मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान : ‘नालायक औलाद को नहीं समझाया तो…..

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सूर्य चौहान की हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसी भी परिस्थिति में मित्रता या किसी भी व्यक्तिगत संबंध की आड़ में किए गए अपराधों को बर्दाश्त नहीं करेगी। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गाजियाबाद में हुई हालिया घटना समाज के लिए बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कोई व्यक्ति दोस्ती का ढोंग करते हुए किसी की जान लेता है, तो यह न केवल अपराध है, बल्कि विश्वासघात का कृत्य है। ऐसे मामलों में कानून अपना काम करेगा और दोषियों को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।

अपने बयान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी दोहराया कि सरकार आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून का पालन करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि विकास और सुशासन के उद्देश्य से बनाई गई नीतियां बिना किसी भेदभाव के लागू की जा रही हैं, लेकिन अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

योगी ने आरोप लगाया कि पिछले दिनों बकरीद के अवसर पर इन मौलवियों और मौलानाओं के ‘चेले—चपाटों’ ने सोशल मीडिया पर गाय की तस्वीरें लगाकर बधाई दी। उन्होंने कहा, “गनीमत है कि सरकार पहले से ही कदम उठाती है, तभी पर्व और त्यौहार शांतिपूर्ण तरीके से हो पा रहे हैं।” योगी ने पिछले दिनों गाजियाबाद में एक युवक की उसके मुस्लिम दोस्त द्वारा कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कैसी दोस्ती? आपने अभी गाजियाबाद में देखा होगा, दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी? यह स्वीकार नहीं है और कतई स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपनी नालायक औलाद को नहीं समझा रहा है तो वह गलती कर रहा है।

उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि मैं यही कहने आया हूं कि हम सबको इस बात को ध्यान में रखना होगा कि अहिंसा और करुणा मानवता के भूषण हैं, लेकिन शस्त्र उठाना होगा, अगर सामने खर-दूषण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान कृष्ण ने भी कहा था परित्राणाय साधुनाम। यानी सज्जनों के लिए ही हम सज्जन बनें, दुर्जनों के लिए नहीं। भगवान राम ने भी वही किया था। एक ही लक्ष्य था कि धरती को राक्षसों से विहीन कर देंगे, क्योंकि वे ऋषि-मुनियों, सामान्य नागरिकों और गरीबों की बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उनसे लड़ना होगा। उनसे निपटना होगा। देश के खिलाफ विद्रोह करने वालों के प्रति उतनी ही कठोरता के साथ, उतनी ही निर्ममता के साथ लड़ने के लिए तैयार होना होगा।

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