छात्रों के नाम पर जंतर मंतर पर विपक्षी नेताओं ने फंडेड जमात की जो भीड़ खड़ी की है वह सुधार आंदोलन करने नहीं बल्कि बस इस्तीफा – इस्तीफा खेलने आई है वरना अब तक यह आंदोलन अपनी परिणीति को प्राप्त हो गया होता । आंदोलन का मोटिव शिक्षा सुधार का कही से लग भी नहीं रहा क्यूंकि उसमें बस इस्तीफा माँगा जा रहा कभी धर्मेंद्र प्रधान का तो कभी प्रधानमंत्री का ! आंदोलन में गालियां बकी जा रही कभी दिल्ली पुलिस को तो कभी सेना के जवानों को ! देश तोड़ने की अच्छी जगह चुनकर उसमें युवाओं को फुसलाकार भाजपा से अपनी कुंठा मिटाने की साजिश का खुलासा होता जा रहा। प्रोटेस्ट में जिन लड़कियों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, उन्हें शिक्षित तो एकदम नहीं कहा जा सकता। ये वो पीढ़ी है जिसकी शिक्षा-दीक्षा इंटरनेट से हुई है। भाषा बता रही है, हमारी एक पीढ़ी व्हाट्सअप, रील्स, इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर बर्बाद हो गई इंटरनेट की भेंट चढ़ गई। जिम्मेदार कौन है ? जिम्मेदार हम हैं, जिन्होंने स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों से लेकर परिवार के भीतर तक युवा होती पीढ़ी से संवाद का मंच छीन लिया।
मां बाप अपनी संतानों के सवालों के उत्तर देने में सक्षम नहीं रहे। गालियाँ इनके लिए कॉमेडी है। बड़ों की इज्जत न करना इनके लिए फन है। रील बनाने के लिए कपड़े उतारना इनका पेशा है। अपने घर में एक चादर तक ठीक नहीं करते ये लोग, लेकिन फिलिस्तीन समस्या का हल इनके पास है। भारतीय शास्त्रों की चर्चा भी गँवारपन की निशानी है इनके लिए, हॉलीवुड के किरदारों पर चर्चा करना जागरूकता है। इंटरनेट पर ट्रेंड चल गया कि फलाँ प्रदर्शन में जाना है, तो ये सब के सब जाकर फोटो डालेंगे ही। बस इतनी सी बात है। ये किस एंगल से नीट के छात्र है ? इन्होंने इंस्टा यूट्यूब से बाहर की दुनिया देखी हो तो मालूम हो कि धरने और मार्च में रोड ब्लॉक करने के लिए पुलिस थाने से परमिशन लेना पड़ता है और बिना अनुमति लिए धरना करने पर पुलिस मामला दर्ज कर कूट सकती है और संबंधित धारा में जेल भेज सकती है ल
पिछले 30 दिन से रीलबाजो ने जंतर मंतर से लेकर संसद भवन तक खूब नौटंकी की वायरल होने के लिए सरकार से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक को अभद्र भाषा बोला, गंदी गलिया दी क्यूंकि इन्हे लगता है ऐसा करने से ये वाहवाही लूट ले जाएंगे और पड़ोसी मुल्क की नकल कर के ये भारत को नेपाल और बांग्लादेश जैसा दिखा विदेशों से अराजकता के लिए फंडिंग जुटा सकेगे। कई सारे वीडियो देखिए जिनमें नाबालिग भी मोदी योगी को भद्दे – भद्दे गालियां बकते देखे जा रहें। निशु नेहा और अन्य कई मुहफट लड़किया व्यूज जुटाने के लिए सड़को पर जोकरई कर रही। इन जोकरों को पता ही नहीं लगा कि दिल्ली पुलिस ने एक गाड़ी या कुछ गाड़ियों पे हाई डेफिनेशन कैमरा लगा रखा है और उसके साथ फेस रिकॉगनेशन सॉफ्टवेयर लगा हुआ है जो हर एक को पहचान के सोशल मीडिया से उनके प्रोफाइल खोज के उनकी फाइल बनाता जा रहा है। जल्द ही इनको समझ आ जायेगा है कि देश का सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा क्या है ! एनआईए की एंट्री हो गई है।
रासुका में मामला दर्ज होगा। सरकार से कॉकरोच टीम ने मांग तो कर दिया कि प्रोटेस्ट कर रहें लोगो पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा। पर लिस्ट तो दिल्ली पुलिस बना रही और जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा कि हो तो सरकार का आश्वासन केवल कोरा कागज़ समझिए। कुछ मुख्य किरदारों पे रासुका लगाने की तैयारी है और याद है किसान आंदोलन सैकड़ों लोग जो उस आंदोलन में काफी सक्रीय थे ऐसे ही बड़ी बड़ी बात कर रहे थे ट्रैक्टर से लाल किले पे चढ़ाई करने निकले थे सैकड़ों के पासपोर्ट निरस्त हो गए है। सैकड़ों आज भी हर हफ्ते थाने में हाजरी दे रहे है और इस कारण कही काम धंधा करने नहीं जा पा रहे है। याद रखिए यह पुरानी भाजपा नहीं जो आपको देश का मासूम नागरिक समझ कर छोड़ देगी यह ममता बनर्जी जैसे अकाट्य विष का तोड़ ढूढ़ने वाली, कश्मीर के आजादी की इबारत लिखने वाली, अखिलेश सोनिया मायावती जैसों की राजनीति ख़त्म करने वाली, उद्धव ठाकरे, शरद पवार नवीन पटनायक, जैसों को मिट्टी में मिलाने वाली भाजपा है जिसमें अमित शाह नाम का वह वजीर है जो चार चाल आगे की सोचकर ही कदम बढ़ाता है। वाकई आपको लग रहा होगा सरकार आपसे डर रही। आप हावी है। गलत फहमी है आपकी ! सरकार डरती नहीं किसी से बल्कि आपका उपयोग तब तक करती है जब तक आप उसका फायदा पंहुचाते रहेंगे उसके बाद आपको जेल में ठूस दिया जायेगा। आपको क्या लगता है बिना धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफा लिए बगैर सोनम वांगचूक ने अनशन क्यों तोड़ दिया होगा !
