आज पूरा देश दशहरा बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। यह त्योहार अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का अमर प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब रावण ने माता सीता का छलावापूर्वक अपहरण किया, तब अधर्म का नाश करने के लिए भगवान श्रीराम ने उसका वध किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाज्ञानी रावण केवल एक अहंकारी राजा ही नहीं, बल्कि वेदों, शास्त्रों और राजनीति का प्रकांड विद्वान भी था? यही कारण है कि युद्धभूमि में रावण की मृत्यु से ठीक पहले, भगवान राम ने अपने अनुज लक्ष्मण को रावण के पास जीवन की गूढ़ शिक्षाएं लेने भेजा था। आइए जानते हैं।
रावण की पहली सबसे बड़ी सीख यह थी कि जब भी मन में कोई सकारात्मक या शुभ विचार आए, तो उसे तुरंत पूरा कर लेना चाहिए। जीवन अनिश्चित है, इसलिए अच्छे कामों को टालना अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। इसके ठीक विपरीत, यदि मन में कोई गलत या अशुभ विचार आए, तो उसे जितना संभव हो सके टालते रहना चाहिए।
रावण ने अपनी दूसरी सीख में सतर्क करते हुए कहा कि कभी भी अपने दुश्मन और रोग को कमजोर या मामूली मानने की भूल न करें। एक छोटी-सी अनदेखी बीमारी आगे चलकर जानलेवा बन सकती है, और एक साधारण सा दिखने वाला शत्रु आपको भारी नुकसान पहुँचा सकता है। स्वयं रावण ने भी श्रीराम, लक्ष्मण और वानर सेना को छोटा समझने की भूल की थी, जो उसके पूरे साम्राज्य के विनाश का कारण बनी।
तीसरी और सबसे महत्त्वपूर्ण सीख यह थी कि व्यक्ति को अपने जीवन के गहरे रहस्यों को सदैव गुप्त रखना चाहिए। यहां तक कि अपने सबसे प्रिय और करीबी व्यक्ति के सामने भी अपने राज खोलने से पहले सौ बार सोचना चाहिए। रावण की नाभि में स्थित अमृत कुंड का रहस्य केवल विभीषण को पता था, और युद्ध के दौरान इसी रहस्य के उजागर होने पर भगवान राम ने रावण का वध किया था।
