कानपुर। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के आह्वान पर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों की लंबित मांगों एवं समस्याओं के समाधान हेतु प्रारंभ हुआ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर है।
दयानंद महाविद्यालय के8 शिक्षकाओ ने कहा लंबे समय से हमारी न्यायोचित मांगें शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग के समक्ष उठाई जाती रही हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश अनेक आश्वासनों के बावजूद उनका समाधान नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप प्रदेश का शिक्षक समुदाय निरंतर उपेक्षा, असमानता और अनिश्चितता का सामना कर रहा है।
हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि शिक्षक समाज के सम्मान, अधिकारों, समानता और न्याय के लिए है। शिक्षक साथियों! अब समय केवल मांग उठाने का नहीं, बल्कि अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए संगठित और निर्णायक संघर्ष करने का है।
हमारा आंदोलन तभी सफल होगा जब प्रदेश का प्रत्येक शिक्षक अपनी व्यक्तिगत व्यस्तताओं एवं सीमाओं से ऊपर उठकर सामूहिक हितों के लिए आगे आएगा। महासंघ द्वारा घोषित चरणबद्ध आंदोलन के प्रत्येक कार्यक्रम में शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित करें। कोई भी शिक्षक साथी स्वयं को इस संघर्ष से अलग न समझे। आज हमारी एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
