भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव – सर्टिफिकेट की घर पहुंच सेवा देता हूं 

लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार कानूनी लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
आम जनता को सर्टिफिकेट के लिए घुमाता हूं
हरे गुलाबी देने वालों को घर बैठे पहुंचाता हूं
मिलीभगत से साइन थप्पे लगवाता हूं
सर्टिफिकेट की घर पहुंच सेवा देता हूं
डिजिटल युग का भी तोड़ निकाला हूं
आंखें फड़फड़ाती दस सेकंड की वीडियो क्लिप
घर से मंगवाकर ऑनलाइन सेट कर देता हूं
सर्टिफिकेट की घर पहुंच सेवा देता हूं
जितनी रिस्क उतने हरे गुलाबी लेता हूं
बहुत सफाई से शासन को चुना लगाता हूं
पारदर्शिता की पूरी धज्जियां उड़ाता हूं
सर्टिफिकेट की घर पहुंच सेवा देता हूं
डिजिटल में कमाई कम हुई है मानता हूं
डिजिटल में भी सेंध लगाना जानता हूं
मिलीभगत से काम आसानी से करता हूं
सर्टिफिकेट की घर पहुंच सेवा देता हूं
भ्रष्टाचार देवता की रोज़ पूजा करता हूं
उसकी कृपा पर ही अय्याशी करता हूं
बेईमानी का खून परिवार के नसों में भरता हूं
सर्टिफिकेट की घर पहुंच सेवा देता हूं

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