भावनानी के भाव – जिसके पास पिता है उसकी तकदीर बुलंद है 

लेखक चिंतक कवि – किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
पिता ज़मीर पिता जागीर है
पिता ईश्वर अल्लाह का ही एक रूप है
जिसके पास पिता है
उसकी तकदीर बुलंद है
पिता परिवार की अग्रणी आस है
 जिंदगी में पिता का ओहदा खास है
परिवार का खास प्यारा बॉस है
 पिता एक उम्मीद एक आस है
पिता जिम्मेदारियों की गाड़ी से
लदा हुआ खास सारथी है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला
हमदर्द साया और बिछौना है
पिता हमारे सपनों को पूरा
करने वाली हमारी प्यारी जान है
जग में कहने को एक बात है
पिता मां और बच्चों की पहचान है
जो पिता का अपमान करते हैं
वह जीव घोर अन्यायी और पापी है
कंस दैत्य और रावण की कॉपी हैं
परंतु धन्य पिता उनके लबों पर हमेशा माफ़ी है

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