लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल या लैपटॉप पर झुककर रहना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी आम हो गई है। जिसका सीधा असर हमारी रीढ़ और नसों पर जरुर पड़ता है। जब कमर या पैर की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है, तो दिमाग और मांसपेशियों के बीच सिग्नल सही तरीके से नहीं पहुंच पाते। इस समस्या का परिणाम दर्द, सुन्नता और कमजोरी के रूप में सामने आता है। कई मामलों में दर्द कमर से शुरू होकर धीरे-धीरे पैर तक फैल जाता है।
जब उम्र बढ़ने लगती हैं तो कई लोगों में रीढ़ की नलिका सिकुड़ने लगती हैं, जिसे स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इसके अलावा हड्डियो पर अतिरिक्त बढ़ोतरी यानी बोन स्पर भी बन सकते हैं। इन दोनों स्थितियों में नसों के लिए जगह कम कर देती हैं, जिससे पैर की नसों पर दबाव पड़ता है और चलने में दर्द या सुन्नपन महसूस होने लगता है।
ऑफिस में लगातार आगे झुककर बैठना या लंबे समय तक बिना आराम किए बैठे रहना पैरों की नसों पर बुरा असर डाल सकता है। खराब बैठने की पोश्चर से रीढ़ की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे समय के साथ नसें दबने लगती हैं और दर्द या कमजोरी की समस्या पैदा हो सकती है।
