा देकर रेप करने, यौन शोषण, उत्पीड़न और इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। जल्द ही और भी महिलाएँ सामने आईं और उसी BPO के कुछ कर्मचारियों पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, दुर्व्यवहार और उनके हिंदू धर्म का अपमान करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इस मामले में नौ FIR दर्ज की गईं और पीड़ितों ने बताया कि BPO के मैनेजमेंट के सामने शिकायत करने की उनकी कोशिशों को HR और संबंधित अधिकारियों ने नज़रअंदाज़ कर दिया था।
इस बात से सबको इत्तिफाक रखना चाहिए कि ‘नासिक टीसीएस धर्मांतरण और उत्पीड़न’ केस की मुख्य आरोपी निदा खान को भगवान कृष्ण के नाम पर जमानत मिली है, जो कि उसके लिए और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए काफी राहत की बात है। लेकिन जमानत मिलने के बावजूद उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा। अदालत में आरोप तय होने, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही दोषसिद्धि या बरी होने का निर्णय होगा। इस मामले की जांच विशेष जांच दल कर रहा है और विभिन्न एफआईआर की जांच भी जारी है। यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त करने की मांग कर सकता है।
