कानपुर। पंडित रवीन्द्र शर्मा पूर्व अध्यक्ष लॉयर्स एसोसिएशन ने कहा की प्रस्तावित संशोधन के द्वारा केंद्र सरकार अपने सदस्य नामित कर बार काउंसिल आफ इंडिया की स्वायत्तता समाप्त करने अधिवक्ता और अधिवक्ता संस्थाओं से हड़ताल की शक्ति को छीन उसे कदाचार की श्रेणी में लाकर कदाचार की सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज या किसी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में दो हाई कोर्ट के पूर्व जज एक सीनियर एडवोकेट और एक बी सी आई सदस्य की शिकायत निवारण समिति बना जांच कर अधिवक्ता को दंड और 3 लाख तक के जुर्माने से दंडित करने के साथ लाइसेंस तक समाप्त कर देने और केंद्र सरकार को बी सी आई को निर्देश देने सहित विदेशी वकीलों और विदेशी विधि फर्मों को नियम बना भारत में वकालत की अनुमति देने वाले संशोधन विधेयक जो बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर रचित संविधान के अनुच्छेद 19 ( विरोध का अधिकार )के विपरीत है के साथ न्यायव्यवस्था के मजबूत स्तंभ अधिवक्ताओं को कमजोर कर न्यायपालिका पर कब्जे के प्रयास करने वाले अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 की प्रतियों को शताब्दी गेट के अंदर बार एसोसिएशन के बगल में वरिष्ठों की सलाह पर फाड़कर अपना रोष प्रदर्शित किया है।
हमारी मांग है कि तत्काल अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 को वापस लिया जाए और भारत सरकार के कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जिन्होंने अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य बीमा को लागू करने को कहा था उसे लागू किया जाए। अन्यथा देश का अधिवक्ता सड़कों पर उत्तर पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
प्रमुख रूप से राम नवल कुशवाहा कोषाध्यक्ष बार एसोसिएशन अरविंद दीक्षित, गुलाम रब्बानी, शैलेश त्रिवेदी, अनूप जायसवाल, संजीव कपूर, आशुतोष शर्मा, शंभू मिश्रा, शिवम गंगवार, इंद्रेश मिश्रा आदि रहे।
