पश्चिम बंगाल में वक्फ बिल के विरोध में मुस्लिम संगठन के कुछ लोगों ने हाहाकार मचा रखा है. मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में दंगाइयों ने हिंदू लोगों को उनके ही घरों में घुसकर धमकाया और जमकर तोड़फोड़ की. हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, कई लोग घायल है. अपवाद हर जगह होते हैं फिर भी कहा जा सकता है कि जनता पुलिस पर अक्सर गंभीर सवाल उठाती है, क्योंकि राज्य कोई भी हो अक्सर पुलिसिया पैटर्न एक जैसा ही रहता है. इसी वजह से आम जन और शिकायतकर्ता ही खौफ में रहते हैं. यही नजर आया बंगाल में जहां पर वक्फ बिल के कानून बनने के बाद पश्चिम बंगाल में जहां कई जगहों पर जमकर हिंसा हुई.
वक्फ के विरोध में मुस्लिम समुदाय के संगठनों ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया. उस आयोजन के बीच भटके हुए दंगाइयों ने ऐसा खुला उत्पात और बवाल मचाया कि लोगों ने मौत का तांडव अपनी आंखों से देखा. हिंसा के बाद रविवार को डीजीपी ने कहा, ‘स्थिति नियंत्रण में है’. वहीं खुद सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के विधायक ने पुलिसिया कामकाज की पोल खोलकर रख दी है.
वहीं जिनके घर वक्फ का विरोध करने वाले दंगाइयों की गुंडा-गर्दी में तोड़फोड़ और जलकर बर्बाद हो गए उनके पीड़ित अब भी दहशत के मारे सदमें में हैं. अपनी आपबीती सुनाते हुए लोगों ने क्या कुछ कहा, आइए बताते हैं.
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, ‘वे लोग एक भीड़ के साथ हमारे घरों में घुस गए और सब कुछ तहस-नहस कर दिया. इस अशांति में तीन लोगों की मौत हो गई, कई लोग घायल हो गए और सैकड़ों लोग विस्थापित हो गए.
दुकानदार ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘हमें सुरक्षा चाहिए, कुछ और नहीं. हमारी दुकानों में तोड़फोड़ की गई. हम कहां जाएंगे, हमारे परिवार में बच्चे और महिलाएं हैं.’
इसी चिंता को दोहराते हुए एक अन्य दुकानदार ने कहा, ‘उन्होंने दुकानों को जला दिया और घरों में तोड़फोड़ की. अगर हालात शांतिपूर्ण होने चाहिए तो हम चाहते हैं कि यहां बीएसएफ की स्थायी मौजूदगी हो. यहां से एक पुलिस स्टेशन बहुत नजदीक है, लेकिन वे नहीं आए.
इस अराजकता के बीच बीजेपी नेता और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण 400 से अधिक हिंदुओं को अपने घरों से पलायन को मजबूर होना पड़ा है.
खुद सत्ताधारी पार्टी के एक विधायक ने पुलिस की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि हिंसा के पहले दिन तो पुलिस कहीं सीन में ही नहीं दिख रही थी. दावों और जवाबों के बीच, एक मीडिया हाउस ने फरक्का से टीएमसी विधायक मनिरुल से बात की, जिन्होंने आरोप लगाया कि मुर्शिदाबाद में उन पर हमला किया गया और पुलिस स्थिति को संभालने में सक्षम नहीं थी.
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शनिवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस और सुरक्षाकर्मी एक खास इलाके में लगातार निगरानी रखते हुए गश्त कर रहे हैं. मुर्शिदाबाद में शनिवार और रविवार दोनों दिन वक्फ अधिनियम के खिलाफ हुई झड़पों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच राजनीतिक वाकयुद्ध छिड़ गया है. बीजेपी, टीएमसी पर तुष्टीकरण का आरोप लगा रही है. टीएमसी कह रही है कि बीजेपी लोगों को भड़का रही है. बीजेपी ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.
पश्चिम बंगाल पुलिस ने अपने बयान में कहा, ‘हिंसा के सिलसिले में अब तक 150 को गिरफ्तार किया गया है. मुर्शिदाबाद के धुलियान, समसेरगंज में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रभावित क्षेत्रों – सुती, धुलियान, समसेरगंज और जंगीपुर से कोई नई हिंसा की खबर नहीं आई है, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं.
सुरक्षा बल संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं, वाहनों की जांच कर रहे हैं और रात भर छापेमारी जारी रहने के कारण कड़ी निगरानी रख रहे हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हिंसा की घटनाओं की जांच चल रही है. इसलिए कुछ और गिरफ़्तारियां हो सकती हैं.’
