दमघोटूं राजनीति कर रहा विपक्ष, बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक जारी..!

पीछले ग्यारह सालों से मोदी को कोसने में लगा विपक्ष अभी तक अपना राजनैतिक अंदाज नहीं बदल पाया । उल्टे विपक्ष घोर हिंदू नफरत , आपसी जलन और दलगत ईर्ष्या के ऐसे मकड़जाल में फंस गए जहाँ से बच निकलने का कोई रास्ता बचा ही नहीं । एक तरफ बीजेपी निरन्तर नए नए अंदाज में सामने  आ रही है , नए नए तेवरों से एक एक कर लक्ष्य पार कर रही है और दूसरी ओर दमघोंटू राजनीति का पुरोधा बनकर विपक्षी नेता जनता से दूर होते जा रहे हैं ! सत्ता नहीं मिलेगी , बिल्कुल नहीं मिलेगी , इन हरकतों से सत्ता कतई नहीं मिलेगी । देश में सबसे बड़े समाज, हिंदू समाज के लिए कोई हिंदू बोर्ड या सनातन बोर्ड नहीं है जबकि देश में अल्प संख्या वाले अल्पसंख्यक समाज ने वक्फ़ बोर्ड बनवा लिया और बकायदा उसका दुरुपयोग होने दिया । राजनीति में सत्ता की जबरदस्त हवस , भयावह भूख कि वोट बैंक की खातिर आज हिंदू सांसद ही वक्फ बोर्ड अधिनियम के सामने नंगई कर रहे, देश के क्रूर मुगल शासन की पैरवी कर रहे । 1954 में वक्फ़ बोर्ड बना किंतु किसी ने सनातन बोर्ड नही बनाया आखिर क्यों  ! चलिए अब वर्तमान राजनीति में देखिए बीजेपी ने अपने हर कार्यकाल में एक बड़ा धार्मिक विवाद निपटाया। पहले आर्टिकल 370 , फिर राम मंदिर और अब तीसरे कार्यकाल का एक बड़ा कारनामा वक्फ बोर्ड । अभी दो और बड़े काम अगले वर्ष होने हैं , यूसीसी उनमें से एक है । देखिए मोदी ऐसे नेता हैं जिन्हें सदा से बड़ी से बड़ी लकीरें खींचने का प्रयास सफलता पूर्वक  किया है । भाजपा बार – बार विपक्ष से आग्रह करता रहा है कि छोड़िए नफ़रत की राजनीति ! देश के मुसलमान लम्बे समय तक आपका वोटबैंक नहीं बने रहेंगे । वह दिन दूर नहीं जब मुस्लिम समझ पूरी तरह जान जाएगा कि उसका सच्चा हितैषी कौन है ?   खैर ! अब वक्फ़ था है और रहेगा पर ठनक चली जाएगी , लूट पाट चली जाएगी , आम मुसलमान के चेहरे पर संतोष मुस्कुराएगा , लूट खसोट करने वाले नेताओं की चमक मिट जाएगी , छद्मवादी   चेहरों से नूर झड़ जाएगी । वक्फ़ बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास हो गया , जल्द कानून बन जाएगा । अब वक्फ़ रहेगा  लेकिन चुनींदा हाथों में नहीं , आम मुसलमान और सरकारी अधिकारियों की निगरानी में रहेगा । कारनामों पर निगाह रखने के लिए दो औरतें भी रहेंगी और और दो हिन्दू भी रहेंगे । मतलब नेताओं के इशारों पर नाचने वाले बड़े बड़े सूरमा अब मनमर्जियां नहीं कर पाएंगे । जो लोग किसी जिन्न की तरह किसी भी जमीन पर हाथ रख देते और हड़प लेते, उनके जमाने मोदी सरकार में लद गए ? भारत में लोकतंत्र है , था और सदा रहेगा , वक्फ़ बिल संशोधनों ने बता दिया है , 145 करोड़ देशवासियों के सामने मोदी ने फिर सीना ठोककर जता दिया है की यह छपन्न इंची ही है । बीते दिनों  वक्फ संशोधन विधेयक 288/232 मतों से पारित हो गया । लोकसभा का ऐतिहासिक सत्र तड़के 2 बजे के बाद तक चला था । मोदी सरकार की यह बहुत बड़ी जीत है । वक्फ संशोधन बिल पास होने पर मोदी सरकार ने इतिहास का एक और पृष्ठ लिख दिया है । जनता बार बार ट्रेलर दिखा रही है , बिहार में भी दिखाएगी और अगले साल बंगाल में भी ? 2 अप्रैल 2025 का दिन अब इतिहास में दर्ज़ हो गया । एक बहुत बड़ा दिन लोकतंत्र के लिए भी और आम मुसलमानों के लिए भी । बेशक आज न लगे पर एक दिन सब जान जाएंगे कि वक्फ में संशोधन कितना जरूरी था । उसी तरह जिस तरह तीन तलाक़ का खात्मा जरूरी था । तभी तो दुनियाभर में अनेक इस्लामिक देशों में वक्फ बोर्ड है ही नहीं । संसद में किसी भी बड़े विषय पर बहस हो , जानकारी खूब मिलती है । अब जमाना सोशल मीडिया का हो और गड़े मुर्दे न उखड़ें , संभव नहीं । देखिए कल दिनभर लालू यादव को भारत रत्न मांग करने का वीडियो मीडिया में तैरता रहा अरे अब एक चारा चोर को भारत रत्न मतलब पुरस्कार का भी बंटाधार कर देगे । कभी संसद में मंत्री पद से दिया गया वह भाषण याद कीजिए जिसमें लालू वक्फ बोर्ड को उखाड़ फेंकने की बात कर रहे हैं ।  ऐसे ही पुराने वीडियो उद्धव और शरद पवार के भी वायरल हुए । संसद में चली बहस का जितना भी अंश सुन पाए उससे जाहिर हुआ कि राजनैतिक दल किस हद तक मुस्लिम वोट के आगे माथा टेकते आए हैं । बदनामी का एक चावल देखना हो तो यूपी में आजम खान को देख लीजिए । अब परिवार सहित जेल में एड़ियां रगड़ रहे हैं , 450 गरीब मुसलमानों की जमीनें डकार कर निजी विश्वविद्यालय खोल चुके हैं। ऐसे करिश्माई नेताओं की भरमार है वक्फ बोर्डों में । खैर ! जो लोग दावे कर रहे थे कि वक्फ़ लाने पर सरकार गिर जाएगी , उनके मुगालते भी दूर हो गए । एक बार फिर साबित हो गया कि मोदी है तो मुमकिन है । असंभव का शब्द शाह मोदी की डिक्शनरी नहीं है । साबित हुआ कि एनडीए सरकार तीसरी बार भी अपनी वही खनक कायम रखे हुए है । किसी के लिए भी आसान नहीं है भाजपा की काट ढूंढना ? अपनी वोट परस्ती के चलते विरोधी दल कितना हिन्दू वोट बैंक खो रहे हैं , इन दलों को आगे आगे पता चलता रहेगा । उधर  बिहार में पसमांदाओं की संख्या 73% है जो देश में सर्वाधिक है  ये सारे पसमांदा वक्फ बोर्ड संशोधन पर खुशी जाहिर कर रहे । और इनकी पूरी कौम नीतीश कुमार के मुरीद हैं । ऐसे में दो चार मुस्लिम नेता जो वोट के ठेकेदार है ,जेडीयू छोड़ भी जाएं तो नीतीश को फर्क नहीं पड़ेगा । वक्फ़ में संशोधन यूँ ही नहीं किए गए जनाब ? आप राजनीति करते हैं तो राजनीति के मझे खिलाड़ी आपसे बढ़िया जानते हैं ।
पंकज सीबी मिश्रा/राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

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