29-30 अगस्त को गंगा की अविरल धारा में संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिक चेतना का अंतराष्ट्रीय संगम  

हरिद्वार। भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन और साहित्य के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना के जागरण के उद्देश्य से दिव्य गंगा सेवा मिशन, हरिद्वार के तत्वावधान में 29 एवं 30 अगस्त 2026 को अवधूत मंडल आश्रम (बड़ा हनुमान मंदिर, शंकर आश्रम चौक), हरिद्वार में द्वितीय अंतरराष्ट्रीय दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ-2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
दो दिवसीय यह आयोजन गंगा संरक्षण, भारतीय संस्कृति, साहित्य, पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित रहेगा। आयोजन में देश-विदेश से संत-महात्मा, शिक्षाविद, साहित्यकार, पर्यावरणविद, शोधकर्ता, पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता सहभागिता करेंगे।
मिशन के कार्यकारी अध्यक्ष आचार्य धीरज द्विवेदी याज्ञिक ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव का मुख्य विषय भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना के विकास में गंगा का महत्व रखा गया है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, आस्था और जीवन-दर्शन की सनातन धारा हैं। गंगा की निर्मलता में भारत की आत्मा और उसकी अविरलता में हमारी सांस्कृतिक निरंतरता निहित है।
29 अगस्त, शनिवार को दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती एवं गंगा वंदना, स्वस्तिवाचन तथा अतिथियों के उद्बोधन के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात विचार-मंथन एवं संगोष्ठी में भारतीय संस्कृति में माँ गंगा का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व, गंगा संरक्षण की चुनौतियां एवं समाधान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरण और विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विद्वान एवं विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
सांस्कृतिक सत्र में भजन, नृत्य, नाट्य मंचन एवं अन्य आध्यात्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसी अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को गंगा सेवी सम्मान एवं टीजीटी साहित्य सेवी सम्मान से अलंकृत किया जाएगा।
कविताओं में बहेगी साहित्य और संवेदना की गंगा
30 अगस्त, रविवार को प्रातः 10 बजे से हरि इच्छा तक भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर के प्रतिष्ठित कवि एवं साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रभावना, प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना के विविध रंग प्रस्तुत करेंगे।
आचार्य धीरज द्विवेदी ने बताया कि दिव्य गंगा सेवा मिशन द्वारा वशिष्ठ गुरुकुलम का भी संचालन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को “वेद से विज्ञान तक” की शिक्षा के माध्यम से संस्कारित करना है। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से भावी पीढ़ी को संस्कारवान एवं उत्तरदायी नागरिक बनाने की दिशा में यह प्रयास निरंतर जारी है।
आचार्य धीरज द्विवेदी याज्ञिक ने देशभर के साहित्यकारों, गंगा प्रेमियों, संत-महात्माओं, पर्यावरणविदों एवं सामाजिक संगठनों से इस आध्यात्मिक-सांस्कृतिक महायज्ञ में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गंगा की सेवा ही मानवता की सेवा है। स्वच्छ गंगा, स्वस्थ भारत तथा संस्कृति, साहित्य और सेवा का यह महायज्ञ जनसहभागिता से ही अपने उद्देश्य को प्राप्त करेगा।

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