सोच के देखिए जरा की जो व्यक्ति पच्चीस दिन हिला नहीं वह छब्बीसवे दिन अचानक कैसे बदल गया ! शेर है वो जिनसे टकरा रहें। और शेर जब शिकार करना चाहे तो पहले पांच कदम पीछे हटता है। सरफिरे टाइप के है बिहार स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट भी मजेदार रहा है। आपदा को अवसर में बदल देने का हुनर रखते है बिहारी टियर गैस के विषय में हो या वाटर कैनन के बारे में या लाठी खाने के समय राष्ट्रगान गाने में खड़े होना। मनोरंजन की दृष्टि से देखो तो सिर्फ कॉमेडी शो लगता है और अगर आगे भविष्य का सोचो तो क्या ही होगा इनका। मतलब गजब इंसान है ये जनरेशन लेकिन गलती इनकी भी नहीं है इतना हार्ड सिलेबस और बस वही मोबाइल इंटरनेट। घरवालों का साथ मिला नहीं इनको। इन बेचारों को क्या ही पता होगा कि परिवार के लोगों का एक साथ बैठना। रात रात भर हंसी मजाक क्या होता है। काफी इमोशनल ड्यूड है आज की जनरेशन, इनको कोई भी आसानी से अपने कब्जे में कर सकता है। बुद्धि नाम का सॉफ्टवेयर इनमें अपलोड नहीं है इनको सिर्फ अपने रूम और मोबाइल से मतलब है।
वैसे प्रोटेस्ट वीडियोस में एडवेंचर फन कार्टून सब दिखा रहा सिवाय सीरियस मैटर के। अगर पर्सनल बात करूं तो मुझे भी इस प्रोटेस्ट का हिस्सा बनना है किसी के इस्तीफे या किसी के साथ नहीं सिर्फ कॉमेडी शो लाइव देखने जिससे भविष्य में अपने बच्चों को बता सकूं कि एक प्रोटेस्ट ऐसा भी था जिसमें मिडिया तक को नहीं बक्शा गया। वैसे ये जो लड़कियां बहादुरी का परिचय दे रही है कहीं न कहीं इनमें चुड़ैल का वास है जो गलत पदार्थों से जल्दी अट्रैक्ट हो जाती है । खैर मुझे इन लड़कियों की जायदा फिक्र है कल को जब ये किसी की बीवी बनेगी तो हर मोर्चे के लिए ये तैयार मिलेंगी तब उस परिवार का क्या होगा जिनमें ये बहुएँ बन कर जाएंगी ! ये जो भी प्रोटेस्ट चल रहा है बढ़िया है। ये लोग नॉन वेज स्लोगन भी मस्त लिखते है मतलब महीने भर चला तो मस्त गालियां सिख जाएंगे हम। जिनके भी बच्चे दिल्ली कोचीग करने गए या पढ़ाई करने गए है वो अपने बच्चों को अब इस मामले से दूर कर ले कही कानून के चक्कर में पड़ गए तो करियर बर्बाद हो जाएगा और सालों कोर्ट थाना पुलिस के चक्कर में निकल जाएगा बाकी जो मास्टर माइंड है उनकी कुंडली तो बन गई सरकार को तो पता था कि ये सब सड़क पे आएंगे।
अमित शाह ने साफ बोला था नक्सली खत्म हो गए अब अर्बन नक्सल खत्म होंगे और इसलिए सरकार ने ये आंदोलन होने दिया ताकि दिल्ली में सबसे ज्यादा अर्बन नक्सल का नेटवर्क है वो सामने आए और उनके खिलाफ खुद सबूत भी दे अपने खिलाफ इसलिए सरकार ने ये कैमरे फेस रिकॉगनेशन ड्रोन इसके साथ सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सब की हुई है जंतर मंतर के चारों तरफ मौजूद हर मोबाइल टावर का डेटा निकली जा रही है। किसने किसको कॉल किया किसको मैसेज किया उस सब का एनालिसिस हो रहा है और इस बार अर्बन नक्सल और उनका जिहादी नेटवर्क सब एक साथ ध्वस्त किया जाएगा क्योंकि भारत में ब्रिक्स समिट होगी और ये समिट बहुत खास होने वाली है क्योंकि उम्मीद है कि इस समिट में ब्रिक्स अपने नए वर्ल्ड पेमेंट सेटलमेंट सिस्टम को लॉन्च कर देगा जिस से अमेरिका के स्विफ्ट और डॉलर बेस्ड सिस्टम की बर्बादी तय है इस ब्रिक्स समिट में कई नए देश ब्रिक्स में जुड़ सकते है अमेरिका को ये सब पता है लेकिन उसके पहले देश विरोधी नेटवर्क ने इस आंदोलन में कूद के गलती कर दी। ब्रिक्स के पहले ही इनकी कमर टूट जाएगी। इस पीढ़ी के पास वास्तविक ज्ञान का अभाव है। इंटरनेट का ट्रेंड इन्हें जिधर ले जाएगा, ये उधर खिसक लेंगे। इनके किसी अभियान में गंभीरता हो ही नहीं सकती।

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी
